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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Geet Baras Raha hai
    गीत

    बरस रहा है | Geet Baras Raha hai

    ByAdmin March 27, 2023

    बरस रहा है ( Baras raha hai )   बरस रहा है जड़-चेतन से,सुधियों का अनुराग । मिलन-ज्योति भी लगा रही है, राजभवन में आग।। 🥇 पाती एक न आयी उसकी, नहीं कभी संदेश । चला गया वह मनभावन क्या, जाने किस परदेश । डसा जा रहा साधक मन को, विरह क्षणों का नाग ।।…

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  • 25 एवं 26 मार्च के मासिक ऑनलाइन कवि सम्मेलन एवं मुशायरे की रिपोर्ट
    साहित्यिक गतिविधि

    25 एवं 26 मार्च के मासिक ऑनलाइन कवि सम्मेलन एवं मुशायरे की रिपोर्ट

    ByAdmin March 27, 2023

    तिरंगा काव्य मंच का 36 वां मासिक ऑनलाइन कवि सम्मेलन एवं मुशायरा 25 एवं 26 मार्च को साहित्य त्रिवेणी के सम्पादक एवं तिरंगा काव्य मंच के संरक्षक आदरणीय डॉ कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड जी (कोलकाता) एवं तिरंगा काव्य मंच के अध्यक्ष बरेली के उस्ताद शायर आदरणीय गुरुदेव श्री विनय सागर जायसवाल जी की अध्यक्षता में उन्हीं…

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  • Kavita Jidhar Dekho Udhar
    कविताएँ

    जिधर देखो उधर | Kavita Jidhar Dekho Udhar

    ByAdmin March 27, 2023March 27, 2023

    जिधर देखो उधर ( Jidhar dekho udhar )    जिधर देखो उधर मच रहा कोहराम यहां भारी है। चंद चांदी के सिक्कों में बिक रही दुनिया सारी है। बिछ रही बिसात शतरंजी मोहरे मुखौटा बदल रहे। चालें आड़ी तिरछी बदले बाजीगर बाजी चल रहे। कुर्सी के पीछे हुए सारे राजनीति के गलियारों में। वादों की…

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  • Nain par Kavita
    कविताएँ

    नैनो का अंदाज़ जुदा | Nain par Kavita

    ByAdmin March 27, 2023

    नैनो का अंदाज़ जुदा ( Naino ka andaz juda)    आंखें सबकी एक जैसी देखने का अंदाज़ जुदा। नज़ाकतें भांति भांति की नजरें होती जब फिदा। कोई तिरछी नजरें झांके टिक टिक नजर गढ़ाए। ललचाई आंखों से कोई मन ही मन मलाई खाए। नेह सी आंखों से झरते अनमोल मोती प्यार भरे। खुल जाते दिल…

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  • शुभम मेमोरियल ने काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया
    साहित्यिक गतिविधि

    शुभम मेमोरियल ने काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया

    ByAdmin March 27, 2023

    शुभम मैमोरियल ने काव्यगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया   शुभम मैमोरियल साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था ने काव्यगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन विनय साग़र जायसवाल की अध्यक्षता में किया। इस अवसर पर मुख्यातिथि रहे देवेन्द्र देव व विशिष्ट अतिथि रहे रणधीर प्रसाद गौड़ संचालन रंजन विशद व ग़ज़लराज ने किया। इस कार्यक्रम में…

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  • Poem Muh se Phool Jhadte Hain
    कविताएँ

    मुँह से फूल झरते हैं | Poem Muh se Phool Jhadte Hain

    ByAdmin March 26, 2023

    मुँह से फूल झरते हैं! ( Muh se phool jhadte hain )    क्या कुदरत बनाई उसे आह लोग भरते हैं, लेकर उधार रोशनी तारे वो चमकते हैं। हौसले जवाँ दिल के उड़ते आसमानों में, रात के उन ख़्वाबों में साथ-साथ चलते हैं। कुदरत जो बख्शी है उसे हुस्न-दौलत से, बोलती है जब देखो मुँह…

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  • Satya par Kavita
    कविताएँ

    सत्य गुमराह नहीं होता | Satya par Kavita

    ByAdmin March 26, 2023

    सत्य गुमराह नहीं होता ( Satya gumrah nahi hota )   सांच को आंच नहीं होती सत्य गुमराह नहीं होता। सच्चाई छुपती नहीं कभी सच बेपरवाह नहीं होता। श्रद्धा प्रेम विश्वास सत्य के आगे पीछे रहते सारे। सच्चाई की डगर सुहानी दमकते भाग्य सितारे। सत्य परेशान हो सकता सत्य संघर्ष कर सकता। सत्य की जीत…

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  • Kavita Dhyan Aapka hi Dharta Hoon
    कविताएँ

    ध्यान आपका ही धरता हूं | Kavita Dhyan Aapka hi Dharta Hoon

    ByAdmin March 26, 2023

    ध्यान आपका ही धरता हूं ( Dhyan aapka hi dharta hoon )    मैं हर जगह बस छवि आपकी, नैनों में देखा करता हूं। तारणहारा तुम हो भगवान, ध्यान आपका ही धरता हूं।। अज्ञानी हूं अनजाना हूं, दोष भरें हैं घट में मेरे। गुरुवर तुम बिन कौन सहायक, नाम रटूं मैं सांझ सवेरे। उलझा विषियन…

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  • Kushmanda Mata
    गीत

    चैत्र नवरात्र भक्ति धारा | Kushmanda Mata par Kavita

    ByAdmin March 25, 2023

    चैत्र नवरात्र भक्ति धारा ( Chaitra Navratra Bhakti Dhara )    अष्ट भुजाओं वाली आओ, सिंह सवार हो माता। धनुष बाण कमंडल, शोभित हे कुष्मांडा माता। नवदुर्गा स्वरूप चतुर्थ, सर्व सुख दायिनी माता। दिव्य ज्योति आलोक प्रभा, तेज तुम्हीं से आता। सिंह सवार हो माता उत्साह उमंग भरने वाली जीवन में आनंद भरो। जग कल्याणी…

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  • Kavita Phir usi Kandhe par
    कविताएँ

    फिर उसी कांधे पर सिर | Kavita Phir usi Kandhe par

    ByAdmin March 25, 2023

    फिर उसी कांधे पर सिर ( Phir usi kandhe par seer )   बचपन में मां के आंचल में सिर देकर सो जाते थे। मीठी मीठी लोरियां सुनकर सपनों में खो जाते थे। बैठ पिता के कंधों पर हाथी घोड़े का चलता खेल। कागज की नाव चलाते साथियों संग चलती रेल। फिर पिता के कंधों…

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