Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • Reema Pandey Ghazal
    शेरो-शायरी

    न आना तुम कभी अब इस गली में | Reema Pandey Ghazal

    ByAdmin February 3, 2023

    न आना तुम कभी अब इस गली में ( Na aana tum kabhi ab is gali mein )    न आना तुम कभी अब इस गली में रखा है क्या बताओ दोस्ती में न आया चैन पल भर भी मुझे तो मिले गम ही हजारों जिंदगी में खुदा मेरे बचा भी लो कहाँ हो रही…

    Read More न आना तुम कभी अब इस गली में | Reema Pandey GhazalContinue

  • Shayari on Zindagi
    शेरो-शायरी

    साथ हरदम निभाती रही ज़िन्दगी | Shayari on Zindagi

    ByAdmin February 2, 2023February 2, 2023

    साथ हरदम निभाती रही ज़िन्दगी ( Saath har dam nibhati rahi zindagi )    साथ हरदम निभाती रही ज़िन्दगी आस दिल में जगाती रही ज़िन्दगी जब हुआ दिल परेशान मेरा कभी प्यार मुझपे लुटाती रही ज़िन्दगी बन के मेरा सहारा खड़ी है सदा आँधियों से बचाती रही ज़िन्दगी लड़खड़ायें कदम जब भी मेरे कहीं राह…

    Read More साथ हरदम निभाती रही ज़िन्दगी | Shayari on ZindagiContinue

  • Kavita Bina Soche Samjhe
    कविताएँ

    बिना सोचे समझे | Kavita Bina Soche Samjhe

    ByAdmin February 2, 2023February 2, 2023

    बिना सोचे समझे ( Bina soche samjhe )    कहां जा रहे हो किधर को चलें हो बिन सोंचे समझे बढ़े जा रहे हो।   कहीं लक्ष्य से ना भटक तो गये हो ! फिर शान्त के क्यों यहां हम खड़े हो!   न पथ का पता है न मंजिल है मालुम दिक् भर्मित होके…

    Read More बिना सोचे समझे | Kavita Bina Soche SamjheContinue

  • Shatranj par Kavita
    कविताएँ

    शतरंज | Shatranj par Kavita

    ByAdmin February 2, 2023

    शतरंज ( Shatranj )    भारत देश के पुरानें खेलों में से एक यह शतरंज, जिसकी उत्पत्ति यही हुई जिसे कहते थें चतुरंग। लेख व आलेख मिलेंगे जिसके भारतीय ग्रंथों में, आगे चलकर ये चतुरंग खेल कहलाया शतरंज।। पहले जिसको खेला करते थें वो राजा महाराजा, जिसमें भरपूर-बुद्धि का यह प्रयोग किया जाता। उब चुके…

    Read More शतरंज | Shatranj par KavitaContinue

  • Ghazal on Life in Hindi
    शेरो-शायरी

    तुम्हारे पांव की बेड़ी तुम्हें ही काटनी होगी | Ghazal on Life in Hindi

    ByAdmin February 2, 2023

    तुम्हारे पांव की बेड़ी तुम्हें ही काटनी होगी ( Tumhare paon ki bedi tumhen hi katni hogi )   बुजुर्गों के चरण-वंदन में जब तक सर नहीं आते। नये इतिहास रचने के सुखद अवसर नहीं आते मधुर व्यवहार ही कश्ती किनारे तक लगाती है समंदर से तो पत्थर तैरकर बाहर नहीं आते । मजारों पर…

    Read More तुम्हारे पांव की बेड़ी तुम्हें ही काटनी होगी | Ghazal on Life in HindiContinue

  • Kavita Dhalti Jawani
    कविताएँ

    ढ़लती जवानी | Kavita Dhalti Jawani

    ByAdmin February 2, 2023

    ढ़लती जवानी ( Dhalti jawani )    मेंरे भाई अब यह उम्र ढ़लती जा रही है, इन हड्डियों से माॅंस अब कम हो रहा है। ये बाल भी काले रंग से सफ़ेद हो रहें है, टांगों में भी दर्द अब यह शुरु हो रहा है।। अब भागना और दौड़ना दूर की बात है, पैदल चलने…

    Read More ढ़लती जवानी | Kavita Dhalti JawaniContinue

  • Kaan par Kavita
    कविताएँ

    मैं कान हूॅं | Kaan par Kavita

    ByAdmin February 2, 2023

    मैं कान हूॅं ( Main kaan hooain )    हाॅं जनाब मैं कान हूॅं लेकिन आजकल परेशान हूॅं, मेरी समस्याऍं बहुत सारी है इसीलिए मैं हैरान हूॅं। मुझको जिम्मेदारियाॅं सिर्फ सुनने की ही दी गई है, इसीलिए ताली गाली अच्छा बुरा सुनता रहता हूॅं।। मैं अपना दुःख व दर्द किसी को नहीं बता सकता, न…

    Read More मैं कान हूॅं | Kaan par KavitaContinue

  • Geet Vartman mein
    गीत

    वर्तमान में जी नहीं पाया | Geet Vartman mein

    ByAdmin February 2, 2023February 2, 2023

    वर्तमान में जी नहीं पाया ( Vartman mein jee nahin paya )   भविष्य के भंवर में भटका, वर्तमान में जी नहीं पाया। सुख की ठौर रहा ढूंढता, पल भर का भी चैन ना आया। कालचक्र व्यूह जाल में, घटनाक्रम क्या-क्या समाया। जो सच का आभास कराएं, नैनो ने वही भरम बताया। वर्तमान में जी…

    Read More वर्तमान में जी नहीं पाया | Geet Vartman meinContinue

  • Laghu Katha Anpadh charwaha
    कहानियां

    अनपढ़ चरवाहा | Laghu Katha Anpadh charwaha

    ByAdmin February 2, 2023February 2, 2023

    अनपढ़ चरवाहा ( Anpadh charwaha )    “अरे छिगनू काका!” “आप खाना बना रहे हो ?” “यह काम तो घर की औरतों का है, फिर आप क्यों ?” स्कूल से घर जाति प्रिया ने आश्चर्य से पूछा। “बेटा, हम घुमक्कड़ लोग है। हमारा काम गाय, भेड़ और ऊँटों को घूमते हुए पालना व उन्हें बेचकर…

    Read More अनपढ़ चरवाहा | Laghu Katha Anpadh charwahaContinue

  • Vasant Aagman par Kavita
    कविताएँ

    वसंत आगमन | Vasant Aagman par Kavita

    ByAdmin February 1, 2023February 1, 2023

    वसंत आगमन ( Vasant aagman )    कानन कुंडल घूँघर बाल ताम्ब कपोल मदनी चाल मन बसंत तन ज्वाला नज़र डगर डोरे लाल। पनघट पथ ठाढ़े पिया अरण्य नाद धड़के जिया तन तृण तरंगित हुआ करतल मुख ओढ़ लिया। आनन सुर्ख मन हरा उर में आनंद भरा पलकों के पग कांपे घूंघट पट रजत झरा।…

    Read More वसंत आगमन | Vasant Aagman par KavitaContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 503 504 505 506 507 … 832 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search