• खीचो बात बड़ी होती है | Baat Badi

    खीचो बात बड़ी होती है ( Kheecho baat badi hoti hai ) बहरे मीर वज़्न=== २२ २२ २२ २२ २२ २२ २२ २   खींचो बात बड़ी होती है, छोडो तो ज़द टलती हैं I देख रवानी जीवन में बस दो बातो से चलती है II गिरती दीवारों का क़ायल शायद ही कोई होगा I…

  • यादें | Yaadein

    यादें ( Yaadein )   कीमती होती है ,पुरानी खूबसूरत यादें, खुशी से आँखें नम हो जाती है । आज के दर्द को, कुछ पल के लिए भूलने में, ये कल की अच्छी यादें ही तो साथ निभाती है । हमारा आज ही कल बन जाएगा, बीता लम्हा दोबारा नहीं आएगा ; गमों की चादर…

  • मदिरा में | Madira mein

    मदिरा में ( Madira mein )    गिरने के हद से भी नीचे गिर जाते हैं लोग संबंधों के बीच दीवार खड़ी कर देते हैं लोग बेचकर ईमान अपना धर्म भी गंवा देते हैं लोग करके हवन दान भी करम गँवा देते हैं लोग चंद मतलब के लोभ में एहसान भुला देते हैं लोग दिखाकर…

  • हे हंसवाहिनी,ऐसा वर दे | Hey Hans Vahini

    हे हंसवाहिनी,ऐसा वर दे ( Hey hans vahini aisa var do )   मृदुल मधुर ह्रदय तरंग, स्वर श्रृंगार अनुपम । विमल वाणी ओज गायन, ज्योतिर्मय अन्तरतम । गुंजित कर मधुमय गान , नव रस लहर मानस सर दे । हे हंसवाहिनी,ऐसा वर दे ।। दुर्बल छल बल मद माया, प्रसरित जग जन जन ।…

  • कहां तक | Kahan Tak

    कहां तक ( Kahan Tak )   सिमटते गए भाव मन के घुलती रहीं मिठास में कड़वाहटें बढ़ तो गए किताबी पन्नों में आगे पनपत्ति रही मन की सुगबुगाहटें जगमगाती रहीं चौखटे, मगर आंगन घर के सिसकते रहे बढ़ते गए घर ,घर के भीतर ही खामोश बच्चे भी सुबगते रहे खत्म हुए दालान, चौबारे सभी…

  • ये मन्नतों के धागे | Ye Mannaton ke Dhage

    ये मन्नतों के धागे ( Ye mannaton ke dhage )    मैं बांध आई थी, एक मन्नत का धागा, मंदिर के द्वार पर। जहाँ न जाने कितनों के द्वारा मांगी गईं थी और मांगी जा रही थी हजारों मन्नतें, जानते थे तुम मेरी पीड़ा को, इसलिए कहते थे बांध आओ तुम भी एक मन्नत का…

  • राष्ट्रीय विज्ञान दिवस | National Science Day

    विज्ञान का हमको अनुपम उपहार मिला है जिसके गहन अध्ययन और ठोस चिंतन ने प्रगति के अभिनव द्वार खोले है । हम सभी यह जानते हैं कि work place पर मेहनत और हुनर सबसे ज्यादा काम आता है लेकिन बिना आत्मविश्वास और प्रसन्नता के न तो काम में संतुष्टि मिलती है और न ही किया…

  • जय जय भोलेनाथ | Jai Bholenath

    जय जय भोलेनाथ ( Jai Jai Bholenath )    काशी के वासी अविनाशी, भूतनाथ महादेव। नीलकंठ शिवशंकर भोले, सब देवों के देव। जय जय भोलेनाथ, जय जय भोलेनाथ त्रिनेत्र त्रिशूल धारी, जटा में बहती भगीरथी धारा। डम डम डमरू कर में बाजे, नटराज नृत्य प्यारा। भस्म रमाए भोले बाबा, कैलाशी शिव शंभू नाथ। भर देते…

  • क्या करें बहार का | Kya Kare Bahar ka

    क्या करें बहार का ( Kya kare bahar ka )    मस अले हज़ार हो तो क्या करें बहार का अभी उलझ रहा है कुछ हिसाब कारोबार का। याद आ रहा वही बहार में न जाने क्यूं पास है जिसे न कौल का न ही करार का। मजलिसों में देखकर नज़र चुरा रहा है वो…

  • ओज | Oj

    ओज ( Oj )   बड़े हुए तो क्या हुए जब कर न सके सम्मान किसी का  समझे खुद को अधिकारी पद का  समझ ना पाए स्वाभिमान किसी का चाहे ,खुद ही को चर्चित होना  ऊँचे आसन का मान लिए बैठे मन के भीतर समझे कमतर सबको खुद को ही प्रथम शीर्ष किए बैठे  ऐसी…