• आडंबर | Adambar

    आडंबर ( Adambar )    पुकारता वह रह गया भाई कोई बचा लो मुझे, भीड़ व्यस्त थी बहुत किन्तु वीडियो बनाने में! ठंड में बेहद ठिठुर रहे थे बेतहाशा गरीब, लोग थे मशगूल फिर भी चादरें चढ़ाने में! मर गया भूख से अखिर तड़प तड़प कर, फेंक रहे थे बचा हुआ खाना कूड़ेदान में! खाली…

  • रक्षा बंधन पर्व शोभित | Raksha Bandhan Parv

    रक्षा बंधन पर्व शोभित ( Raksha bandhan parv sushobhit )    रक्षा बंधन पर्व शोभित, भाई बहन अथाह गर्व अंतर्संबंध अपनत्व प्रवाह, बहन पावन पूज्य स्थान । सुशोभित निज संस्कृति, कर रक्षा संकल्प आह्वान । घर द्वार चहक महक, जन पटल दर्श भाव कर्व । रक्षा बंधन पर्व शोभित,भाई बहन अथाह गर्व ।। उर श्रृंगार…

  • दिलवाले दिल के | Dil Wali Shayari

    दिल वाले दिल के ( Dilwale dil ke )    लोग मिले हैं काले दिल के किसने देखे छाले दिल के ? देखें तेरे दिल में क्या है ? खोल कभी तो ताले दिल के सोचा तुझको हरदम अपना अरमाँ यूँ भी पाले दिल के मक्कारों की इस दुनिया में हम हैं भोले भाले दिल…

  • अपना रक्षा बंधन | Poem on Raksha Bandhan in Hindi

    अपना रक्षा बंधन ( Apna Raksha Bandhan )  राखी के दिन माँ सुबह तड़के उठ जाती थी द्वार पर पूजने को सोन सैवंईयो की खीर बनाती थी लड़कियाँ घर की लक्ष्मी होती हैं इस लिए वह द्वार पूजा हमसे करवाती थी दिन भर रसोई में लग बूआओं की पसंद का खाना बनाने में वो खुद…

  • उजाले की ओर | Ujale ki Aur

    मनीष और उसकी बहन साक्षी दोनों ही शिक्षक हैं। उनमें समाज में व्याप्त मूढताओं पर अक्सर बहस किया करते थे। उन्हें लगता था कि बच्चों को स्कूल में यदि हम रोजाना कुछ न कुछ अंधविश्वास के बारे में जानकारी देते हैं तो वे धीरे-धीरे उनमें असर होने लगेगा। अगले दिन जब मनीष विद्यालय गया तो…

  • उड़ान की ख्वाहिशों मे | Udaan ki Khwahishon me

    उड़ान की ख्वाहिशों मे ( Udaan ki khwahishon me )    उड़ान की ख्वाहिशों मे छोड़नी पड़ जाती है जमीन भी कभी कभी महज हौसलों के करीब ही हर मंजिल नही होती…. मौका भी देता है वक्त आ जाते हैं आड़े उसूल तो जमाना कभी कामयाबी के सफर मे तोड़ने भी होते हैं सिद्धांत लोगों…

  • यह दुनिया है जनाब | Yeh Duniya hai Janab

    यह दुनिया है जनाब ( Yeh Duniya Hai Janab )   सब पर उंगली उठाती, सब की हकीकत बताती है खुद- कमियां छुपाकर सबकी कमियां गिनती है !  यह दुनिया है जनाब ‘सफेद कपडे़ होते हुये दाग दिखाती है, ये दुनिया है जनाब काँच सा चमकने के लिये, बिखेर कर  रख देती है  खुद के…

  • मै भी उड़ना चाहती हूं | Mai bhi Udna Chahti Hoon

    मै भी उड़ना चाहती हूं  ( Mai bhi udna chahti hoon )   सपनों में जीना चाहती, जिंदगी से लडना चाहती हूं मै जीवन को तलाशना चाहती हूं हीरे की तरह चमकना चाहती , संस्कारों के परदे को हटाना चाहती, मै दुनिया की बेडियों से आजाद होना चाहती हूं, कमबख्त जिंदगी को कुछ देना चाहती…

  • स्नेह की डोर | Sneh ki Dor

    स्नेह की डोर ( Sneh ki Dor )    मूहूर्तवाद के चक्कर में होते त्योहार फीके फीके, डर से बहना ने नहीं बांधा भाईयो के कलाई में राखी, डर का साम्राज्य खड़ा कर समाज को भयभीत करते हैं धर्म एक धंधा है, जिसमें पढ़ा लिखा भी अंधा है जनता समझने लगीं हैं मूहूर्तवाद के कारोबार…

  • संदूकची | Sandookchi

    संदूकची ( Sandookchi )    मेरे पास एक संदूकची है मैं हर रोज़ एक लम्हा ख़ुशी का इसमें भर देती हूँ अपनों के साथ बिताए सुखद यादों को सुकून के मख़मली पलों में लपेट सँभाल कर रख लेती हूँ शिकायतों की कुछ चवन्नी और दर्द की अठन्नी भी खनकतीं है इसमें कभी कभी पर मैं…