• चतुर्दश मणि रत्न अनूप | Chaturdash Mani Ratna Anup

    चतुर्दश मणि रत्न अनूप ( Chaturdash Mani Ratna Anup )    स्वर्गलोक वैभव ऐश्वर्य हीन, महर्षि दुर्वासा ऋषि शाप । संकट समाधान देव अनुनय, विष्णु सानिध्य विमुक्त संताप । परम सुझाव नीर निधि विलोड़न, श्री हरि दैविक कृपा स्पंदन से । चतुर्दश मणि रत्न अनूप,जलधि सुधा मंथन से ।। देवगण असुर वासुकि नाग संग, मंदार…

  • एक्स रे और फोटो | X-Rays aur Photos

    एक्स रे और फोटो ( X-rays aur photos )   सुंदर छवि आकर्षक मोहक मन को लगती प्यारी। एक एक्स रे बतला देता देह भीतर की हो बीमारी। अंतर्मन में छुपे राज को अब जान नहीं कोई पाया। क्या फोटो क्या करें एक्स-रे प्रभु कैसी तेरी माया। छल कपट मद लोभ भर गया घट घट…

  • विभावरी | Vibhavari

    विभावरी ( Vibhavari )    काली विभावरी सा आखिर तम कब तक ढोती रहोगी चेतना विहीन मुढ बनकर कब तलक सोती रहोगी स्त्री मर्यादा मूल्य को समाज के कटघरे में बतलान वाले वो प्रज्ञान पुरुष स्वयं को सदा ज्ञानि व विद्वान बतलाने वाले समय के बहुमूल्य मानक संग तुम अपनी सारी बात रखो धीर गंभीर…

  • प्रणय के अभिलाष में | Pranay ke Abhilash Mein

    प्रणय के अभिलाष में ( Pranay ke abhilash mein )    अलौकिकता अथाह दर्शन, उरस्थ पुनीत कामनाएं । आशा उमंग उल्लास प्रवाह, चितवन मृदु विमल भावनाएं । प्रति आहट माधुर्य स्वर, जीवन प्रभा सम कनक । प्रणय के अभिलाष में,हर कदम चमक दमक ।। हर पल प्रियेसी संग, मिलन हेतु सौम्य तत्पर । मुस्कान वसित…

  • ऐ दर्द | E- Dard

    ऐ दर्द ( E – Dard )  ऐ दर्द…. कुछ तो कम कर, मै तेरा रोज का ग्राहक हूँ….. खुशिया छोड चुका हूँ, गम निचोड चुका हूँ । आँखो मे तुमको भर कर, यही बात कहा है। ऐ दर्द… कुछ तो कम कर, मै तेरा रोज का ग्राहक हूँ…. है राज बहुत गहरा, वो दिल…

  • सृष्टि की माया | Srishti ki Maya

    सृष्टि की माया ( Srishti ki maya )    इस सृष्टि की माया में जैसा इन्द्रियों को सुख चाहिए वैसा ही मिलता है मगर सुखों के अन्त में दुःख यह वि‌रोधाभास हर बार हर जगह मिलता है क्षणिक आनन्द के लिए परउत्पीडन क्यों हिंसा वन्य प्राणियों में प्रकृति का नियम है? पीड़ा रहित रक्तपात रहित…

  • ज़ख्म यादों के | Zakhm Yaadon ke

    ज़ख्म यादों के ( Zakhm yaadon ke )    न जानें मुझसे वहीं दिल अजीब रखता है नहीं मुहब्बत नफ़रत वो क़रीब रखता है बुरा किया भी नहीं है कभी उसी का ही वहीं दिल को क्यों मुझी से रकीब रखता है किसे देखेगा मुहब्बत भरी नज़र से वो मुहब्बत से ही वहीं दिल ग़रीब…

  • उर्मि की अठखेलियां | Urmi ki Athkheliya

    उर्मि की अठखेलियां ( Urmi ki athkheliya )    उर्मि की अठखेलियों में, अनूप प्रेरणा संदेश उठकर गिरना गिर कर उठना अथक उत्तम प्रयास जारी । उत्सर्ग पथ विचलन बाधा, साहस सिंचन मन क्यारी। शीर्षता परिणय चाहना सदा, लक्ष्य बिंब अंतर भावेश । उर्मि की अठखेलियों में,अनूप प्रेरणा संदेश ।। निष्काम योग सागर ह्रदय, सृजन…

  • परवरिश | Parvarish

    परवरिश ( संस्मरण )   उस दिन भी सावन का ही महिना और सोमवार का दिन था । बाबूजी (ससुर जी )शिव के अनन्य भक्त । तो उस काल विषय में माँ का पत्नी होने के नाते अनुगामिनी होना निश्चित ही था । पूरा परिवार ताल वृक्ष एक तपो भूमि है़ जयपुर से अलवर जाने…

  • पाषाण हृदय कैसे हो गए | Pashan Hriday

    पाषाण हृदय कैसे हो गए ( Pashan hriday kaise ho gaye )    किन सपनों ख्वाबों में खोए, क्या गहरी नींद में सो गए। दर्द दिल का जान सके ना, पाषाण हृदय कैसे हो गए। पहले पूछते रहते हमसे, तुम हाल-चाल सब जानते। मन की पीर ह्रदय वेदना, शब्दों की भाषा पहचानते। सब की खुशियों…