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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Bhishan Garmi
    कविताएँ

    ऐसी भीषण गर्मी | Garmi par Kavita

    ByAdmin April 21, 2023September 21, 2024

    ऐसी भीषण गर्मी ( Aisi bhishan garmi )  कर लिया है गर्मी ने अभी से यह विकराल रूप, ऐसी भीषण गर्मी से यें शक्लें हो रहीं है कुरूप। तप रही है धरा एवं सभी प्राणियों का यह बदन, बुझ ना रही प्यास किसी की पड़ रही ऐसी धूप।। यह सहा नही जा रहा ताप दिन…

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  • Ghazal Bhoolna Hoga
    ग़ज़ल

    भूलना होगा | Ghazal Bhoolna Hoga

    ByAdmin April 20, 2023July 5, 2023

    भूलना होगा ( Bhoolna hoga )    हमें ये लग रहा है की उसे अब भूलना होगा मनाया है बहुत इस बार लेकिन रूठना होगा। बहुत मसऱूफ़ है वो आजकल सब महफ़िलें छोड़ी मगर रहता कहां है आज उससे पूछना होगा। हमारी चाहतों ने कर दिया मग़रूर उस बुत को बना है वो ख़ुदा कहता…

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  • Dharti ki vedana
    कविताएँ

    धरती की वेदना | Dharti ki vedana

    ByAdmin April 20, 2023

    धरती की वेदना ( Dharti ki vedana )   सुनो तुम धरती की वेदना समझो पहले इसे तुम यहां! ऋतुएं बदल रही है क्यों आखिर क्यों तापमान रहने लगा बढ़ा चढ़ा तुम्हारे मन को जो प्रश्न बेचैन करें हां वही तो है इस धरती की वेदना।। कहीं पर खनन हो रहा मृदा का कहीं अब…

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  • Jab Seene mein
    कविताएँ

    जब सीने में तूफान दबाना पड़ता है | Jab Seene mein

    ByAdmin April 20, 2023April 20, 2023

    जब सीने में तूफान दबाना पड़ता है ( Jab seene mein toofan dabana parta hai )   जब सीने में तूफान दबाना पड़ता है हर दिल में इंसान जगाना पड़ता है जब सुदर्शन धारी चक्र उठाना पड़ता है धर्मयुद्ध में कृष्ण बल दिखाना पड़ता है जब घट घट में दीप जलाना पड़ता है हौसलों से…

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  • Gangaur par Kavita
    कविताएँ

    गणगौर का पर्व | Gangaur par Kavita

    ByAdmin April 20, 2023

    गणगौर का पर्व ( Gangaur ka parv)    यह दो शब्दों से जुड़कर बना ऐसा पावन-पर्व, विवाहित कुॅंवारी लड़कियाॅं करती इसपर गर्व। गण से बने भोलेशंकर गौर से बनी माॅं पार्वती, प्रेम व पारिवारिक सौहाद्र का ये गणगौर पर्व।। १६ दिनों तक प्रेम पूर्वक पर्व ये मनाया जाता, पौराणिक काल से है इससे उम्मीद व…

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  • Shabdon ka Shilpkar
    गीत

    शब्दों का शिल्पकार हूं | Shabdon ka Shilpkar

    ByAdmin April 19, 2023April 19, 2023

    शब्दों का शिल्पकार हूं ( Shabdon ka shilpkar hoon )   वाणी का आराधक हूं मैं, देशप्रेम भरी हुंकार हूं। कलम का सिपाही भी, शब्दों का शिल्पकार हूं। शब्दों का शिल्पकार हूं रोशनी हूं उजियारा भी, मैं जलती हुई मशाल हूं। देशप्रेम में झूम उठे जो, भारतमाता का लाल हूं। शारदे का पूजक प्यारा, मैं…

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  • Kamal
    कविताएँ

    कमल खिलाना ही होगा | Kamal

    ByAdmin April 19, 2023

    कमल खिलाना ही होगा ( Kamal khilna hi hoga )    सकल जगत कल्याण हेतु तुमकों आगे आना होगा। हिन्दू हो हिन्दू के मन में, रिद्धंम जगाना ही होगा। भारत गौरव का इतिहास, पुनः दोहराना ही होगा। भय त्याग के हिन्दू बनकर, तुम्हे सामने आना होगा। दबी हुई गरिमा गौरव से, गर्त हटाना ही होगा।…

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  • Rifle par Kavita
    कविताएँ

    राइफल हमारी साथी | Rifle par Kavita

    ByAdmin April 19, 2023

    राइफल हमारी साथी ( Rifle hamari sathi )    यही हमारी एक सच्ची साथी, दुश्मन का यह संहारक साथी। हार को जीत यह बना देती है, हमेशा हमारे संग रहती साथी।। रायफल नाम दिया है इसको, रखतें जवान हाथों में इसको। इसके बिना हम रहते है अधूरे, और हमारे बिना ये भी अधूरी।। रात एवं…

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  • Khushnaseeb
    मुक्तक

    खुशनसीब | Khushnaseeb

    ByAdmin April 18, 2023April 19, 2023

    खुशनसीब ( Khushnaseeb )    खुशनसीब होते वो लोग जो हंसकर जी लिया करते हैं। भोली मुस्कान रख चेहरे पर दिल जीत लिया करते हैं। जवानी के मद में अंधा बिल्कुल भी नहीं होते कभी वो। शुभ कर्म और व्यवहार से जीवन गुजार लिया करते   जवानी ( Jawani )   जवानी के मद में…

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  • Dil Poem
    कविताएँ

    नाजुक सा जनाब दिल | Dil Poem

    ByAdmin April 18, 2023

    नाजुक सा जनाब दिल ( Nazuk sa janab dil )   मिलन को बेताब दिल बुन रहा ख्वाब दिल। नाजुक सा जनाब दिल दमके महताब दिल। प्यार भरे मधुर तराने गीत धड़कने गाती है। नयन बिछाए राहों में आओ तुम्हें बुलाती है। जाने क्यों मन की बेचैनी बेताबी सी होती है। दिल की धड़कने ठहरी…

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