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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Arjun Kagiya Family
    संस्मरण

    अर्जुन कागिया परिवार | Arjun Kagiya Family

    ByAdmin October 1, 2024October 1, 2024

    श्री अर्जुन कागिया गांव कागिया छाछरो ज़िला थरपारकर सिंध के पुत्र श्री पूरा की शादी सन् 1847 को गांव भाडासिंधा में श्री सोहजो पुत्र लाखो जोगू के घर श्रीमती बाओली से हुई । जिसकी तीन संतान क्रमश:1, खेतो 2, ठाकरो 3, टोहो हुए जिसमें टोहो की शादी सन् 1875 को गांव बिकलोकर श्रीमती रेखी पुत्री…

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  • आई लव आरटीसी जोधपुर
    कविताएँ

    आई लव आरटीसी जोधपुर

    ByAdmin October 1, 2024October 1, 2024

    आई लव आरटीसी जोधपुर अब बनने जा रहें है हम भी अधिनस्थ अधिकारी,जिसके लिए कर रहें है हम दिन और रात तैयारी‌।कर दिया है केरिपु बल ने आदेश इसका ये जारी,वक्त निरन्तर निकल रहा बढ़ेगी अब जिम्मेदारी।। कभी ना सोचा हमने सपने में लगेगा यह सितारा,मुश्किल राहें क़दम डगमगाएं पर हिम्मत न हारा।समझा मेंने सबको…

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  • आखिर तुम हो मेरे कौन
    कविताएँ

    आखिर तुम हो मेरे कौन?

    ByAdmin October 1, 2024October 2, 2024

    आखिर तुम हो मेरे कौन? खिलते हो मुरझाते हो,आकर रोज सताते हो।सुन्दर गीत एक सुनाकर,मन बेचैन दर्पण बनाकर ।सुधि आते हो बारम्बार,करते हो मुझपर ऐतबार।बात नहीं कर पाती तेरी,रोकूँ याद न रूकती तेरी।आखिर तुम हो मेरे कौन?? प्रति रोम-रोम स्पन्दित होती,सुधियों में आनन्दित होती।आच्छादित प्रियवर बन कर,आह्लादित उर करते मन भर।अनमोल भाव तेरा ठाकुर,तुमसे मिलन…

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  • Navratri festival (Chaitra) ninth day
    कविताएँ

    नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) चतुर्थ दिवस

    ByAdmin October 1, 2024October 1, 2024

    नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) चतुर्थ दिवस भुवाल माता तार दो तार दो हमको , माता तार दो ।राग – द्वेष का पर्दा हमारे नयनों के आगे छाया ।भव भ्रमण की ठोकरें खाकर भी हम सम्भल नहीं पाये ।भुवाल माता तार दो तार दो हमको , माता तार दो ।संसार में घूम घूम कर देखा…

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  • Roz jeetee hoon roz marti hoon
    ग़ज़ल

    रोज़ जीती हूँ रोज़ मरती हूँ | Roz Jeetee Hoon Roz Marti Hoon

    ByAdmin October 1, 2024October 1, 2024

    रोज़ जीती हूँ रोज़ मरती हूँ ( Roz jeetee hoon roz marti hoon ) रोज़ जीती हूँ रोज़ मरती हूँशम्अ सी रोज मैं तो जलती हूँ पिघला देती हूँ मैं तो पत्थर कोमैं जो सोचूँ वही मैं करती हूँ ईंट का दूँ जवाब पत्थर सेमैं कहाँ अब किसी से डरती हूँ बीत जाता तो फिर…

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  • कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के उर्दू व हिंदी विभाग ने मनाया अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस
    साहित्यिक गतिविधि

    कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के उर्दू व हिंदी विभाग ने मनाया अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस

    ByAdmin September 30, 2024September 30, 2024

    कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के भाषा एवं कला संकाय के अंतर्गत चल रहे उर्दू विभाग एवं हिन्दी विभाग ने अन्तरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस मनाया । इस कार्यक्रम का विषय “उर्दू से दीग़र ज़बानों में तराजुम” रहा,। लैंग्वेज प्रोफेशनल्स को उनके काम के प्रति सम्मान देने और अनुवाद के वैश्विक महत्व को स्वीकार करने के लिए इस दिन…

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  • Dekh to Sahi
    ग़ज़ल

    देख तो सही | Dekh to Sahi

    ByAdmin September 30, 2024September 30, 2024

    देख तो सही ( Dekh to Sahi ) कोई भी रह न जाए कसर देख तो सहीचल छोड़ बात चीत मगर देख तो सही रख कर मुझे वो ढूँढ रहा है यहाँ वहाँचिल्ला रहा हूँ कब से इधर देख तो सही नाज़ुक सी शै पे बार-ए-क़यामत है किसलिएयारब तरस खा सू-ए-कमर देख तो सही हैरत-ज़दा…

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  • Ye Haal Hai Hamara
    ग़ज़ल

    यह हा़ल है हमारा | Ye Haal Hai Hamara

    ByAdmin September 30, 2024September 30, 2024

    यह हा़ल है हमारा ( Ye Haal Hai Hamara ) यह हा़ल है हमारा मुरव्वत के बाद भी।तन्हा खड़े हैं सबसे मुह़ब्बत के बाद भी। अल्लाह जाने किसकी लगी है नज़र हमें।अफ़सुर्दगी है रुख़ पे मुसर्रत के बाद भी। रह-रह के उनकी याद सताती है इस क़दर।आती नहीं है नींद मशक्कत के बाद भी। लाया…

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  • नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) तृतीय ( द्वितीय ) दिवस
    कविताएँ

    नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) तृतीय ( द्वितीय ) दिवस

    ByAdmin September 30, 2024September 30, 2024

    नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) तृतीय ( द्वितीय )दिवस भुवाल माता का नाम मंगलकारी है ।आत्म रमण री सुखद सवारी हैं ।भव कम करने री सुखद सवारी है ।भुवाल माता का नाम मंगलकारी है ।बनती शान्त तरंगें मन की स्वस्थ ह्रदय की भावना ।जागृत बनती क्षण – क्षण में सोई हुई सम्भावना ।भुवाल माता का…

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  • Uthaane ke Baad
    ग़ज़ल

    उठाने के बाद | Uthaane ke Baad

    ByAdmin September 29, 2024September 29, 2024

    उठाने के बाद ( Uthaane ke Baad ) दिल की महफ़िल से मुझको उठाने के बादकोई रोता रहा मुस्कुराने के बाद उनके तीर – ए – नज़र का बड़ा शुक्रियाज़िन्दगी खिल उठी चोट खाने के बाद हौसलों को नई ज़िंदगी दे गयाएक जुगनू कहीं झिलमिलाने के बाद उसने दीवाना दिल को बना ही दियाइक निगाह…

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