• पराक्रम दिवस | Parakram diwas

    पराक्रम दिवस ( Parakram diwas )   राष्ट्रीय चेतना के अनूप पर्याय, नेताजी सुभाष बोस स्वतंत्रता संघर्ष अहम भूमिका, अद्भुत ओजस्वी मुखर स्वर । प्रत्यक्ष विरोध फिरंगी शासन, क्रांति ज्वाला आजादी तत्पर । प्रेरणा पुंज नेतृत्व प्रतिभा, प्रदत्त जय हिंद दिल्ली चलो उद्घोष । राष्ट्रीय चेतना के अनूप पर्याय,नेताजी सुभाष बोस ।। तुम मुझे खून…

  • राम-राम गूंज गगन में | Ram Ram Goonj

    राम-राम गूंज गगन में ( Ram Ram Goonj Gagan Me )   धनुष की टंकार हुई है, धर्म की जयकार हुई है। अयोध्या सजी संवरी, दीपों की छटा बहार हुई है। राम-राम गूंज गगन में, राम महिमा साकार हुई है। सनातन परचम फहराया, राम नाम झंकार हुई है। मंदिर मंदिर राम पूजा, घर-घर दिवाली आई…

  • ग़ज़लों का मुकम्मल संकलन : ” ज़िंदगी अनुबंध है “

    संवैधानिक व वैज्ञानिक चेतना से युक्त सभ्य-समाज की संकल्पना के साकार स्वरूप की वकालत करती हुईं ग़ज़लों का मुकम्मल संकलन है:- ” ज़िंदगी अनुबंध है “   आमतौर पर ऐसा ही होता आया रहा है कि ग़ज़ल-ओ-शे’रो-शायरी की दुनिया में प्रेम, मोहब्बत, विरह, वेदना वगैरह-वगैरह को ही हम विषय का केन्द्र मानते,लिखते और पढ़ते आते…

  • श्रीराम चालीसा | Shri Ram Chalisa

    राम चालीसा दो० राम ब्रह्म जगदीश हरि, भक्त हृदय निष्काम। गुरु पद नख विग्रह निरखि, वन्दउँ सीताराम। चतुरानन शिव हिय बसे, प्रणव तत्व साकार। राम नाम सुमिरन किये, मिटे सकल भव भार। चौ० जय श्री राम जगत प्रतिप्राला। संत हृदय प्रभु दीन दयाला। दशरथ गेह लिए अवतारा। हरन हेतु अवनी कै भारा। अनघ अनादि तत्व…

  • उनका किरदार | Unka Kirdar

    उनका किरदार ( Unka kirdar ) उनका किरदार है क्या उनको बताया जाये आइना अहले -सियासत को दिखाया जाये जलने वालों को ज़रा और जलाया जाये ख़ाली बोतल ही सही जश्न मनाया जाये ज़ुल्म ही ज़ुल्म किये जाता है ज़ालिम हम पर अब किसी तौर सितमगर को डराया जाये इस ग़रीबी से बहरहाल निपटने के…

  • 75 वां गणतंत्र दिवस | 75th Republic Day

    75 वां गणतंत्र दिवस   गणतंत्र दिवस की वैला पर आत्मा का “प्रदीप” जला ले ।।ध्रुव॥ गणतंत्र दिवस पर्व पर मन का भार मिटा ले । सदा सहजता से जीकर जीने का सार निकाल ले । हम स्वयं अपने भाग्य विधाता सुख दुःख के निर्माता । हम अपने त्राणों से हमारी स्वयं की शरण के…

  • लहजा | Lehja

    लहजा ( Lehja )   ऐ जिंदगी! सीख रही हूँ जीने का लहजा थोड़ी देर तू जरा और ठहर जा हर शाम खुद को खोज रही हूँ हर रिश्ते के राज समझ रही हूँ ढलते सूरज से धीरज सीख रही हूँ तारो से झिमिलाना सिख रही हूँ ख्वाबों की मुट्ठी खोल रही हूँ धीरे धीरे…

  • राम हे राम | Ram Hey Ram

    राम हे राम मेरे राम राम हे राम मेरे राम तुम आओ म्हारे घर में मेरे भाग खुल जाए तुम आओ म्हारे दिल में मेरा जीवन सफल हो जाए राम हे राम मेरे राम मैं डुबा हूं इस जीवन में मुझे तो तारो राम औरों को तारा मुझे भी निकालो मेरे राम राम हे राम…

  • खुशियों की मंगल भोर | Pran Pratishtha par Kavita

    खुशियों की मंगल भोर रामलला प्राण प्रतिष्ठा,खुशियों की मंगल भोर कलयुग आभा त्रेता सम, प्रभु श्री राम अवतरण बेला । भू देवलोक उमंग हर्षोल्लास, रज रज रग रग भाव नवेला । अहो भाग्य साक्षी ऐतिहासिक पल, सर्वजन सजल नयन भाव विभोर । रामलला प्राण प्रतिष्ठा,खुशियों की मंगल भोर ।। बाईस जनवरी मध्यान्ह साढ़े बारह बजे,…

  • स्त्री | Stree

     ” स्त्री “ ( Stree )    स्त्री – वो नहीं जो तुम्हारी कल्पनाओं में है और स्त्री वो भी नहीं जिसे जानते हो तुम! एक स्त्री को जानने -समझने की शक्ति किसी पुरुष में कैसे हो सकती है भला। पति हो या प्रेमी पढ़ सकता नहीं किसी स्त्री के मन को वह ढाल नहीं…