• बसंत पंचमी | Basant Panchami

    बसंत पंचमी ( Basant Panchami )   ऐसी करनी हम करते चले -2 ॥ध्रुव॥ हो जाये हमारा जीवन साकार ऐसी करनी हम करते चले -2 ॥ध्रुव॥ चहुँ और हो बसंत जैसी बहार जीवन बने सदैव सुखकार रहे निरामय हमारे विचार ऐसी करनी हम करते चले -2 ॥ध्रुव॥ निर्लिप्तता से जीवन जिये भार मुक्त हम खुद…

  • समस्या नहीं, समाधान बनें

    समस्या नहीं, समाधान बनें   जब जनमानस उद्वेलित हो, अथाह नैराश्य भावों से । हिम्मत नतमस्तक होने लगे, अनंत संघर्षी घावों से । तब सकारात्मक सोच से, प्रेरणा पुंज अनूप गान बनें । समस्या नहीं, समाधान बनें ।। जब जीवन पथ पर, संकट बादल मंडराने लगे । लक्ष्य बिंदु भटकाव पर, आत्म विश्वास डगमगाने लगे…

  • ज़िंदगी | Zindagi par Shayari

    ज़िंदगी ( Zindagi ) ज़िंदगी अब दग़ा रोज़ करने लगी मुफलिसी की यहाँ आह भरने लगी जुल्म का ही मिला है निशाँ ऐसा है आजकल ज़िंदगी रोज़ डरने लगी जो नहीं है नसीब में यहाँ तो लिखा आरजू प्यार की ज़ीस्त करने लगी लौट आ ऐ सनम शहर से गांव को ज़िंदगी रोज़ अब हिज्र…

  • अवध नगरिया | Awadh Nagariya

    अवध नगरिया ( Awadh Nagariya )   छोड़ा माया कै बजरिया, राम बसलें नजरिया, चला दर्शन करी अवध नगरिया ना। (2) आवा जमा करी पुण्य कै गँठरिया ना। बाजत उहाँ पे बधाई, दुनिया देखे उन्हें आईल, आईल नभ से उतर के अँजोरिया ना। चला दर्शन करी अवध नगरिया ना। आवा जमा करी पुण्य कै गँठरिया…

  • दीवानगी | Deewangee

    दीवानगी ( Deewangee )   शराब तो नहीं पीता मैं पर रहता हूं उसके नशे में चूर हरदम वह ऐसी चीज ही लाजवाब है कि नशा उतरता ही नहीं बड़ी हसीन तो नहीं पर दीवानगी का आलम यह कि सर से पांव तक भरी मादकता से उतरती ही नहीं सोच से पूरी कायनात भी फीकी…

  • संजीवनी संस्था ने स्वर कोकिला लता मंगेशकर को श्रदांजलि दी

    जांगिड अस्पताल परिसर में सामाजिक साहित्यिक संस्था संजीवनी के सौजन्य से स्वर कोकिला लता मंगेशकर को उनकी फोटो पर माल्यार्पण कर श्रदांजलि दी गई। इस अवसर पर संजीवनी के अध्यक्ष डाॅ दयाशंकर जांगिड उपाध्यक्ष मेजर डीपी शर्मा कोषाध्यक्ष मुरली मनोहर चोबदार डाॅ संजय सैनी जगदीश प्रसाद जांगिड रामावतार सबलानिया सुहित पाडिया कवि महेन्द्र कुमावत डाॅ…

  • तुम हवा पर गीत लिख दो | Geet Likh do

    तुम हवा पर गीत लिख दो ( Tum Hawa par Geet Likh do )   तुम हवा पर गीत लिख दो, मैं बसंत हो जाऊंगा। फूल बनकर खिल जाना, मैं उपवन महकाऊंगा। तुम हवा पर गीत लिख दो बह चले मधुर पुरवाई, जब मन मयूरा लगे झूमने। मनमोहक मुस्कान लबों पे, भंवरे लगे डाली चूमने।…

  • न जाने क्यूॅं | Na Jane Kyon

    न जाने क्यूॅं? ( Na Jane Kyon )  आज भी जब निकलता हूॅं ब्राह्मणों की गली में तो अनायास ही खड़े हो जाते हैं कान चौकस मुद्रा में और चारों ओर दौड़ती हुईं अपलक आकार में बड़ी हो जाती हैं ऑंखें भौंहें तन जाती हैं फड़कने लगते हैं हाथ-पाॅंव और रगों में चोट-कचोट की मिश्रित…

  • निवातिया के हाइकु | Nivatiya ke Haiku

    निवातिया के हाइकु ( Nivatiya ke haiku ) विद्या : माहिया (१) मैं कलि हूँ खिलने को घूंघट तब खोलूं जब आओ मिलने को !! (२) इतना क्यों तरसाया, ये तो बतलाओ, क्यों हमको तड़पाया !! (३) हर-पल मुझको छेड़े, चलती जब पुरवा, उजड़े मन के खेड़े !! (४) किस विध मैं समझाऊं, इस मन…

  • बोलेंगे | Bolenge

    बोलेंगे ( Bolenge ) रोज़ हम इंकलाब बोलेंगे ? रोज़ ही बेहिसाब बोलेंगे ख़ूबसूरत बड़ी फ़बन इसकी देश अपना गुलाब बोलेंगे रोशनी प्यार की ही देता है देश को आफ़ताब बोलेंगे ये ही मेरी पहचान है जय हिंद जोर से ही ज़नाब बोलेंगे पूछेगा जो गवाह में जय हिंद ये ही अपना ज़वाब बोलेंगे है…