• जहां चाहता हूं | Jahan Chahta Hoon

    जहां चाहता हूं ( Jahan chahta hoon )   न नफ़रत का कोई जहां चाहता हूं! सियासत की मीठी जुबां चाहता हूं! मिटे जात मजहब के झगड़े वतन से मुल्क हो मुहब्बत का बागवा चाहता हूं! रहे मुसलसल आदमी मेरे अंदर लेकिन हो जाना मैं इक इंसा चाहता हूं! नुमाइश बहुत हो चुकी यारों अब…

  • नव वर्ष 2024 | Nav Varsh

    नव वर्ष 2024   हंसी खुशी करते विदा नमन तुम्हें 2023 स्वागत है आपका आइये घर 2024 नव प्रभात की शुभ बेला पर अभिनंदन नव वर्ष तुम्हारा भर दो सब में प्रेम रस बने स्वर्णिम देश हमारा देते हैं आसन कमल पुष्प सा जो है देवों का सिंहासन चतुर्मुखी हो प्रगति हमारी तुमसे मिले यही…

  • लगाव | Lagaav

    लगाव ( Lagaav )   यदि आप अपनी श्रेष्ठता को सिद्ध करते हुए किसी पर अपना अधिकार जमाना चाहते हैं या रुआब में उसे दबाना चाहते हैं तो निश्चय ही वह झुक जाएगा कर देगा स्वीकार्य आपको किंतु आपको अपनापन नहीं दे पाएगा लगाव की डोर से बंध नहीं पाएगा सम्मान खरीद कर मांग कर…

  • गांव री गुवाड़ आओ | राजस्थानी कविता

    गांव री गुवाड़ आओ ( राजस्थानी कविता )   गांव री गुवाड़ आओ, खेत हरसावै है। ठंडी ठंडी पून बहारां, गांव बुलावै है। काकड़ी मतीरा खाल्यो, चालो म्हारा खेत म। मीठी मीठी बातां करस्यां, ठंडी बालू रेत म। चौपालां अर पगडंडी, गीत सुरीला गावै है। गांव री महक माटी री, थानै गांव बुलावै है। हरया…

  • मुझे आवाज देना | Mujhe Awaz Dena

    मुझे आवाज देना  ( Mujhe awaz dena )   बजने लगे मन के सितार, साज सारे मचलने लगे। मेरा नाम अधरों से जब, शब्द सारे थिरकने लगे। मुझे आवाज देना साथी, मिल जाऊंगा मैं राहों में। खुशियों के दीप जलाऊं, प्रिय तुम्हारी निगाहों में। मुझे आवाज देना थामें रखना दिल की धड़कन, वादियों बहारों में।…

  • न करे कोई | Na Kare Koi

    न करे कोई  ( Na Kare Koi )   अम्ल ऐसा हो कि रुसवा न करे कोई! सरे – राह पत्थर रक्खा न करे कोई! कहां लेके ये जाएगी नाकामियां अपनी मुल्क में इमां का सौदा न करे कोई! मसल फूलों को डाला आवेश में उसने संगदिल को चुभा कांटा न करे कोई! दर्द इसलिए…

  • राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस | Rashtriya Upbhokta Divas

    राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस ( Rashtriya upbhokta divas )    बाजारवाद पर अंकुश,उपभोक्ता संचेतना से सही कीमत उत्तम सामग्री सेवा, हर उपभोक्ता परम अधिकार । पटाक्षेप अवांछित भ्रामक बिंदु, वंदन वैध व्यापार व्यवहार । गुणवत्ता संग उचित मूल्य अहम, क्षतिपूर्ति प्रदत्त नियम अवहेलना से । बाजारवाद पर अंकुश,उपभोक्ता संचेतना से ।। हिंद राष्ट्र उपभोक्ता हित, संरक्षण…

  • उसूल | Usool

    उसूल ( Usool )   हर हर मोड़ पर तुम्हें साथी नहीं मिलेंगे परिचितों के कुनबे में पहचान तुम्हें ही बनानी होगी कुछ के साथ तुम्हें चलना होगा और कुछ को अपने साथ चलाना होगा जन्म से पहले तुम्हें कौन जानता था शुरुआत तुम्ही ने की थी कभी मुस्कराकर कभी रोकर लोग जुड़ते गए तुमसे…

  • मन में बसे मेरे राम | Mere Ram

    मन में बसे मेरे राम ( Man me Base mere Ram )   मन में बसे मेरे राम…श्रीराम, मन में बसे मेरे राम…। प्रेम से बोलो जय श्रीराम…श्रीराम, मन में बसे मेरे राम…।। श्रृद्धा भाव से मैं आया हूं, यह पावन अयोध्या धाम, अहो भाग्य से ही आया हूं, जन्मभूमि है बानूर ग्राम। ज्ञान अज्ञान…

  • सियाह हाशिए – सआदत हसन मंटो

    सियाह हाशिए – सआदत हसन मंटो प्रस्तुतकर्ता – डा अशोक भाटिया टिक्का टिप्पणी/ दो शब्द – मनजीत सिंह, सहायक प्राध्यापक उर्दू (अंशकालिक), कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र साहित्य उपक्रम द्वारा प्रकाशित की गई पुस्तक में उर्दू कथा साहित्य के इतिहास में सआदत हसन मंटो का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। ‘अंगारे’ के प्रकाशन के बाद…