• परिणय बेला | Parinay Bela

    परिणय बेला ( Parinay Bela ) भांवर संकल्पों से,निखर रही परिणय बेला हिंदू धर्म वैवाहिक बंधन, मनुज जीवन दिव्य श्रृंगार । द्वि पथिक दृढ़ प्रतिज्ञा, हर पल संग आनंद बहार । परस्पर समर्पण पराकाष्ठा, अंतर उद्गम आनंद नवेला । भांवर संकल्पों से, निखर रही परिणय बेला ।। वैदिक संस्कृति वैवाहिकी, जन्म जन्मांतर आत्मिक संबंध ।…

  • मौसम ने ली अंगड़ाई ठंडक आई | Thandak

    मौसम ने ली अंगड़ाई ठंडक आई ( Mausam ne lee angdai thandak aai )   पवन चले पुरवाई मौसम ने ली है अंगड़ाई। आया मौसम सर्दी का शीत ऋतु अब आई। लो आ गया माह दिसंबर का ठंडक आई भारी। ठिठुर रहे हैं हाथ पांव लगती अब मस्त रजाई। ओस कोहरा धुंध छाई सर्दी की…

  • सृष्टि की अत्युत्तम रचना है नारी | Nari par Kavita in Hindi

    सृष्टि की अत्युत्तम रचना है नारी ( Srishti ki ati uttam rachna hai nari )    कोमल निर्मल सरस भाव, उरस्थ विमल सरिता । त्याग समर्पण प्रतिमूर्ति, अनंता अनूप कविता । सृजन उत्थान पथ पर, सदा शोभित महिमा भारी । सृष्टि की अत्युत्तम रचना है नारी ।। स्नेहगार ,दया उद्गम स्थल, अप्रतिम श्रृंगार सृष्टि का…

  • गीले नयन | Geele Nayan

    गीले नयन ( Geele nayan )  हो गये गीले नयन, बीता हुआ कुछ याद आया। मूल प्रति तो खो गई, उसका सकल अनुवाद आया। चित्र जो धुंधले हुये थे इक समय की धूल से। आ गया झोंका पवन का खिल उठे फिर झूल से। जो हुआ, कैसे हुआ सब कौन छल कर चल दिया। व्यथित…

  • गुलिया के दोहे | Gulia ke Dohe

    गुलिया के दोहे ( Gulia ke Dohe ) ( 2 )  कभी-कभी ये सोचकर, आता है आवेश। मिला कहाँ बलिदान को, वो सपनों का देश।। लोकतंत्र को हो गया, जाने कैसा मर्ज़। बात करें अधिकार की, लोग भूलकर फर्ज़।। अब लोगों के बीच से, गायब हुआ यकीन। साँच – झूठ का फैसला, करने लगी मशीन।।…

  • एक कप चाय गरम | Chai Garam

    एक कप चाय गरम ( Ek Cup Chai Garam )   जब भी मिलती हमें चाय-गरम, खुल जाता है यह हमारा करम। निकल जाते अंदरुनी पूरे भरम, हम हो जाते है भीतर से नरम।। मैं न करता चाय काफ़ी में शरम, परिवार रिश्तेदार या मित्र परम। ठण्डी हो चाहे फिर वह हो गरम, जहाँ पर…

  • अंदाज जीने का | Andaaz Jeene ka

    अंदाज जीने का ! ( Andaaz Jeene ka )  ( नज़्म ) अंदाज जीने का मुझको न आया, गैरों की बाँहों में सोने न आया। जुदाई का जख्म जल्दी भरता नहीं है, खिंजाँ में मुझे गुल खिलाने न आया। करती मोहब्बत बेपनाह मुझसे, ख्वाबों में मुझको बुलाने न आया। फलक से उतरती है किसी हूर…

  • हरियाणा के कलमकार | Haryana ke Famous Sahityakar

    हरियाणा के लोग भोले भाले , दूध दही खान पीण मैं राख्ये ध्यान | गीत , कहानी , रागनी , कविता , दोहे , ऋतुजा से इसकी पहचान ।।   मेरा हरियाणा हमेशा संतो का नाथो का , पीरों का , फकीरों का व बड़े – बड़े महापुरूषों को रहा है । इस प्रदेश के…

  • चितवन | Chitwan

    चितवन ( Chitwan )  मनहरण घनाक्षरी चंचल मनमोहक, चितवन मन मोहे। बांसुरी कन्हैया तोरी, तान छेड़े मन में। मोर मुकुट माधव, गले वैजयंती माला। केशव मुस्कान प्यारी, मन लागे लगन में। राधा के मोहन प्यारे, हर जाए चितवन। छवि घनश्याम कान्हा, बसी मोरे तन में। गोपियों के गिरधारी, गिरधर बनवारी। मधुबन बज रही, मुरलिया वन…

  • ख़ुशबू वतन की | Khushboo Watan ki

    ख़ुशबू वतन की ( Khushboo watan ki )   सांस में मेरी बसी ख़ुशबू वतन की बात करता हूँ यहाँ तो मैं अमन की प्यार से महके वतन यूं ही हमेशा ख़ूबसूरती कम नहीं हो इस फ़बन की दुश्मनों की चाल हर नाकाम करके हाँ हिफ़ाज़त रोज़ करनी है चमन की सैनिकों ही हौंसले जिससे…