• वाह भाई वाह | Wah Bhai Wah

    वाह भाई वाह ( Wah Bhai Wah )   बालपन से बनना चाहतें कवि-लेखक साहित्यकार, मन में थी उनके ऐसी आशा उसको किया साकार। तारक मेहता का उल्टा चश्मा शो से बनाएं पहचान, शैलेश लोढ़ा नाम है जिनका सपनें किया साकार।। ९ वर्ष की उम्र में जिन्होंने बाल-कवि उपनाम पाया, ये साहित्य की प्रेरणा इन्होंने…

  • Poem in Hindi on Nari | नारी

    नारी ( Nari )  ( 2 )  हर युग को झेला है जिसने हार नहीं पर मानी वह नारी। स्वाभिमान को गया दबाया सिर नहीं झुका वह है नारी। जीवन के दो पहलू कहलाते फिर भी इक ऊँचा इक नीचा। विष के प्याले पी पी कर भी अमृत से जग को नित सींचा। कंटक पथ…

  • सावन में चले शिव के द्वार | Shiv ke Dwar

    सावन में चले शिव के द्वार ( Sawan mein chale shiv ke dwar )   अगम अगोचर अविनाशी औघड़ दानी सरकार। महादेव शिव शंकर शंभू जटा बहती गंगा धार। सावन ने चले शिव के द्वार डम डम डमरू वाले बाबा गले सर्प की माला। भस्म रमाए महाकाल शिव तांडव है मतवाला। शशि शेखर ध्यान मग्न…

  • जीना है तो गेहूं छोड़ दो | Gehun Chhod do

    जीना है तो गेहूं छोड़ दो ( Jeena hai to gehun chhod do )    आज से ही सब छोड़ दो यह गेहूं की रोटियां खाना, नहीं तो यारों पहुॅंचा देगा यह सभी को सफाखाना। खा खाकर जिससे सब लोग आज बढ़ा रहें है तोंद, जीना है तो गेहूं छोड़ दो सब मानो हमारा कहना।।…

  • अंतर | Antar

    अंतर ( Antar )    निर्वस्त्र कपड़ों मे कैसी दिखती होगी वह मांशल जिस्म उभरे वक्षस्थल कामिनी काया लिए हवस परी सी…. ठीक अनुभव किया तुमने वह वैसी ही थी ,ठीक जिसने तुम्हे पैदा किया जिसने तुम्हे राखी बांधी जिसकी डोली उठी घर से ठीक, उस जैसी ही … क्या फर्क लगा , उस और…

  • बजे तब मेरे मन के तार | Baje Tab Mere Man ke taar

    बजे तब मेरे मन के तार ( Baje tab mere man ke taar )     सावन की चली मस्त बहार, रिमझिम आने लगी फुहार। अधर हुई गीतों की बौछार, बजे तब मेरे मन के तार। बजे तब मेरे मन के तार जब कुदरत ने किया श्रंगार, बजी तब मधुबन में झंकार। शिवमय सावन हुआ सार,…

  • आज़ाद की बदौलत आज़ाद हम सभी हैं-अजय अनहद

    अमेठी : हिंदी सेवा संस्थान, राष्ट्रीय कवि संगम, प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा एवं उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के संयुक्त तत्वावधान में श्री शिव प्रताप इंटर कॉलेज अमेठी में क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया । राजेंद्र शुक्ला अमरेश की अध्यक्षता और आशु कवि मथुरा प्रसाद सिंह…

  • बुनियाद | Buniyaad

    बुनियाद ( Buniyaad )    पूरी ईमानदारी से केवल तीन प्रश्नों के उत्तर ही खोज लीजिए ,की अब तक आपने क्या खोया क्या पाया आपके समाज और देश ने क्या खोया क्या पाया बस, आपको जीने , जन्मने और पाने का अर्थ मिल जायेगा…. जिंदा रहना ही अगर जिंदगी है तो मान लीजिए की आप…

  • वक़ार भूल बैठे | Waqar Bhool Baithe

    वक़ार भूल बैठे ( Waqar bhool baithe )   जो मिला था क़ुर्बतों में, वो क़रार भूल बैठे वो ज़रा सी देर में क्यों, मेरा प्यार भूल बैठे लगे हर ख़ुशी पराई, लगे ग़म ही आशना अब यूँ ख़िज़ाँ ने दिल है तोड़ा, कि बहार भूल बैठे मुझे फ़िक्र रोटियों की , ये कहाँ पे…

  • युगों से नारी | Yugon se Nari

    युगों से नारी ( Yugon se nari ) ( मणिपुर में हुई बर्बरता की घटना से मेरा संवेदनशील ह्रदय सिहर उठा है उसी पीड़ा से उत्पन्न हुई मैं यह अपनी कविता आप के समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ )    आज भी भ्रमण कर रही है नारी युगों पुरानी धुरी पर द्रौपदी की भाँति अपनी…