समर | Samar
समर ( Samar ) हर दर्द की दवा नहीं मिलती हर डालियों में फूल नहीं खिलते हर चमन से आती है बहार, मगर हर चमन को माली नहीं मिलते कभी और से तो कभी खुद से भी सफल शुरू करना जरूरी होता है जरूरी है उजाला भी रात के अंधेरे में मगर चांद से…
समर ( Samar ) हर दर्द की दवा नहीं मिलती हर डालियों में फूल नहीं खिलते हर चमन से आती है बहार, मगर हर चमन को माली नहीं मिलते कभी और से तो कभी खुद से भी सफल शुरू करना जरूरी होता है जरूरी है उजाला भी रात के अंधेरे में मगर चांद से…
वक्त का दौर ( waqt ka daur ) समझौता जरूरी है जिंदगी में अगर वह सामान, संबंध या साथ का हो बहुत कठिन होता है देख पाना अपने स्वाभिमान को ही तिल तिल मरते हुए स्वाभिमान ही अपनी कमाई है वहीं अगर हो जाए मजबूर किसी के हाथों तो बंधक जमीर नहीं आदमी स्वयं…
श्रीमद्भागवत कथा ( Shrimad Bhagwat Katha ) ( 3 ) भागवत कथा आह्लाद, झाझड़ के उत्संग में *********** शेखावाटी अवस्थित झाझड ग्राम, सप्त दिवसीय भागवत कथा आयोजन। श्री मोहिनी सती माता मंदिर ट्रस्ट सौजन्य, सर्व सुख समृद्धि वैभव शांति प्रयोजन । मृदुल स्वर श्री कमल नयन जी महाराज, भक्त वत्सल प्रभा जनमानस तरंग में। भागवत…
गर दो इजाजत ( Gar do Ijazat ) गर दो इजाजत तुम पर मर जाऊं, शब्द बनके स्याही में उतर जाऊं ! गुनगुना सको जिसको महफ़िल में, ऐसी कविता बन के मैं संवर जाऊं ! मेरा मुझ में कुछ भी ना रहे बाकी, कतरा-कतरा तुझ में बिखर जाऊं ! दिल-ऐ-समंदर में डूबकर फिर मैं,…
पथ में फूल खिलेंगे ( Path mein phool khilenge ) अपने भविष्य के निर्माता तुम स्वयं ही कहलाओगे! जब पथ पर अपने कांटों को भी देख कर मुस्कुराओगे ।। पग पग चलते जाना तुम, विषमताओं से न घबराना तुम ! भविष्य निर्माण की खातिर ही संभव प्रयासों की अलख जगाना तुम।। पथ मिले जो…
परदेस में रहा ( Pardes mein raha ) दीवारो-दर से जिसकी सदा गूँजती रही मेरी निगाह घर में उसे ढूँढती रही अहसास था ख़याल तसव्वुर यक़ीन था किस किस लिबास में वो मुझे पूजती रही मैं काम की तलाश में परदेस में रहा वो ग़मज़दा ग़मों से यहीं जूझती रही मैं लिख सका न उसको…
अधीर ( Adheer ) बह जाने दो अश्रु को अपने कुछ तो दिल के छालों को राहत मिलेगी बातों के बोझ को भी क्या ढोना कुछ तो सोचने की मोहलत मिलेगी बांध रखा है फर्ज ने वजूद को उसे खोकर भी जिंदा रहना नहीं है अदायगी के कर्ज को चुकाना भी जरूरी है पथ…
छत्रपती वीर शिवाजी महाराज ( Chhatrapati Veer Shivaji Maharaj ) मराठा साम्राज्य नींव से,हिंदुत्व का सिंहनाद हिंद पटल उन्नीस फरवरी, अद्भुत अनुपम भाव नवेला । वर्ष सोलह सौ पचास तद तिथि, वीर शिरोमणि अवतरण बेला । विदेशी विधर्मी आक्रांता पस्त, देख शिवाजी स्व शासन शंखनाद। मराठा साम्राज्य नींव से,हिंदुत्व का सिंहनाद ।। शिवनेरी दुर्ग पुनीत…
छत्रपति शिवाजी महाराज! ( Chhatrapati Shivaji Maharaj ) जन्म हुआ सोलह सौ सत्ताईस में, माँ जिसकी जीजाबाई थी । शिवनेरी के उस किले में, खूब बजी बधाई थी । घर-घर दीपक जगमगा उठे, रजनी भी हुलसायी थी । क्या नारी, क्या नर, क्या बच्चे, शिवाई भी हर्षायी थी । झूम उठी थी धरती अपनी,…
गए वो दिन ( Gaye Woh Din) अजब इस दौर में हमने शरीफों का चलन देखा I डुबो के हाथ खूं में फिर बदलते पैरहन देखा II हुई बर्बाद कश्ती जो ,वजह है ना-ख़ुदा खुद ही I उजड़ता बाग़बाँ के सामने ही ये चमन देखा II किया था नाज़ जब कहते, मिरी हर शै…