Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • Tribute paid to Munawwar Rana
    साहित्यिक गतिविधि

    मुनव्वर राना को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में किया याद दी श्रद्धांजलि

    ByAdmin January 17, 2024

    आज दिनांक 16-1-24 को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र में भाषा एवं कला संकाय विभाग के अन्तर्गत चल रहे उर्दू विभाग ने मुनव्वर राना के निधन पर शेष स्मृति का आयोजन किया गया। भाषा एवं कला संकाय विभाग की अधिष्ठात्री डा पुष्पा रानी ने कहा कि अदब के विख्यात शायर ‘मुनव्वर राणा’ का जन्म 26 नवंबर 1952…

    Read More मुनव्वर राना को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में किया याद दी श्रद्धांजलिContinue

  • राम के दोहे | Ram ke Dohe
    दोहे

    राम के दोहे | Ram ke Dohe

    ByAdmin January 16, 2024January 16, 2024

    राम के दोहे  ( Ram ke Dohe )    घट-घट में रावण बसे, करे राम का जाप ! द्वेष भाव मन से मिटा, राम मिलेंगे आप !!   राम जगत के देव है, देते सबको नाम ! मूरख प्राणी है चला, देने उनको धाम !!   राम नाम की लहर में, तरते दुर्जन आम !…

    Read More राम के दोहे | Ram ke DoheContinue

  • Ramkesh Yadav awarded with Yadukul Gaurav Samman
    साहित्यिक गतिविधि

    यदुकुल गौरव सम्मान से नवाजे गए वरिष्ठ साहित्यकार रामकेश यादव

    ByAdmin January 16, 2024January 16, 2024

    मुंबई, हिंदी साहित्य के उपासक तथा रॉयल्टी प्राप्त कवि व वरिष्ठ लेखक रामकेश एम.यादव को यादव समाज ट्रस्ट ठाणे जनपद यदुकुल गौरव सम्मान-2024 से नवाजा है। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम के शुरुआती दौर में उत्तरप्रदेश के पूर्व डीजीपी जगमोहन यादव, पूर्व एमएलसी कैलाश यादव, देवराम भोईर,यादव संघ अध्यक्ष अजय यादव को यादव समाज ट्रस्ट द्वारा गौरव…

    Read More यदुकुल गौरव सम्मान से नवाजे गए वरिष्ठ साहित्यकार रामकेश यादवContinue

  • Chalan mein
    ग़ज़ल

    चलन में है अब | Chalan mein

    ByAdmin January 16, 2024

    चलन में है अब ( Chalan mein hain ab )   सीने को खोलने का फैशन चलन में है अब और गाली बोलने का फैशन चलन में है अब देखो ज़रा संभल के तुम बात कोई बोलो कम करके तोलने का फैशन चलन में है अब ये दूध जैसी रंगत आई नहीं है यूं ही…

    Read More चलन में है अब | Chalan meinContinue

  • छोड़ो ना | Chhodo Na
    ग़ज़ल

    छोड़ो ना | Chhodo Na

    ByAdmin January 16, 2024

    छोड़ो ना ( Chhodo na )   साल नया तो झगड़ा अपना यार पुराना छोड़ो ना मिलना जुलना अच्छा है तुम बात बनाना छोड़ो ना। भूल गए जो रूठ गए जो नज़रें फेरे बैठे हैं यादों में घुट घुट कर उनकी अश्क़ बहाना छोड़ो ना। दरिया, सहरा, सागर ,बादल ,कैद किया सब जुल्फ़ों में औरों…

    Read More छोड़ो ना | Chhodo NaContinue

  • Sanatan Vaibhav
    कविताएँ

    सनातन वैभव | Sanatan Vaibhav

    ByAdmin January 15, 2024

    सनातन वैभव ( Sanatan vaibhav )   धीरे धीरे ही बदल रही, यह और बदलती जाएगी। धूमिल थी जो गौरव गरिमा, वो और निखरती जाएगी। जो सदियों से त्रासदी झेली, निर्ममता का व्यवहार सहा, अब दिन बदला है भारत का, इतिहास पुनः दोहरायेगी। वैदिक रीति और ज्ञान ध्यान, ना जाने कैसे लोप हुआ। गुरूकुल छूटा…

    Read More सनातन वैभव | Sanatan VaibhavContinue

  • पुण्यों का श्री वंदन | मकर संक्रान्ति पर्व पर
    कविताएँ

    पुण्यों का श्री वंदन | मकर संक्रान्ति पर्व पर

    ByAdmin January 15, 2024

    मकर संक्रान्ति पर्व पर ओज पुंज सूर्यदेव भगवान, सहर्ष उत्तरायन शुभागमन । धरा गगन उत्संग शुभता, रज रज पावनता रमन । देवलोक जागरण बेला, आनंद जीवन अंकुर नर्व पर। पुण्यों का श्री वंदन,मकर संक्रान्ति पर्व पर।। जप तप अर्पण तर्पण , अद्भुत अनुपम संयोग । मंगलता अथाह संचरण, परमानंद अनुभूत योग। नूतनता उत्सविक श्रृंगार, कर्म…

    Read More पुण्यों का श्री वंदन | मकर संक्रान्ति पर्व परContinue

  • Kaisi Lachari
    गीत

    यह कैसी लाचारी है | Kaisi Lachari

    ByAdmin January 15, 2024

    यह कैसी लाचारी है ( Yeh kaisi lachari hai )   यह कैसी लाचारी है, पीर पर्वत से भी भारी है। औरों के खातिर जीना, आज हुआ दुश्वारी है। यह कैसी लाचारी है छल कपट दंभ बैर छाया, झूठ का बोलबाला है। चकाचौंध में दुनिया डूबी, फैशन का हवाला है। लूटमार सीनाजोरी से, हुई त्रस्त…

    Read More यह कैसी लाचारी है | Kaisi LachariContinue

  • वह राम कहां से लाऊं मैं | राम पर कविता
    कविताएँ

    वह राम कहां से लाऊं मैं | राम पर कविता

    ByAdmin January 15, 2024

    वह राम कहां से लाऊं मैं  शबरी    के   जूठे   बेरों   से जो तनिक नहीं भी बैर किया सब  ऊंच – नीच  के भेदों से जो  ना  अपना ना गैर किया उस  पुरषोत्तम  श्री  रामचन्द्र को  आज  कहां  से लाऊं मैं अब  लखन जानकी संग राम को  देख  कहीं  ना  पाऊं  मैं।…

    Read More वह राम कहां से लाऊं मैं | राम पर कविताContinue

  • Haar Kabhi na Swikar Kar
    कविताएँ

    पर हार कभी न स्वीकार कर | Haar Kabhi na Swikar Kar

    ByAdmin January 14, 2024

    पर हार कभी न स्वीकार कर ( Par haar kabhi na swikar kar )   दर्श पथ कंटक बाधा , किंचित नहीं घबराना । थोड़ा चिंतन मनन कर, मूल कारण पत्ता लगाना । फिर लगा कर दुगुनी ताकत, अदम्य सी एक उड़ान भर । पर हार कभी न स्वीकार कर… ।। बुलंद हौसलों संग होती,…

    Read More पर हार कभी न स्वीकार कर | Haar Kabhi na Swikar KarContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 292 293 294 295 296 … 832 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search