Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • “सैनिक की कलम से” पुस्तक का हुआ विमोचन
    साहित्यिक गतिविधि

    “सैनिक की कलम से” पुस्तक का हुआ विमोचन

    ByAdmin December 6, 2022December 6, 2022

    “सैनिक की कलम से” पुस्तक का हुआ विमोचन   छत्तीसगढ़ बीजापुर के भैरमगढ़ फुण्डरी में तैनात केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल की 165 वी वाहिनी के मुख्यालय में नवनिर्मित जवानों के लिए बनाई गई बैरक का उद्घाटन किया गया । इसी के साथ यूनिट  के हेड कांस्टेबल गणपत लाल उदय के द्वारा रचित काव्य संग्रह ”…

    Read More “सैनिक की कलम से” पुस्तक का हुआ विमोचनContinue

  • Dr. Bhim Rao Ambedkar par kavita
    कविताएँ

    वो महामानव | Dr. Bhim Rao Ambedkar par kavita

    ByAdmin December 6, 2022December 6, 2022

    वो महामानव  ( Wo mahamanav )      वन्दन करतें बाबा आपकों हम सब बारम्बार, दिलाया आपनें ही हमें मौलिकता अधिकार। समाजिक शैक्षणिक और आर्थिक अधिकार, समान राजनीति और नागरिक के अधिकार।।   आपनें ही इस प्रजा‌तन्त्र को मजबूती है दिया, मत और मूल्य के तत्वों को प्रस्थापित किया। विद्युत-प्राधिकरण के मार्ग को प्रशस्त किया,…

    Read More वो महामानव | Dr. Bhim Rao Ambedkar par kavitaContinue

  • Kavita gudari ke laal
    कविताएँ

    हम है गुदड़ी के लाल | Kavita gudari ke laal

    ByAdmin December 6, 2022December 6, 2022

    हम है गुदड़ी के लाल ( Hum hai gudari ke laal )     कभी न कभी तो आएंंगे हमारे भी अच्छे दिन, सफलताएं क़दम चूमेगी हमारा भी एक दिन। हम है गुदड़ी के लाल और नाम गणपत लाल, दिखा देंगे कुछ ऐसा करके हम भी एक दिन।।   सर्दी गर्मी बारिश और इस आग…

    Read More हम है गुदड़ी के लाल | Kavita gudari ke laalContinue

  • Kavita baat baat mein algav ki
    कविताएँ

    बात बात में अलगाव की | Kavita baat baat mein algav ki

    ByAdmin December 6, 2022

    बात बात में अलगाव की ( Baat baat mein algav ki )  #JNU बात बात में अलगाव की भाषा बोल रहे हो तुम। शिक्षा के मंदिर में नित,विष को घोल रहे हो तुम।।   कैसी आजादी की तुमने, मांग करी है पढ़ने में। बुद्धि कौशल लगा घूमते, षड़यंत्रों को रचने में।।   आजादी की मांग…

    Read More बात बात में अलगाव की | Kavita baat baat mein algav kiContinue

  • Suryoday par kavita
    कविताएँ

    सूर्योदय | Suryoday par kavita

    ByAdmin December 6, 2022

    सूर्योदय ( Suryoday )   पूरब में छा गई लाली धूप खिली है मतवाली। रश्मि रथ पर हो सवार सूर्योदय छटा निराली।   पंछी कलरव गीत गाते भंवरे मधुबन लहरी गाई। भोर की बेला मुस्काती सूर्योदय हुआ जागो भाई।   सूरज किरणें धरती छाई शुभ प्रभात बेला आई। हरियाली ने पांव पसारे मधुर मधुर बही…

    Read More सूर्योदय | Suryoday par kavitaContinue

  • Kavita jeet ki aadat
    कविताएँ

    जीत की आदत | Kavita jeet ki aadat

    ByAdmin December 5, 2022

    जीत की आदत  ( Jeet ki aadat )  जीत की आदत बनाना ही होगा, ना करें बहाना आगे बढ़ना होगा। झूल रहीं उनकी मझधार में नैया, जो परेशानियों से घबराया होगा।।   जीतने का‌ जज़्बा रहता सब को, जीत लेते है जो पक्के ‌ठान लेते। सो बातों की है यह एक ही बात, निड़र होकर…

    Read More जीत की आदत | Kavita jeet ki aadatContinue

  • Kavita purani pension bahal karo
    कविताएँ

    पुरानी पेंशन बहाल करो | Kavita purani pension bahal karo

    ByAdmin December 5, 2022December 5, 2022

    पुरानी पेंशन बहाल करो ( Purani pension bahal karo )   हर मुफलिस का देखो कलम सिपाही हूँ, मैं भी नंगी- पगडंडी का राही हूँ। जीवन जीने का मेरा अपना वसूल है, जो बातें सही नहीं लगती, फिजूल हैं। लोकतंत्र के पिलर तोड़े जाते हैं, औरों के सिर ठिकरे फोड़े जाते हैं। महज तालियों से…

    Read More पुरानी पेंशन बहाल करो | Kavita purani pension bahal karoContinue

  • Poem in Hindi on thand
    कविताएँ

    ठंड का प्रभाव | Poem in Hindi on thand

    ByAdmin December 5, 2022December 5, 2022

    ठंड का प्रभाव ( Thand ka prabhav )    सुनो ठण्ड दुष्कर हो रहा है तुम्हे सहन कर पाना सूर्य तापमान का गिरना और देह का कंपकंपाना   सुनसान हैं सभी सड़कें और धुंध हर तरफ है छाई अपने आकर्षण से बहुत लुभा रही है यह गर्म रजाई   कभी  नर्म, कभी कड़क धूप का…

    Read More ठंड का प्रभाव | Poem in Hindi on thandContinue

  • Kavita sab kathputli hai ishwar ki
    कविताएँ

    सब कठपुतली है ईश्वर की | Kavita sab kathputli hai ishwar ki

    ByAdmin December 5, 2022December 5, 2022

    सब कठपुतली है ईश्वर की  ( Sab kathputli hai ishwar ki )    हम कठपुतली सब ईश्वर की, उसी परमपिता-परमेश्वर की। जैसे नाच-नचाऐ हम सबको, फ़ितरत है यही  खिलौने की।।   सदा चारों तरफा प्रकाश तेरा, हर फूल-पत्तों में यह रंग तेरा। जैसे नाच नचाऐ  हम-सबको, जन्म व मरण यही खेल तेरा।।   ईश्वर खिलाड़ी,…

    Read More सब कठपुतली है ईश्वर की | Kavita sab kathputli hai ishwar kiContinue

  • Aarzoo par muktak
    मुक्तक

    आरजू | Aarzoo par muktak

    ByAdmin December 4, 2022

    आरजू ( Aarzoo )    एक आरजू एक तमन्ना एक मेरी अभिलाषा। अटल रहूं सीमा पे धर रण कौशल की भाषा। जोश जज्बा रग-रग में हौसला है भरपूर मेरा। तिरंगा की शान में झुका ले हम शीश जरा सा। अरि दल से लोहा लेने को भीड़ जाते तूफां से। तपन धरा की ओज भरती बतियाती…

    Read More आरजू | Aarzoo par muktakContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 532 533 534 535 536 … 832 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search