• क्या करूं | Kya Karoon

    क्या करूं ( Kya karoon )   मैं अज्ञानी हूं , ज्ञान बांटता हूं क्या करूं, इंसान हूं इंसान बांटता हूं….   बोझभर किताबें पड़ी हैं घर मे कितनों को तो दीमक भी चाट गए हैं देखता हूं जाते आते लोगों को बुत खाने सोचता हूं सब पगला गए हैं करता नही पूजा पाठ, तब…

  • कठिन परिश्रम | Kathin Parishram

    कठिन परिश्रम ( Kathin parishram )    जो बीत गया दौर , वो लौट कर वापस नही आएगा । वो दौर नहीं फिर आएगा, जो दौड़ कर वर्दी पाएगा ।। वो गया जमाना पीछे बहुत , जो देखेगा सिर्फ पछताएगा। कल नही रुका किसी से , आज को कैसे रोक पाएगा ।। अतीत को देख…

  • आपबीती | Zindagi Ghazal

    आपबीती ( Aapbeeti )    सौ पलों की एक पल में आपबीती हम सुनाते हैं ग़ज़ल में आपबीती सब अना की क़ैद में जकड़े हुए हैं कौन सुनता है महल में आपबीती ? जीते जी ही कह सकोगे हाल अपना कौन कह पाया अजल में आपबीती ? अपने अपने दर्द में ही लोग ग़ुम हैं…

  • नमी | Sad Urdu Shayari in Hindi

    नमी ( Nami )    क्यों आँखों में अक्सर नमी रह गई जो नहीं मिला उसकी कमी रह गई। यूँ भीड़ में चलते रहे हज़ारों बस अपनों को ढूढ़ती ये नज़र रह गई। समंदर भर एहसास गुजरते देखे मगर कायम इक तिशनगी रह गई। सुधारा बहुत अपनी कमियों को फिर सुना वो बात नहीं रह…

  • हम भारत के रखवाले | Ham Bharat ke Rakhwale

    हम भारत के रखवाले ( Ham Bharat ke rakhwale )    हम भारत के रखवाले हैं भारत को विजयी बनाएंगे। धीर वीर महावीर सारे रण कौशल दिखलाएंगे। महासमर में महारथी लोहा लेंगे तूफानों से। शौर्य पराक्रम वीरता दिखला देंगे मैदानों में। बिगुल बजा देंगे विजय का नभ परचम लहराएंगे। सच्चे सपूत भारतमाता के वंदे मातरम…

  • तुम आ जाते सावन में घर | Sawan mein

    तुम आ जाते सावन में घर ( Tum aa jate sawan mein ghar )   सच कहती हूॅं तेरे बिन मुझे कुछ अच्छा न लगता, तुम आ जाते सावन में घर तो सावन यह लगता। मन में आशाएं बड़ी-बड़ी थी कमी तुम्हारा लगता, इस जीवन में सफ़र तेरे बिन अब अधूरा लगता।। आपसे अच्छा हम-दर्द…

  • यकीन | Yakeen

    यकीन ( Yakeen )    भले दे न सको तुम मुझे अपनापन मेरा यूं मेरापन भी ले नाही पाओगे उस मिट्टी का ही बना हुआ हूं मैं भी इसी गंध मे तुम भी लौट आओगे… फिसलन भरी है जमीन यहां की फिसलते ही भले चले जाओगे महासागर बनकर बैठा हुआ हूं मैं मुझी मे तुम…

  • अलसायी कलम | Alsaayi Kalam

    अलसायी कलम ( Alsaayi kalam )    यह निढाल कलम सुस्ताये से अल्फाज़ करवट ले मुँह मोड़कर यह मेरी डायरी के पन्ने हाथ लगाने पर कुछ यूं उखड़े से आँखें बंद किये कसमसाते हुये लिहाफ़ में मानो और दुबक गये हाथों से मेरे छिटक लिये दबी आवाज़ में मानो कह रहे रात है गहराती हमें…

  • चाहता है तिरंगा | Poem on Tiranga in Hindi

    चाहता है तिरंगा ( Chahta hai tiranga )   सर भी झुकते हैं लाखों नमन के लिए जान देते हैं जो भी वतन के लिए सिर्फ़ नारों से क्या होगा ऐ दोस्तो रौनक़े बख़्श दो अंजुमन के लिए मेरे बच्चों से उनकी ख़ुशी छीन ली और क्या चाहिए राहज़न के लिए पीठ पर गोलियाँ तुम…

  • करगिल जंग | Kargil Jung

    करगिल जंग! ( Kargil Jung )   युद्ध के उस रंग में, दुश्मन के साथ जंग में, बहादुरी दिखा रहे थे हमारे रणबाँकुरे। टाइगर हिल हो या हो द्रास की वो पहाड़ियों, फिर से उसको हासिल कर रहे थे रणबाँकुरे। एटम-बम को जो गहना पहनाकर वो बैठे हैं, अधोपतन का उत्तर वो दे रहे थे…