• तेरे इश्क में | Tere Ishq Mein

    राहुल एक बहुत होनहार लड़का था। बचपन से ही उसने घर की परेशानियों को देखते हुए शिक्षण कार्य करने लगा था। वह वह बच्चों को बहुत ही मेहनत से पढ़ता था और सारे बच्चे भी उस पर बहुत खुश थे। जिंदगी में हजार गम होते हुए भी हर समय वह मुस्कुराता रहता था। अभी उसकी…

  • ध्यान रहे | Dhyan Rahe

    ध्यान रहे ( Dhyan rahe )    गद्दार कभी वफादार नही हो सकता गद्दारी सिर्फ ,किसी के खून मे ही नही बल्कि वंशानुगत भी पीढ़ी दर पीढ़ी  चलती ही रहती है…. कहना मुनासिब तो नही किंतु, अपराधिक मानसिकता से उत्पन्न शिशु भी उसी का वंशधर होता है…. हर,हिरणाकश्यप के यहां प्रह्लाद का जन्म नही होता…..

  • आँचल | Aanchal

    आँचल ( Aanchal )   माँ तेरा आँचल सदा, देता शिशु को छाँव। मैल झाड़ती तू सदा, सर से लेकर पाँव।। पाऊं मैं सुख स्वर्ग सा, सोऊं आँचल ओढ़। ठुकराए जो मात को, खुशियां ले मुख मोड़।। गृह लक्ष्मी मातु बिना, सूना घर परिवार। आये विपदा लाल पर, देती सब कुछ वार।। बीच सफ़र चलते…

  • महफ़िल-ए-इश्क | Mehfil -E- Ishq

    महफ़िल -ए- इश्क ( Mehfil-e-Ishq )   महफिले इश्क में इसरार की मोहलत नहीं होती। जहां में यार से बढ़कर कोई दौलत नहीं होती।। वफ़ा के आब से ही जिंदगी में चैन मिलता है, अना के शजर पे ताउम्र की चाहत नहीं होती।। मरीजे इश्क मर भी जाय तो मतलब कहां उनको, ज़माने की अदाओं…

  • शोषण | Shoshan

    रमेश एक बेरोजगार लड़का था। उसे काम की अति आवश्यकता थी। इसी बीच उसके एक दोस्त ने कहा कि कुछ लिखने पढ़ने का काम है । करना है तो आ जाओ। वह दोस्त के साथ कम पर लग गया। दो-तीन महीना तक उसे क्या तनख्वाह मिलेगी यह भी नहीं पता चला। फिर भी उसे विश्वास…

  • बस आज बस | Bas Aaj

    बस आज बस ( Bas aaj bas )    जद्दोजहद दुश्वारियां कुछ कश्मकश बस आज बस मैं गुनगुनाना चाहती बजने दो कोई साज़ बस। वो फ़िक्र रंजो गम ज़फा तन्हाइयों की बात को तुम छोड़ दो जो हैं ख़फा रहने दो अब नाराज़ बस। हो गुफ्तगू तो बात कुछ लग जाती है उनको बुरी हमने…

  • धर्म का धंधा | Dharm ka Dhandha

    सदियों से यदि कोई धंधा सबसे समृद्ध शाली रहा है तो वह धर्म का रहा है। यह ऐसा धंधा है जो सदैव लाभकारी होता है। अन्य धंधे में तो हानि की संभावना भी रहती है परंतु इस धंधे में कभी कोई हानि नहीं होती। यह पीढ़ी दर पीढ़ी लाभकारी धंधा है। एक बार हरिद्वार में…

  • नवभिहान | Navabihan

    नवभिहान ( Navabihan )   बीती रात अब हुआ सवेरा नवभिहन का अभिनंदन हो नव रचना से श्रृंगार करो फिर जग भर भारत का वंदन हो मानो,आरंभ के गुजरे वर्ष 76 नव स्फूर्ति से आगे अब साल 77 नव उदय मन हो नव कीर्तिमान ठोस धरा पर हो भारत महान त्यागो ईर्ष्या द्वेष भेद भाव…

  • “आजादी के अमृत महोत्सव” के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय काव्य प्रतियोगिता

    प्रतिष्ठित आरंभ चैरिटेबल फाउंडेशन , भोपाल द्वारा “आजादी के अमृत महोत्सव” के उपलक्ष्य में “अखिल भारतीय काव्य प्रतियोगिता” का आयोजन किया गया जिसमें कक्षा 5 -12 के छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभागिता की। देश -विदेश से कई प्रविष्टियांँ प्राप्त हुई। विषय था भारतीय संस्कृति और भाषा तथा स्वदेशी। किसी एक विषय पर कविता भेजनी थी। सभी…

  • बदलते जा रहे हैं क्यूं | Kyon Shayari

    बदलते जा रहे हैं क्यूं ( Badalte ja rahe hain kyon )    सुहाने ख्वाब मुट्ठी से फिसलते जा रहे हैं क्यूं जो हैं नजदीक दिल के वो बदलते जा रहे हैं क्यूं किये सब फैसले दिल से बड़ी गलती हमारी थी गलत वो फैसले सारे निकलते जा रहे हैं क्यूं अना उनमें बहुत है…