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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Poem Saiyan
    गीत

    सइयाँ मुझको बनारस घुमाना | Poem Saiyan

    ByAdmin April 2, 2023April 2, 2023

    सइयाँ मुझको बनारस घुमाना ! ( Saiyan mujhko banaras ghumana )    सुनों -सुनों सइयाँ मोहें गरवा लगाना, बात मेरी मानों बनारस घुमाना। लस्सी मैं पिऊँगी,गोलगप्पे भी खाऊँगी, सुबह -सुबह चलके मैं गंगा नहाऊँगी। शामवाली आरती कराना, मुझे गोलगप्पे खिलाना। सुनों -सुनों सइयाँ मोहें गरवा लगाना, बात मेरी मानों बनारस घुमाना। लस्सी जो पिऊँगी तो…

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  • Geet Main Akela
    गीत

    मैं अकेला इक काफिला हूं | Geet Main Akela

    ByAdmin April 2, 2023

    मैं अकेला इक काफिला हूं ( Main akela ek kafila hoon )    मैं अकेला इक काफिला हूं, चलता जाता मौज में। गीत रचता नित नया, काव्य शब्द चुनता ओज के। वीरों महावीरों रणवीरों की, तरुणाई जगाने चला हूं। राष्ट्रधारा में देशभक्ति की, वीर गाथा सुनाने चला हूं। मैं अकेला इक काफिला हूं हल्दीघाटी हुंकार…

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  • Geet Na Chitthi na Sandesh
    गीत

    ना चिट्ठी ना संदेश | Geet Na Chitthi na Sandesh

    ByAdmin April 2, 2023

    ना चिट्ठी ना संदेश कोई पिया चले गए परदेस ( Na chitthi na sandesh koi piya chale pardesh )  ना चिट्ठी ना संदेश कोई सनम चले गए परदेस कोई। विरहा सी अगन लगी मन में तृष्णा न बची शेष कोई। ना चिट्ठी ना संदेश कोई पैगाम प्यार का दे हमको सुध बुध हमारी ले जाओ।…

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  • Kavita Besuri Bansuri
    कविताएँ

    बेसुरी बांसुरी | Kavita Besuri Bansuri

    ByAdmin April 2, 2023April 2, 2023

    बेसुरी बांसुरी ( Besuri bansuri )   क्यों बनाते हो जीवन को बेसुरी सी बांसुरी फूंक कर सांसों को देखो सुर भरी है राग री।   चार  दिनों की चांदनी है फिर अधेरी रात री। कब बुझे जीवन का दीपक कर लो मन की बात री।   जोड़ कर रख ले जितना भी धन सम्पत्ति…

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  • Kavita Apne Apne Ram
    कविताएँ

    अपने अपने राम | Kavita Apne Apne Ram

    ByAdmin April 1, 2023

    अपने अपने राम ( Apne Apne Ram )    अपने अपने राम भजे सब मन में मोतीराम हुए। मार कुंडली रावण बैठा खुद ही राजा राम हुए। मर्यादा का हनन हो रहा संस्कार सारे लुप्त हुए। कुंभकरण सी नींद सोए आचरण विलुप्त हुए। लाज शर्म आंखे खोई शिष्टाचार सब भूल गए। स्वार्थ में अंधे होकर…

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  • जलेबी | Jalebi par Kavita
    कविताएँ

    जलेबी | Jalebi par Kavita

    ByAdmin March 31, 2023

    जलेबी ( Jalebi)    हुस्न-ओ-शबाब से कसी है जलेबी, गर्म आँच पे खूब तपी है जलेबी। तुर्को ने लाया भारत में देखो, लज्जत जिन्दगी की बढ़ाती जलेबी। व्यंग्य से भरी है इसकी कहानी, फीकी न पड़ती इसकी जवानी। खुशबू है अंदर, खुशबू है बाहर, खुद को मिटाकर चमकी जलेबी। हुस्न-ओ-शबाब से कसी है जलेबी, गर्म…

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  • Rishton par Kavita
    गीत

    सच्चा रिश्ता कौन सा | Geet Sachcha Rishta Kaun sa

    ByAdmin March 31, 2023April 1, 2023

    सच्चा रिश्ता कौन सा ( Sachcha rishta kaun sa )   अपनापन सबको जताएं चेहरों पे मुस्कान लिए। प्यार का रिश्ता निभाएं खुशियों का पैगाम लिए। प्यार का रिश्ता निभाएं सच्चा रिश्ता वही जग में जहां प्रेम की बहती धारा। स्नेह का सागर उमड़े दिल से लगता अपना प्यारा। रिश्तो की डगर पर सच्चा सुख…

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  • Kavita Mandir Banne Wala Hai
    कविताएँ

    मंदिर बनने वाला है | Kavita Mandir Banne Wala Hai

    ByAdmin March 31, 2023

    मंदिर बनने वाला है ( Mandir banne wala hai )    मन धीर धरो क्यो आतुर हो,अब शुभ दिन आने वाला है। साकेत की दिव्य धरा पर फिर से, मंदिर बनने वाला है। अब हूक नही हुंकार भरो, श्रीराम का जय जयकार करो, तुम पहन लो केसरिया साँफा, घर राम का बनने वाला है। राजा…

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  • Geet Jab Jatharagni Bolti hai
    गीत

    जब जठराग्नि बोलती है | Geet Jab Jatharagni Bolti hai

    ByAdmin March 30, 2023

    जब जठराग्नि बोलती है (Jab jatharagni bolti hai ) धरने प्रदर्शन होती हड़तालें सारी कुर्सियां डोलती है टूट जाता है बांध सब्र का जब जठराग्नि बोलती है जन जन जब लाचार होता कोई नहीं सहारा होता भुखमरी का मारा होता सबने किया किनारा होता वर्षों तक ना बोल सके वो बात जुबानें बोलती है झूठे…

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  • Ghazal Khanabadosh
    शेरो-शायरी

    खानाबदोश | Ghazal Khanabadosh

    ByAdmin March 30, 2023March 30, 2023

    खानाबदोश ( Khanabadosh )   रहने लगे है आप भी खानाबदोश से लगता है आँख लड़ गयी खानाबदोश से   फानी बदन की चाह में जीवन न तू गवाँ सुनते है बात संत सी खानाबदोश से   जो हमसफ़र के साथ कटे वो है जिंदगी इतनी सी बात सीख ली खानाबदोश से   इक नौकरी…

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