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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Poem on HIV AIDS in Hindi
    कविताएँ

    एचआईवी और एड्स | Poem on HIV AIDS in Hindi

    ByAdmin December 2, 2022

     एचआईवी और एड्स ( HIV Aur AIDS )   यह घाव ही ऐसा है यार जो कभी‌ भी भरता नही, जिसका ज़ख्म गहरा होता है कभी दिखता नही। नही दवाई लगती ऐसा ख़तरनाक वायरस है यह, लाइलाज़ बीमारी है जिससे पीड़ित व्यक्ति कही।।   जान बूझकर जिसको कोई नियन्त्रण मत दे देना, पुख्ता ईलाज़ नही…

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  • सेवा भक्ति के प्रतीक पुस्तक इंकलाब पब्लिकेशन मुम्बई से हुई लॉन्च
    साहित्यिक गतिविधि

    सेवा भक्ति के प्रतीक पुस्तक इंकलाब पब्लिकेशन मुम्बई से हुई लॉन्च

    ByAdmin December 2, 2022December 2, 2022

    सभी पाठकों को सैनिक/कवि-गणपत लाल उदय अजमेर राजस्थान का सादर वंदन अभिनंदन जयहिंद भारत वर्ष एक विशाल और बहुभाषी देश है यहां अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग पहनावा और अलग-अलग भाषाॅं बोली जाती है अपनें विचार एक दूसरें को बतानें व समझाने के लिए एक ऐसी भाषा की ज़रुरत महसूस हुई जिसको देश और विदेश में अधिक से…

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  • Vandana jain poetry
    कविताएँ

    वो देखो चाँद इठलाता हुआ | Vandana jain poetry

    ByAdmin December 2, 2022

    वो देखो चाँद इठलाता हुआ ( Wo dekho chand ithalata hua ) वो देखो चाँद इठलाता हुआ, वो देखो धरा कसमसाती हुई   प्रेम को दिखाकर भी छुपाती हुई साँस में आस को मिलाती हुई   सुगंध प्रेम की कोमल गुलाब सी स्नेह दीप प्रज्वलित बहाती हुई   नयनों से हर्षित मुस्कानों को अधरों पर…

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  • Geet man ke haare haar hai
    गीत

    मन के हारे हार है | Geet man ke haare haar hai

    ByAdmin December 2, 2022December 3, 2022

    मन के हारे हार है ( Man ke haare haar hai ) मन के हारे हार है नर मन के जीते जीत मनमौजी मनवा फिरे मन उमड़ती प्रित मनमयूरा झूम के नाचे चलती मस्त बयार है बुलंद हौसला उर भर लो मन के हारे हार है मन के हारे हार है मन मुस्काता मन इठलाता…

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  • Hindi chhand kavita
    कविताएँ

    लगन | Hindi chhand kavita

    ByAdmin December 2, 2022

    लगन ( Lagan )  मनहरण घनाक्षरी   मीरा सी लगन लगे, मन में उमंग जगे। प्रेम की तपन कोई, उर मे जगाइए।   मौसम सुहाना छाए, काली घटा घिर आए। मन में लगन जगे, जतन बढ़ाइए।   काम कोई छोटा नहीं, कर्मठ को टोटा नहीं। मेहनत लगन से, शुभ फल पाइए।   आमद अच्छी कमाओ,…

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  • Poem on Jazbaat in Hindi
    कविताएँ

    जज़्बातों की दास्तान | Poem on Jazbaat in Hindi

    ByAdmin December 1, 2022December 1, 2022

    जज़्बातों की दास्तान ( Jazbaaton ki dastaan )   जीवन की आधी रातें सोच-विचार में और आधे दिन बेकार हो गए, जो थे आंचल के पंछी अब हवा के साहूकार हो गए, हर रोज़ कहती है ज़िंदगी मुझसे जाओ तुम तो बेकार हो गए, हम भी ठहरे निरे स्वाभिमानी, लगा ली दिल पर चोट गहरी,…

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  • Sainik par kavita
    कविताएँ

    मैं सैनिक हूँ | Sainik par kavita

    ByAdmin December 1, 2022

    मैं सैनिक हूँ  ( Main sainik hoon )    मैं हूॅं भारतीय  सेना का वीर, आग हवा कांटे चाहें हो नीर। सर्दी गर्मी चाहे वर्षा चले घोर, रखता सदा रायफल सिर मोर।।   चाहें हो जाऍं सुबह से शाम, करता नही कभी में आराम। घुसनें न दूं दुश्मन अपनी और, हो जाऍं  रात  चाहे फिर …

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  • मां बाप बेवजह बदनाम होते है
    कविताएँ

    मां बाप बेवजह बदनाम होते है | Poem dedicated to parents in Hindi

    ByAdmin December 1, 2022

    मां-बाप बेवजह बदनाम होते है ( Maa-baap bewajah badnaam hote hai )      शिक्षा संस्कार देते हमें अंगुली पकड़ सीखलाते हैं। लाड प्यार से पालन करते वो प्रेम सुधा बरसाते हैं। उन्नति मार्ग सदा दिखलाते बीज संस्कारी बोते हैं। भली सीख देते मां-बाप बेवजह बदनाम होते हैं।   संघर्षों से खुद भीड़ जाते शीतल…

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  • मां के आंगन की मिट्टी
    कविताएँ

    मां के आंगन की मिट्टी | Dr. Preeti Parmar Poetry

    ByAdmin December 1, 2022

    मां के आंगन की मिट्टी ( Maan ke aangan ki mitti )    दो पल के लिए मेरे मन उस रास्ते से गुजर जाऊं मां के आंगन की मिट्टी अपने आंचल में भर लाउ मां के आंचल की खुशबू अपनी सांसों में भर लाऊं आम के पेड़ और झूला धमाचौकड़ी का मंजर अपनी आंखों में…

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  • Harivansh Rai Bachchan par kavita
    कविताएँ

    राष्ट्रवादी कवि हरिवंशराय बच्चन | Harivansh Rai Bachchan par kavita

    ByAdmin December 1, 2022December 1, 2022

    राष्ट्रवादी कवि हरिवंशराय बच्चन ( Rashtrawadi kavi harivansh rai bachchan )      हिन्दी साहित्य में जिनका यह आदरणीय स्थान, हरिवंश राय बच्चन है ऐसी शख्सियत का नाम। कई कथाएं कई कविताएं एवं गीतों में योगदान, महान कवियों में लिया जाता है आपका नाम।।   सहज-सरल और उत्साह भरी रचनाएं है अपार, कभी हृदय पीड़ा…

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