• मेरे खुदा | Poem Mere Khuda

    मेरे खुदा ( Mere Khuda )    सुन मेरे खुदा सुन मेरे मौला मेरे परवर दिगार। सारी दुनिया के रखवाले सारे जग के करतार। दीनबंधु दुखहर्ता हे भक्तों के स्वामी प्रतिपाल। खुशियों के दीप जला मौला कर दे मालामाल। चराचर स्वामी सुन ले ईश्वर अंतर्यामी सुन ले। शरण पड़ा हूं तेरी प्रभु फरियाद जुबानी सुन…

  • पर्दे के पीछे | Kavita Parde ke Peechey

    पर्दे के पीछे ( Parde ke peechey )   रंगमंच है ये सारी दुनिया पर्दे के पीछे क्या होता। दिखता है वो बिकता है मंचों पर अभिनय होता। भांति भांति किरदार लिए लाना रूप धरे जाते हैं। नाटक में डूबी दुनिया मुखौटो पे मुखोटे आते हैं। पता नहीं ऐसा लगता है कलाकार जब आते हैं।…

  • मां तेरी लाल चुनरिया | Kali Maa ka Geet

    मां तेरी लाल चुनरिया ( Maan teri laal chunariya )    मां तेरी लाल चुनरिया, लाल तेरी ध्वजा बिराजे। सजा दरबार निराला, मां शंख चक्र गदा साजे। मां तेरी लाल चुनरिया शक्ति स्वरूपा गौरी, हे माता जग कल्याणी। दमके किस्मत के तारे, हे अंबे मां वरदानी। संकट सारे हरना मेरे, मां हो सिंह सवार बिराजे।…

  • सागर की लहरें यूं कहती | Poem Sagar ki Lahren

    सागर की लहरें यूं कहती ( Sagar ki lahren yoon kahati )    सागर की लहरें उठती मन में जोश नया जगाती है जलधारा मानस पटल शीतल आभास कराती है हिलोरे भरता जब समंदर सागर की लहरे गाती है बढ़ते रहना अपनी मौज में बूंद बूंद छलकाती है सागर की लहरें उठती दयासागर कृपासागर करुणा…

  • विरह | Poem in Hindi on Virah

    विरह ( Virah )    नयन सुख ले लेने दो प्रियतम तुम जाने से पहले। अधर रस पान करा दो सूरज उग जाने से पहले। सुबह से वही दोपहरी रात कटवावन लागेगी जिया की प्यास बुझा दो मेरी, तुम जाने से पहले। विरह की बात बताऊं, सूना सूना जग लागे है। बहे जब जब पुरवाई,…

  • दंगों की जांच | Vyang Dangon ki Janch

    दंगों की जांच ( Dangon ki janch )    शहर में मुख्य रूप से दो धार्मिक समूह थे। इन दोनो के अलावा दोनो में एक समूह शरारती तत्वों का था। इस तरह तीन समूह हो गये। त्यौहार आया । त्यौहार आये। दोनो धार्मिक समूहो के त्यौहार एक ही दिन पड़ गये। धार्मिक समूह डर गये।…

  • भ्रमित इंसान | Kavita Bhramit Insaan

    भ्रमित इंसान ( Bhramit insaan )    जाने किस वहम में खोया क्या-क्या भ्रम पाले बैठा है। जाने किस चक्कर में वो औरों के छीनें निवाले बैठा है। भाति भाति सपने संजोए झूठ कपट का सहारा क्यों। मोहमाया के जाल में फंसता पैसा लगता प्यारा क्यों। रिश्ते नाते छोड़ चला नर अपनापन वो छोड़ दिया।…

  • मोहब्बत नाजुक सा एहसास | Kavita Mohabbat

    मोहब्बत नाजुक सा एहसास ( Mohabbat nazuk sa ehsaas )    मोहब्बत नाजुक सा एहसास बेपनाह इश्क है ये मेरे यार दर्द भरी दास्तां कह दो या दिलों का उमड़ता सा प्यार धड़कनों से होकर उतरता है दिल की गहराइयों को जाता तार दिलों के जुड़े होते अटूट हर कोई शिद्दत से निभाता दिलवालों की…

  • पीक चित्रकार | Kavita Pik Chitrakar

    पीक चित्रकार ( Pik chitrakar )   कुछ सीढ़ियाँ चढ़नें के बाद मुँह में जमा जर्दा व गुटखे का मिश्रित पीक बेचैन हो उठता है एक कोनें को देखकर जो कभी हुआ करता था साफ सुथरा सफेद कैनवास जिस पर पीक भरी कूँची से किसी चित्रकार ने शुरू किया था चित्र उकेरना फिर एक से…

  • नवदुर्गा पर कविता | Maa Durga Kavita

    नवदुर्गा पर कविता ( Navdurga par kavita )   मां मुझको तू शक्ति दे दे जीवन के तू दुख हर ले जुड़ा रहे तुझसे यह नाता इतनी मेरी बिनती सुन ले मांगू मैं ना तुझसे कुछ मैं चरणों में शरणागत कर ले दीया जनम जो तूने मुझको दूजो की सेवा का वर दे तुझे चढ़ाऊं…