• मानवता बना एक खिलौना | Manavta

    मानवता बना एक खिलौना ( Manavta bana ek khilona )  खिलौनों से खेलते खेलते कब आदमी आदमी से खेलने लगा, गुड्डे गुड़ियों से खेलते खेलते ना जाने कब गुड्डा,गुड्डी का बलात्कार करने लगा, कितना आसानी से सबने गुड्डी को खिलौना बना दिया, पर हर गुड्डा बुरा नहीं ये किसी ने सोचा ही नहीं, कभी ये…

  • मंजिल का रास्ता | Manzil ka rasta

    मंजिल का रास्ता ( Manzil ka rasta )    ऐ ख़ुदा माना मंजिल का रास्ता बहोत मुश्किल है , मगर तेरा साथ है, तो मुझसे हर गम दूर है ऐ ख़ुदा पता नहीं, दिल को क्या होता है. कभी फासलों से टूट जाता है, तो कभी खुदसे रूठ जाता है। कभी अपनों पर जान छिड़कता,…

  • शिक्षक होते है पूजनीय | Shikshak Hote hai Poojneey

    शिक्षक होते है पूजनीय ( Shikshak hote hai poojneey )    चलों मनायें हम सब मिलकर आज शिक्षक दिवस, पाॅंच सितम्बर को आता है यह पावन दिन हर वर्ष। सभी को ज्ञान देते यह शिक्षक यही मिटाते अज्ञान, डाॅ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी है इनके ये आदर्श।। बड़ा योगदान रहा है इनका शिक्षा एवं राजनीति में,…

  • अस्तित्व | Astitva

    अस्तित्व ( Astitva )    मैं खो गई हूँ कही खोज रही हूँ मैं मेरा होना मैं एक कुलवधू एक पत्नी, एक माँ के बीच कहीं खो गई हूँ इन सबके बीच में मैं मुझे खोज रही हूँ कर्तव्यों और फ़र्ज़ के बीच उलझ कर रह गई हूँ मैं इन्हें बिना तोड़े खुद को बनाने…

  • जिंदगी | Hindi Kavita Zindagi par

    जिंदगी ( Zindagi )    जिंदगी एक शोरूम की तरह है जहां खरीदते हैं लोग वस्त्र  अपने मनोभाव की तरह जिसमें झलकता है उनका अंतर्मन जो पता चलते हैं उसके कपड़ों को देखकर। कोई छोटी सोच के साथ छोटे कपड़ों में किसी का सादगी भरा लिबास कोई चेहरे पर चेहरा लिए किसी का जीवन एक…

  • गुरु कृपा | Guru Kripa

    गुरु कृपा ( Guru Kripa )   शब्द ही शब्द की परिभाषा थी शब्द थे उसके नेत्र शब्द का ज्ञान था उसमें शब्द ही उसके भेद दिया था यह शब्द ज्ञान जिसने वह गुरु कृपा ही थे ईश्वर कृपा से पहले उनकी कृपा थी उस गुरु कृपा बिन कैसे तर पाएंगे गुरु ज्ञान बिना ही…

  • डाॅ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन | Dr. Sarvepalli Radhakrishnan

    डाॅ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ( Dr. Sarvepalli Radhakrishnan )    स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया ऐसे महापुरुष का नाम, डाॅक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन था जिनका यें नाम। 05 सितम्बर 1888 को हुआ था आपका यें जन्म, पिता सर्वपल्ली वीरा स्वामी सीताम्मा माँ का नाम।। बाल्यावस्था से ही मेधावी व होशियार रहें हो आप, देश के प्रथम उपराष्ट्रपति…

  • कान्हा | Kanha

    कान्हा ( Kanha )    भाद्र पक्ष की अष्टमी तिथि घनघोर  अंधियारी वह रात रोहिण नक्षत्र में जन्म लयो  मथुरा मे कंस की कारागार  वसुदेव देवकी के भय लाल             सो गए द्वारपाल पहरेदार स्वयं  खुले कारागार के द्वार रख टोकरी में नन्हा सुकुमार शेषनाग की छाया तले वसुदेव करके…

  • मेरे जीवन में ये शिक्षक | Kavita on Teacher

    मेरे जीवन में ये शिक्षक ( Mere jeevan mein ye shikshak )    दीपक की ज्योति बना, अंधकार में रोशनी बना, मार्ग का मार्गदर्शन दिया, बुद्धि का जिसने विकास किया, कलम से जिसने लिखना सिखाया, शब्दों का सही अर्थ बतलाया, टूटे धागों से माला के मोती पिरोना, मुश्किलों में भी धैर्य नहीं खोना, खुद पर…

  • Gurudev | शिक्षक

    शिक्षक ( Shikshak )    जो तुम्हें तुमसे मिला दे तुम्हें आईना दिखा दे मन में जुनून बसा दे हारने पर तुम्हें फिर उठ खड़ा होना सिखा दे खुद दीपक जैसे जलकर तुझे रोशन होना सिखा दे राष्ट्रभक्ति राष्ट्र प्रेम सिखाए सही गलत का भेद बताएं उसकी दी सिखों को तू जीवन भर भूल न…