• बाहों में जब वो आएंगे | Bahon Mein Jab

    बाहों में जब वो आएंगे ( Bahon mein jab bahon woh aayenge ) बाहों में जब वो आएंगे।ग़म ख़ुशियों में ढल जाएंगे। याद उन्हें जब आएंगे हम।मन ही मन वो मुस्काएंगे। अ़र्ज़ -ए-तमन्ना पर वो हमारी।ग़ौर कभी तो फ़रमाएंगे। रह-रह कर यूं दिल वो हमारा।देखें कब तक तड़पाएंगे। इक दिन ऐसा भी आएगा।गीत हमारे सब…

  • नवरात्रि पर्व (अश्विन )

    नवरात्रि पर्व (अश्विन ) भुवाल माता पर आस्था अम्बर हैं ।यह निश्छल ,अविरल , अपलक है ।यह सत्यं-शिवं -सुन्दरं क्षेमंकर हैं ।यह आत्म पथ फलदायी सुखकर है ।भुवाल माता का स्मरण सदा सुखदायी है ।भुवाल माता पर आस्था अम्बर हैं ।जब तक रहता है नील गगन में तारातब तक छविमान दिखता लगता प्याराजब अपने उच्च…

  • पर तू बदल गया | Par tu Badal Gaya

    पर तू बदल गया ( Par tu Badal Gaya ) मौसम विसाले यार का फिर से निकल गयामैं तो वहीं खड़ी रही पर तू बदल गया मिसरे मेरे वही रहे मौज़ूं फिसल गयामेरी ग़ज़ल पे तेरा ही जादू जो चल गया ममनून हूँ सनम मैं करूँ शायरी नईनज़रों पे मेरी तीर मुहब्बत का चल गया…

  • हैरत ही सही | Hairat hi Sahi

    हैरत ही सही ( Hairat hi Sahi ) मुझको सच कहने की आदत ही सहीहो अगर तुझको तो हैरत ही सही तंज़ और तल्ख़ी का आलम तौबाउनकी बातों में हक़ीक़त ही सही हम ज़ुबां रखते हैं मुहब्बत कीतेरे लब पे है कुदूरत ही सही दिल को भाए जो वही करते हैंदेते वो हमको नसीहत ही…

  • मनभावन | Manbhawan

    मनभावन ( Manbhawan ) मनभावन प्रतिबिम्ब तुम्हारे ,जब सुधि में उतराये हैं ।पाँव तले कंटक भी हों यदि हम खुलकर मुस्काये हैं ।। क्या दिन थे वे जो कटते थे लुकाछिपी के खेलों मेंबन आती थी अनायास जब मिल जाते थे मेलों मेंचूड़ी ,कंगन ,बिंदिया, गजरा देख-देख हर्षाये हैं ।।मनभावन ————— बागों में हर दिवस…

  • सपनों की उड़ान | Sapno ki Udaan

    सपनों की उड़ान ( Sapno Ki Udaan ) सपनों की उड़ान,छू लेती ,आसमान ।करती पूरे ,अरमान ।लाती है ,ये मुस्कान ।भर देती , दिल में जान ।अलग है , इसकी शान ।अद्भुत है ,ये उड़ान ।वाह ,सपनों की उड़ान । श्रीमती प्रगति दत्तअलीगढ़ उत्तर प्रदेश यह भी पढ़ें :

  • महान क्रियायोगी थे : लाहिड़ी महाशय

    लाहिड़ी महाशय का जन्म 30 सितंबर 1828 ई को एक धर्मनिष्ठ प्राचीन ब्राह्मण कुल में बंगाल के नदिया जिले में स्थित घुरणी ग्राम में हुआ था। इनका पूरा नाम श्यामाचरण लाहिड़ी था। तीन-चार वर्ष की आयु में ही वे प्रायः बालू में केवल सिर बाहर और अन्य सारा शरीर बालू के अंदर रखते हुए इस…

  • जब वो हद से गुजर गया | Jab Wo Had se Guzar Gaya

    जब वो हद से गुजर गया ( Jab Wo Had se Guzar Gaya ) जब वो हद से गुजर गया।मैं भी वादे से मुकर गया। आता नहीं है अब भी बाज।लोग कहते हैं कि सुधर गया। देखा उसे सरहद पार करते।पूछते हैं सबसे किधर गया। भूख को पूछना है तो उससे पूछो।निवाला छूट कर जिसका…

  • मुंबई की बरसात | Mumbai ki Barsaat

    किस्सा उस समय का है जब मुंबई बम्बई हुआ करती थी। मेरी दीदी की शादी 1984 में मुंबई के एक परिवार में हुई थी। उस समय दिल्ली से अगर मुंबई जाना होता था तो हफ्तों, महीनों पहले प्रोग्राम तय करना होता था। फोन आदि भी नहीं होते थे। मेरी उन दिनों संचार मंत्रालय में नयी…

  • तुम्हारी बात का | Tumhari Baat Ka

    तुम्हारी बात का ( Tumhari Baat Ka ) तुम्हारी बात का जिस पर नशा है ।उठाने को तेरा घूंघट खड़ा है ।।१ नज़र भर देख भी ले जो तुम्हें अब ।कहाँ फिर होश में रहता खड़ा है ।।२ तुम्हें जो छू रही है बे-इजाजत ।वही मगरूर अब देखो हवा है ।।३ किसी के जो बुलाने…