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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Ram Ji par Kavita
    कविताएँ

    हमारे राम | Ram Ji par Kavita

    ByAdmin March 30, 2023

    हमारे राम ( Hamare ram )   सुकून-ओ-चैन का पैगाम, देने हमें आते हैं राम। भाई से भाई का रिश्ता, निभाने आते हैं राम। दिखता यहाँ कोई मायावी रावण, वध उसका करने आते हैं राम। नफरत की दीवार खड़ा न करो, मोहब्बत का पाठ पढ़ाते हैं राम। हिन्दू-मुस्लिम वो क्या जाने, मेरी हर साँस में…

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  • Samay par Kavita
    कविताएँ

    समय | Samay par Kavita

    ByAdmin March 30, 2023

    समय ( Samay )    मूल्यवान है समय की कीमत  इसको    व्यर्थ   गवाओं   ना    समय  समय पर डोले धरती  समय  पर  सूरज  चांद  उगे   समय  समय  पर चले हवाएं   समय  पर   सुंदर  नाद  लगे,   कर सदुपयोग कर्म कर अपना पीछे      पैर     हटाओ    ना।   पेड़   समय  पर  फल  देता  है समय  …

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  • राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था शब्दाक्षर ने राजस्थान दिवस पर कवियों का सम्मान किया
    साहित्यिक गतिविधि

    राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था शब्दाक्षर ने राजस्थान दिवस पर कवियों का सम्मान किया

    ByAdmin March 30, 2023March 30, 2023

    राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था शब्दाक्षर जिला झुंझुनू राजस्थान व अलायंस क्लब ईन्द्र के तत्वावधान में जांगिड अस्पताल में राजस्थान दिवस पर कवियों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डाॅ दयाशंकर जांगिड ने की। मुख्य अतिथि स्काउट गाइड के अध्यक्ष रामावतार सबलानिया थे। मंच पर जगदीश जांगिड, क्लब पीआरओ सुरेन्द्र ख्यालिया, शब्दाक्षर संस्था जिलाध्यक्ष कवि रमाकांत…

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  • Poem Koi aisi Ghazal likhoon
    कविताएँ

    कोई ऐसी गजल लिखूं | Poem Koi aisi Ghazal likhoon

    ByAdmin March 29, 2023

    कोई ऐसी गजल लिखूं ( Koi aisi ghazal likhoon )    कोई ऐसी गजल लिखूं, वो प्रेम सितारा हो जाए। अपनापन अनमोल बरसे, नेह की धारा हो जाए। रच लूं सुंदर गीत सुरीला, नगमा ये प्यारा हो जाए। रस में भीगे शब्द मोहक, हसीं काव्यधारा हो जाए। दोहा मुक्तक छंद सोरठा, सवैया भी सारा हो…

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  • Dupaharia par Kavita
    कविताएँ

    दुपहरिया | Dupaharia par Kavita

    ByAdmin March 29, 2023

    दुपहरिया ( Dupaharia )   तमतमाती चमक लपलपाती लपक लू की गर्म हवाएं बहती दायें बायें छांव भी गर्म पांव भी नर्म जल उठते थे नंगे जब चलते थे। दुपहरिया को क्या पता? गरीबी है एक खता? मेहनत ही उसकी सजा उसके लिए क्या जीवन क्या मजा पेट के लिए वो तो हमेशा ही जलते…

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  • Kavita Bhujang hua Badnam
    कविताएँ

    भुजंग हुआ बदनाम व्यर्थ ही | Kavita Bhujang hua Badnam

    ByAdmin March 28, 2023

    भुजंग हुआ बदनाम व्यर्थ ही ( Bhujang hua badnam vyarth hi )    भुजंग हुआ बदनाम व्यर्थ ही अजगर पाले बैठे हैं। जहर उगल रहा है आदमी घट नाग काले बैठे हैं। छल छद्मो की भाषा बोले नैन आग बरसते अंगारे। वाणी के छोड़े तीर विषैले मन ईर्ष्या द्वेष भरे सारे। सर्पों का सारा विष…

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  • Poem Dhoop Sekne
    कविताएँ

    धूप सेंकने वो आती नहीं | Poem Dhoop Sekne

    ByAdmin March 28, 2023

    धूप सेंकने वो आती नहीं! ( Dhoop sekne wo aati nahi )    आओ कुछ काम करें हम भी जमाने के लिए, कोई रहे न मोहताज अब मुस्काने के लिए। लुप्त होने न पाए संवेदना इंसानों की, कुछ तो बची रहे इंसान कहलाने के लिए। सुनो,जालिमों हुकूक मत छीनों मजलूमों का, कभी न सोचो इनका…

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  • Kavita Bejubano ko Pyar do
    कविताएँ

    बेजुबानों को प्यार दो | Kavita Bejubano ko Pyar do

    ByAdmin March 28, 2023

    बेजुबानों को प्यार दो ( Bejubano ko pyar do )    नन्हे बालक भोले भाले हाथी घोड़े शेर पाले पशुओं से प्रेम जताते खग पखेरू दाने डाले जीवो पर दया दर्शाते गले मिलके स्नेह जताते हिल मिलकर ऐसे रहते जैसे हो कोई पुराने नाते कुत्ता बिल्ली हो खरगोश उत्साह उमंग लाते जोश ऊंटों की सवारी…

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  • Poem in Hindi on Sindoor
    कविताएँ

    सिन्दूर पर कविता | Poem in Hindi on Sindoor

    ByAdmin March 28, 2023

    सिन्दूर पर कविता  ( Sindoor par kavita )    सिन्दूर के नाम पर क्यों? नारी बंध सी जाती है, अबला बन जाती है तड़प तड़प कर जिंदा ही, मर सी जाती है। सिन्दूर के लज्जा में सम्मान श्रद्धा में पति को भगवान ही समझती, फिर भी, न जाने क्यों! बार बार मन में प्रश्न उठता…

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  • Swarg par Kavita
    कविताएँ

    स्वर्ग | Swarg par Kavita

    ByAdmin March 27, 2023March 27, 2023

    स्वर्ग  ( Swarg )    स्वर्ग   कहीं   ना   और,  बसा  खुद  के  अंतर में खोज   रहे  दिन- रात  जिसे  हम  उस  अम्बर में   सुख   ही   है   वह   स्वर्ग  जिसे  हम  ढूंढे  ऊपर बसा    हमारे    सुंदर   तन – मन   के   ही  अंदर   काट    छांट    कर    मूर्तिकार   जैसे   पत्थर को दे    देता    है   रूप   अलग  …

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