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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Jeevan Basant
    कविताएँ

    जीवन बसंत | Jeevan Basant

    ByAdmin February 14, 2024February 15, 2024

    जीवन बसंत ( Jeevan Basant )    नेह उत्संग जीवन बसंत कर्म पुनीत धर्म पावन, यथार्थ पथ नित्य गमन । समन्वय परिस्थिति पट, आशा उमंग अंतर रमन । मैत्री प्रभा मुखमंडल संग, सकारात्मक सोच अत्यंत । नेह उत्संग जीवन बसंत ।। नैराश्य हल मुस्कान, हास्य विमुक्त जड़ता । मिलनसारी उन्नत चरित्र, मृदुलता दूर कड़कता ।…

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  • मगर | Magar
    कविताएँ

    मगर | Magar

    ByAdmin February 14, 2024

    मगर ( Magar )    बेशक जिंदा हो तुम अपने भीतर जी भी लोगे हाल पर अपने किंतु, क्या जी सकोगे घर के भीतर ही ! समाज जरूरी है समाज और शहर के लोग जरूरी हैं देश और जगत का साधन जरूरी है बिना और के जीवित रहना संभव ही नहीं तब भी तुम्हारा यकीन…

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  • Basant Ritu
    कविताएँ

    बसंत ऋतु | Basant Ritu

    ByAdmin February 14, 2024

    बसंत ऋतु ( Basant Ritu )    आ गए ऋतुराज बसंत चहुं ओर फैल रही स्वर्णिम आभा, सुंदर प्राकृतिक छटा में खिली पीले पुष्पों की स्वर्ण प्रभा। मां शारदे की पूजा का पावन अवसर है इसमें आता, ज्ञानदायिनी देवी की कृपा से जगत उजियारा पाता। बसंत ऋतु आते ही सुंदर सुरम्य वातावरण हुआ, ठंडी पवन…

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  • वसंत
    कविताएँ

    वसंत आया है | Basant Aaya hai

    ByAdmin February 14, 2024

    वसंत आया है ( Basant aaya hai ) सुना है, एकबार फिर से बसंत आया है, एक बार फिर से बसन्ती बहार लाया, खेतों में फिर से पीली सरसों महक। उठी है, बगियां में नए फूलों का आगमन हुआ है, एक बार फिर से फसलें लहलहा उठी है, फिर से पेड़ों पर नए पत्तों का…

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  • मैत्रेयी पुष्पा के उपन्यासों में स्त्री-जीवन के चित्र
    विवेचना

    मैत्रेयी पुष्पा के उपन्यासों में स्त्री-जीवन के चित्र

    ByAdmin February 14, 2024February 14, 2024

    मैत्रेयी पुष्पा के उपन्यासों में स्त्री-जीवन के चित्र   स्त्री सदैव ही अपनी अस्मिता को लेकर आवाज उठाती रही है। यह बात और है कि इस शोर-गुल भरे समाज में उसकी आवाज बहुत मन्द सुनाई देती है। जिसे अधिकतर समाज अनदेखा करता आया है और जिसने भी उसकी आवाज सुनी भी वह बहुत आगे नहीं…

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  • Prashno ke Ghere Mein
    कविताएँ

    प्रश्नों के घेरे में | Prashno ke Ghere Mein

    ByAdmin February 14, 2024

    प्रश्नों के घेरे में ( Prashno ke Ghere Mein )   हम खड़े हैं प्रश्नों के घेरे में  उत्तर की प्रतीक्षा लिए कुछ के लापता है कुछ अस्पष्ट कुछ संदिग्ध हैं कुछ खामोश  कुछ गर्भ में हैं कुछ मर्म में  कुछ के उत्तर होकर भी वह उत्तर नहीं है  प्रश्न भी कुछ सार्थक हैं कुछ निरर्थक…

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  • प्रेम में प्रदर्शन नहीं, दर्शन भाव निहित
    कविताएँ

    प्रेम में प्रदर्शन नहीं, दर्शन भाव निहित

    ByAdmin February 14, 2024

    प्रेम में प्रदर्शन नहीं, दर्शन भाव निहित   एक सुंदर सा अहसास, हर पल कारक उजास । सब अच्छा लगने लगता, दूर हो या फिर पास। अंतर्मन अनूप श्रृंगार कर, दिव्यता करता समाहित । प्रेम में प्रदर्शन नहीं,दर्शन भाव निहित ।। दिव्य भव्य मोहक छवि, हृदय पटल वसित । निशि दिन प्रति पल, मधुर स्मृतियां…

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  • Main Geet Nahi Gata Hoon
    कविताएँ

    मैं गीत नहीं गाता हूॅ | Main Geet Nahi Gata Hoon

    ByAdmin February 13, 2024

    मैं गीत नहीं गाता हूॅ ( Main geet nahi gata hun )   शब्दों का खेल रचाकर, मन अपना बहलाता हूॅ। मैं गीत नहीं गाता हूॅ। कवि कर्म नहीं कुछ मानूॅ, रचनाधर्मिता न जानूॅ, भावों की धारा में बह सुख से समय बिताता हूॅ। मैं गीत नहीं गाता हूॅ। मन दूर जगत से जाता, आनन्द…

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  • Ishwar Lila
    कविताएँ

    ईश्वर लीला | Ishwar Lila

    ByAdmin February 12, 2024February 12, 2024

    ईश्वर लीला ( Ishwar Lila )    मंदिर मस्जिद गिरजा गुरुद्वारे, प्रभु पिता के ही चौबारे, जहां भी जाओ उसे ही पाओ, रंग रूप से मत भरमाओ मन मंदिर में उसे बसाओ परम पिता की शरणागति में परमानन्द को पाओ। मानवमात्र सब संत्तति उसकी, रंग बिरंगी दुनिया जिसकी, दीन हीन पर उसकी छाया , जहां…

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  • Rishtey
    कविताएँ

    माने मनाये रिश्ते | Mane Manaye Rishtey

    ByAdmin February 12, 2024

    माने मनाये रिश्ते ( Mane manaye rishtey )   आजकल के माने मनाये रिश्ते हैं सिर्फ कहने और सुनने के वास्ते लगाव में रहती नहीं रिश्तो की गरिमा चंद बातों में ही बदल जाते हैं रास्ते रहता हक नहीं कोई अधिकार नहीं मन के भाये तक का ही चलन है सब हर बात की हाँ…

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