• शिव शंकर कैलाशपति | Shiv Shankar Kailashpati

    शिव शंकर कैलाशपति ( Shiv Shankar Kailashpati )   शिव शंकर कैलाशपति की, कर ले सेवा यार मेरा। औघड़ दानी भोला भंडारी, भर देगा भंडार तेरा। शिव शंकर कैलाशपति की जटा लपेटे सर्प की माला, नीलकंठ शंकर प्यारे। करै बैल असवारी बाबा, शीश पे शिव गंगा धारे। जल भर लोटा चढ़ावे शंभु, मिट जाए मन…

  • औरत | Aurat

    औरत ( Aurat )  ( 2 ) औरत फूलों की तरह….नाज़ुक सी होती है, मगर…काँटों को भी पलकों से वो चुनती है, उसके चरित्र की धज्जियां दुनिया उड़ाती है, फिर भी.मोहब्बतों से इसको वो सजाती है, रखी है जिसके पैरों के नीचे ख़ुदा ने जन्नत, उठाके चरित्र पे उँगली भेजते उसपे लानत, चलते हैं उसके…

  • शायर विनय साग़र जायसवाल के ग़ज़ल संग्रह पयामे-ज़ीस्त का लोकार्पण

    शायर विनय साग़र जायसवाल के ग़ज़ल संग्रह पयामे-ज़ीस्त का लोकार्पण एवं सम्मान समारोह का आयोजन के बी एस प्रकाशन दिल्ली द्वारा साहित्य कार निरुपमा अग्रवाल के निवास प्रभात नगर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता रणधीर प्रसाद गौड़ धीर ने की मुख्यातिथि रहे वरिष्ठ कवि गगन गौतम विशिष्ट अतिथि रहे हिमांशु श्रोतिय निष्पक्ष, कार्यक्रम…

  • बेपरवाही | Beparwahi

    बेपरवाही ( Beparwahi )   खंडहर बोलते तो नहीं कुछ फिर भी बयां कर देते हैं बहुत कुछ रही होगी कभी हवेली शानदार अपनों की किरदार में ही बचा ना कुछ समय मुंह से तो कुछ नहीं कहता कभी पर आगाह जरूर करते रहता है संभल जाते हैं जो वक्त के हालात पर नामो निशान…

  • निर्लज्ज बेरोज़गारी | Nirlaj Berojgari

    निर्लज्ज बेरोज़गारी ( Nirlaj Berojgari )   खाली पड़ी ज़ैब से सपने भी खाली आते है, बेकारी की गाली खाते को, अपने भी गाली दे जाते हैं। सारे रिश्ते-नाते बेगाने से मुँह तकते रहते, गुनाहगार की तरह, ‘रोज़गार का प्रश्नचिह्न’ लगाते हैं। अपने ही घर में परिवार का कलंक कहलाकर, माँ-बाप के टुकड़ों पर पलने…

  • होलिया में गरवा लगवा | Holiya me

    होलिया में गरवा लगवा छुटि जाई दुनिया -जहान, होलिया में गरवा लगावा। जाई नहीं सथवाँ ई महल-अटरिया, दाग से बचावा तू अपनी चदरिया। अपनी चदरिया हो,अपनी चदरिया, अपनी चदरिया हो,अपनी चदरिया, नाहीं करा तनिको ग़ुमान, होलिया में गरवा लगावा, नाहीं करा तनिको ग़ुमान, होलिया में गरवा लगावा, छुटि जाई दुनिया -जहान, होलिया में गरवा लगावा।…

  • प्रणय उत्संग | Pranay Utsang

    प्रणय उत्संग ( Pranay Utsang )   प्रणय उत्संग,उत्सविक हावभाव जीवन पथ अभिलाष प्रभा, आनंदिका स्पर्श अनुभूति । पर वश श्रृंगार विहार, चाल ढाल सम अरुंधति । मधुर मृदुल स्वर लहरियां, उष्ण विराम शीतल छांव । प्रणय उत्संग,उत्सविक हावभाव ।। आचार विचार व्यवहारिकी, स्व पालन नैतिक संहिता । अवांछित संकीर्णता पटाक्षेप, सकारात्मक सोच अंकिता ।…

  • अल्बर्ट आइंस्टीन | Albert Einstein

    अल्बर्ट आइंस्टीन ( Albert Einstein )   तुम्हें आशिक कहे या वैज्ञानिक कुछ ना समझ मैं पाता। दुनिया ने माना तुम्हें महानतम वैज्ञानिक । जिसके बुद्धि का लोहा आज भी माना जाता । लेकिन तुम्हारे दिल में जीवन भर रही एक टींस एक प्यास अपने प्रियतम को पाने की। प्रेम की खोज में खोज डालें…

  • कहां होती | Kahan Hoti

    कहां होती ( Kahan Hoti )   रवैये में लचक कोई मुरव्वत ही कहां होती कभी सरकार की हम पर इनायत ही कहां होती। जो बातिन है वो ज़ाहिर हो ही जाया करता है इक दिन असलियत को छुपाने की ज़रूरत ही कहां होती। मेरी तकलीफ़ में जगती है वो शब भर दुआ करती हो…

  • अस्तित्व की तलाश | Astitva ki Talash

    अस्तित्व की तलाश ( Astitva ki Talash )   पुरुष प्रधान समाज में अटक रही है नारी, जमीन आसमां के बीच लटक रही है नारी ! सब कुछ होकर भी कुछ पास नहीं उसके, अस्तित्व की तलाश में भटक रही है नारी ! बंदिशों के जाल में फँसी मछली की तरह, खुद से लड़ती किस्मत…