• पहाड़ों की दास्तां और गांव में रास्ता

    तुम मिलकर मुझे तोड़ो मैं तुम सबके लिए अकेला ही काफी हूं। पहाड़ों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर तुम अपना रास्ता निकाल लेते हो कभी सोचा है बरसात में जब काई जमती है और उसमें छोटे-छोटे फूल उगते हैं पूरी प्रकृति एक पहाड़ पर जीवन देने के लिए एकत्रित होती हैं। उस पहाड़ पर जब…

  • घुटन | Ghutan

    घुटन ( Ghutan )    भीतर की घुटन जला देती है जिंदा शरीर किताब के पन्नों में लगे दीमक की तरह खामोश जबान को शब्द ही नहीं मिलते शिकायत के लिए अपनों से मिले दर्द दिखाये भी नहीं जाते बताएं भी सुख जाते हैं आंसू पलकों में ही उन्हें बहाने की भी इजाजत नहीं होती…

  • राम वैभव | Ram Vaibhav

    राम वैभव ( Ram vaibhav )   वैदेही अनुपमा,राम वैभव आधार जनक दुलारी महिमा अद्भुत, प्रातः वंदनीय शुभकारी । राम रमाकर रोम रोम, पतिव्रता दिव्य अवतारी । शीर्ष आस्था सनातन धर्म, सुरभि संस्कृति परंपरा संस्कार । वैदेही अनुपमा,राम वैभव आधार ।। मृदु विमल अर्धांगिनी छवि, प्रति पल रूप परछाया । प्रासाद सह वनवास काल, अगाथ…

  • डॉ. सत्यवान सौरभ के पच्चास चर्चित दोहे

    डॉ. सत्यवान सौरभ के पच्चास चर्चित दोहे   आज तुम्हारे ढोल से, गूँज रहा आकाश। बदलेगी सरकार कल, होगा पर्दाफाश।। छुपकर बैठे भेड़िये, लगा रहे हैं दाँव। बच पाए कैसे सखी, अब भेड़ों का गाँव।। नफरत के इस दौर में, कैसे पनपे प्यार। ज्ञानी-पंडित-मौलवी, करते जब तकरार।। नई सदी ने खो दिए, जीवन के विन्यास।…

  • बेचैन जिंदगी | Bechain Zindagi

    बेचैन जिंदगी (Bechain zindagi)   कागज पर ही रहते हैं रिश्ते आजकल पहचान भर के लिए ही है रिश्ते आजकल सिमटती ही जा रही है, डोर रिश्तों की अब लगाव तो महज जरिया है, कहने का अब अपनों का ही खून, होता जा रहा है जब पानी तब और की उम्मीद भी रखना, है नादानी…

  • बसो इस हिये | Baso is Hiye

    बसो इस हिये ( Baso is hiye )   पास जब तुम रहे क्षण वही तो प्रिये। गीत मैंने लिखे सब तुम्हारे लिये। जानता हूॅ कि यह स्वप्न संसार है। कुछ अनिश्चित क्षणों का सब व्यापार है। एक नाटक सतत चल रहा है यहाॅ; सूत्रधारी का ही सब चमत्कार है। साथ जब तक रहे तुम…

  • प्रेम की दहलीज से | Prem ki Dehleez

    प्रेम की दहलीज से ( Prem ki dehleez se )   प्रेम की दहलीज से,लौट रहीं वासनाएं *********** तन मन विमल मृदुल, मोहक अनुपम श्रृंगार । पूर्णता बन संपूर्णता , रिक्तियां सकल आकार । भोग पथ परित्याग पर, अभिस्वीकृत योग कामनाएं । प्रेम की दहलीज से, लौट रहीं वासनाएं ।। चाह दिग्भ्रमित राह पर, सघन…

  • बेवफाई | Bewafai

    बेवफाई ( Bewafai )    वक्त के धागे कभी, कमजोर नहीं होते तेरी यादों ने ही निभाई है, अपनी वफादारी बातों में छलावा था ,दिल में थी मक्कारी होठों की मुस्कान तेरी, महज थी एक अदाकारी दिए तेरे जख्मों के दर्द को, पीता हूँ सुबह शाम फरेब था तेरी चाहत में, मन में भरी थी…

  • मेरी पूर्णता | Meri Purnata

    मेरी पूर्णता ( Meri purnata )   यथार्थ के धरातल पर ही रहना पसंद है मुझे जो जमीन मेरी और मेरे लिए है उससे अलग की चाहत नहीं रखता क्यों रहूँ उस भीड़ के संग जहां सब कुछ होते हुए भी और भी पा लेने की भूख से सभी त्रस्त हों वहां कोई संतुष्ट हो…

  • याद शिक्षक की | Yaad Shikshak ki

    आज मुझे वह समय क्यों याद आया जब सालों पहले मेरे शिक्षक रमेश चंद्र जी विकास हाई स्कूल भावड में टीचर हमें पढ़ा रहे थे कि उनके किसी प्रियजन के आने पर वह हमें छोड़कर कुछ देर के लिए क्लास से बाहर चले गए, टीचर की अनुपस्थिति का बच्चों पर क्या असर होता था। हुआ…