• बारिश के चढ़ल बा पानी | Barish ke Chadhal ba Pani

    बारिश के चढ़ल बा पानी ! ( Barish ke chadhal ba pani )    अरे रामा! बारिश कै चढ़ल बा पानी, करत मनमानी ए हरी। ( 2) गाँव -शहर ऊ नदिया डूबल, मक्का,अरहर,धान ऊ डूबल। अरे रामा! देवरा करत छेड़खानी, चढ़ल बा पानी ए हरी। अरे रामा! बारिश कै चढ़ल बा पानी, करत मनमानी ए…

  • आई फ्लू | Eye Flu

    आई फ्लू ( Eye Flu )    बारिश बुला रही बीमारियां रखना उसका ध्यान, छूने मत देना प्रभावित व्यक्ति कोई भी सामान। नाक-कान स्कीन के साथ रखें ऑंखों का ध्यान, मौसम-करवट बदल रहा बचना सभी इन्सान।। आज हर तरफ़ा हो रहा है इस वायरस का शोर, हल्के में नहीं लेना इसको करना बातों पर गौर।…

  • रफ़ू न करना | Rafu na Karna

    रफ़ू न करना ( Rafu na karna )    मेरी क़ुर्बतों के ग़म में ,कभी दिल लहू न करना मैं जहाँ का हो चुका हूँ, मेरी आरज़ू न करना ये यक़ीन कर तू मेरा, मैं न भूल पाऊं तुझको कहीं दिल खराब कर के, मेरी जुस्तजू न करना कहीं जल न जाये तेरा, इसी आग…

  • तपन | Tapan

    तपन ( Tapan )    तपन है जैसे तपती रेत मे नंगे पांव की मिली न बसर जिंदगी मे किसी छांव की चलता ही रहा ,फजर से शामेरात तक मिली न सराय कोई ,शहर से गांव तक बच्चों ने कहा ,भविष्य है उनके बच्चों का बेटियों ने कह दिया ,पापा हमे भूल गए अपनों की…

  • याद आया | Yado ki Shayari

    याद आया ( Yaad Aya )    कोई अनजान सफ़र याद आया अजनबी कोई बशर याद आया तेरा चेहरा ही नज़र में उतरा जब कभी दर्दे जिगर याद आया धूप ने जब भी सताया हमको बारहा बूढ़ा शजर याद आया इक मेरा दोस्त पुराना था जो कुछ लगी देर मगर याद आया अपनी ख़ुशक़िस्मती समझेंगे…

  • नारी एक रूप अनेक | Nari ek Roop Anek

    नारी एक रूप अनेक ( Nari Ek Roop Anek )    किसी का मुकद्दर संवारती है , किसी का मुकद्दर बिगाड़ती है , नारी अगर जिद्द पर आ जाए राजा को भी वो रंक बनाती है! -1 हमसफर का साथ निभाती है, पूरा जीवन समर्पित करती है , नारी अगर जिद्द पर आ जाए बेवफाई…

  • मेरी धरती माँ | Meri Dharti Maan

    मेरी धरती माँ ( Meri dharti maan )   मेरी धरती माँ प्यारी है भारत की ख़ुशबू फ़ैली है ऐसा न कहीं देश मिलेगा गंगा जमना जो मिलती है उगते है गुल उगती सरसों धरती माँ देखो ऐसी है सैनिक करे है हिफाज़त कर सकता न अदू ज़ख्मी है नफ़रत के दुश्मन ख़त्म हुई उल्फ़त…

  • फ़िक्र जहां की | Fikr Jahan ki

    फ़िक्र जहां की! ( Fikr jahan ki )    बेवजह दिल दुखाना मुनासिब नहीं, जग में नफरत बढ़ाना मुनासिब नहीं। फूल खिलते रहें सारी दुनिया में यूँ, बैठी तितली उड़ाना मुनासिब नहीं। धरती नभ से मिले ये तो मुमकिन नहीं, तोड़ ढूँढों नहीं, ये मुनासिब नहीं। कोई कुदरत के हक़ को मिटाने लगे, फ़िक्र हो…

  • वाह भाई वाह | Wah Bhai Wah

    वाह भाई वाह ( Wah Bhai Wah )   बालपन से बनना चाहतें कवि-लेखक साहित्यकार, मन में थी उनके ऐसी आशा उसको किया साकार। तारक मेहता का उल्टा चश्मा शो से बनाएं पहचान, शैलेश लोढ़ा नाम है जिनका सपनें किया साकार।। ९ वर्ष की उम्र में जिन्होंने बाल-कवि उपनाम पाया, ये साहित्य की प्रेरणा इन्होंने…

  • Poem in Hindi on Nari | नारी

    नारी ( Nari )  ( 2 )  हर युग को झेला है जिसने हार नहीं पर मानी वह नारी। स्वाभिमान को गया दबाया सिर नहीं झुका वह है नारी। जीवन के दो पहलू कहलाते फिर भी इक ऊँचा इक नीचा। विष के प्याले पी पी कर भी अमृत से जग को नित सींचा। कंटक पथ…