साथ | Saath
साथ ( Saath ) मिलनेवाले तो मिल हि लेते हैं न मिलने वाले तो साथ रहकर भी मिल नही पाते खेल है सारा भावनाओं का बिन चाहत के हम जुड़ नही पाते साथ साथ चलना जरूरी नही होता दूर रहकर भी करीब रह लेते हैं लोग तन और धन का आखिर बजूद हि क्या…
साथ ( Saath ) मिलनेवाले तो मिल हि लेते हैं न मिलने वाले तो साथ रहकर भी मिल नही पाते खेल है सारा भावनाओं का बिन चाहत के हम जुड़ नही पाते साथ साथ चलना जरूरी नही होता दूर रहकर भी करीब रह लेते हैं लोग तन और धन का आखिर बजूद हि क्या…
बेटे का मकान ( Bete ka Makan ) कभी रहती थी माँ गाँव में, बाबूजी के बनाए मकान में, अब रहने लगी है माँ, बेटे के बनाए मकान में | शहर की गगनचुंबी इमारतों में, तलाशती रहती है,थोड़ी सी धूप, मेरे दसवें माले के फ्लैट की बालकनी में| फ्लैट में सजाए बोनसाई में, याद…
औरत समपर्ण है ( Aurat Samarpan Hai ) औरत को एक जन्म में समझना चाहते हो ग़लत फ़हमी में हो औरत को समझने के लिये एक जन्म नहीं, कई जन्म चाहिए औरत का दिल समन्दर की तरह है मोम की तरह है, पत्थर की तरह है औरत समपर्ण है आकर्षण है पारे जैसा दर्पण…
चलो अयोध्या नगरिया ( Chalo ayodhya nagariya ) होली खेलें रघुबीर, चलो अयोध्या नगरिया। (4) हँसी-ठिठोली संग खेलेंगे होली, सजी अयोध्या जैसे दुल्हन-नबेली। वहाँ तारेंगे अधम शरीर, चलो अयोध्या नगरिया, होली खेलें रघुबीर। (2) गमक रहा बागों में बसंती महीना, बन गया राममंदिर चौड़ा है सीना। बदल गई ऊ पुरानी तस्वीर, चलो अयोध्या नगरिया,…
उत्तरदायी ( Uttardayi ) आज की मत सोचिए वह तो आपका ही है,आपके सामने है और आपसे ही है आज के साथ मिलकर कल को गढिये क्योंकि, यही कल जब लौटेगा कभी आज बनकर तब वह अकेला नहीं होगा उसके साथ होंगे अनेकों प्रश्न अनेकों उदाहरण और प्रसंग जिनका उत्तर देना होगा तुम्हें या…
जानकी अनुपमा ( Janki Anupma ) जानकी अनुपमा,राम वैभव आधार जनक दुलारी महिमा अद्भुत, प्रातः वंदनीय शुभकारी । राम रमाकर रोम रोम, पतिव्रता दिव्य अवतारी । शीर्ष आस्था सनातन धर्म, सुरभि संस्कृति परंपरा संस्कार । जानकी अनुपमा,राम वैभव आधार ।। मृदु विमल अर्धांगिनी छवि, प्रति पल रूप परछाया । प्रासाद सह वनवास काल, अगाथ…
चलता अयोध्या नगरिया ( Chalta Ayodhya Nagariya ) सुना सइयाँ आवत बा होली, चलता अयोध्या नगरिया। (4) रामजी कै देखित सुन्दर मुरतिया, मरलो पे बिसरी न ओनकर सुरतिया। भरि जात अपनों ई झोली, चलता अयोध्या नगरिया, सुना सइयाँ आवत बा होली। तन-मन रंग -रंगीला होई जाई, चलत डहरिया न गोड़वा दुखाई। नाहीं बाटी नई-नबेली,…
उम्मीदें ( Ummide ) उम्मीदें अक्सर चोट पहुंचाती है, कमजोर होने का एहसास दिलाती है। प्रेम और मोह में फंसा व्यक्ति ,दूसरों से उम्मीदें रखता है , चोटिल होने पर वह ,एक बार फिर से बिखरता है। शिकायतों का दौर फिर ,कुछ यूं शुरू हो जाता है , उम्मीदें अक्सर चोट पहुंचाती है ,…
नारी नित नमनीय ( Nari Nit Namniye ) रंग बिखरे हों रंगोली से भरा हो सारा आकाश नेह का काजल लगाकर खत्म सारे ‘ काश’ हों …..! आदी से उस लक्ष्य तक की वीथिका के वृत्त को जोड़ती और संवारती अब बने हम व्यास। जगत सृजित करे नारी ही बहन बेटी पत्नी मां का…