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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Insan ki pehchan
    कविताएँ

    इंसान की पहचान | Insan ki pehchan | Kavita

    ByAdmin July 5, 2022

    इंसान की पहचान ( Insan ki pehchan )   इंसान की पहचान, मानव रे जरा जान। औरों के दुख दर्द की, परवाह कीजिए।   मानव धर्म जान लो, कर्म को पहचान लो। इंसानियत ही धर्म, शुभ कर्म कीजिए।   करुणा प्रेम बरसे, हृदय सारे हरसे। होठों पे हंसी सबको, मुस्काने भी दीजिए।   दुख दर्द…

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  • Sach kamjor ho raha hai
    कविताएँ

    सच कमजोर हो रहा है | Sach kamjor ho raha hai

    ByAdmin July 4, 2022

    सच कमजोर हो रहा है ( Sach kamjor ho raha hai )   सच में , सच कमजोर हो रहा है । झूठ का ही चारो तरफ शोर हो रहा है।।   कदम कदम पर लोग खूब झूठ बोले झूठ और लूट में ईमान सबका डोले। सच का किसे ज्ञान है, झूठ का ही ध्यान…

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  • Zaroori to nahin
    शेरो-शायरी

    ज़रूरी तो नहीं | Zaroori to nahin

    ByAdmin July 4, 2022

    ज़रूरी तो नहीं ( Zaroori to nahin )   हर जज्बात एहसास दिलाये हर एहसास को अल्फाज़ मिल जाये उन अल्फाज़ों  को ज़बां मिल जाये हर ज़बां कुछ कह पाये बस तलबगारी है महज़ इक निगाह की जो किताब-ए-दिल के हर सादा,स्याह पन्ना भी पढ़ जाये.   लेखिका :- Suneet Sood Grover अमृतसर ( पंजाब )…

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  • Yoga par kavita
    कविताएँ

    योग विश्व को भारत की देन | Yoga par kavita

    ByAdmin July 4, 2022

    योग विश्व को भारत की देन ( Yoga vishwa ko bharat ki den )   योगी ऋषि-मुनियों ने, जग को योग सिखाया। तपस्या के दम पर, योग शिक्षा दे गए।   अपना भारत देश, दुनिया में है विशेष। संसार को योग शिक्षा, योगी संत दे गए।   अनुलोम विलोम हो, प्राणायाम आसन हो। स्वस्थ तन…

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  • Mai Sher Singh Saraf
    कविताएँ

    मै शेरसिंह सर्राफ | साहित्यिक परिचय

    ByAdmin July 4, 2022

    मै शेरसिंह सर्राफ ( Mai Sher Singh Saraf )   इक परिचय मेरा भी सुन लो, शब्द मेरे है साफ। लिखता हूँ खुद से खुद को मै, शेर सिंह सर्राफ। … बचपन बीता यौवन भी अब, मै हूँ चालीस पार। लेखन मे डूबा रहता मै, इससे ही मुझको प्यार। …. पाँच जुलाई का दिन था…

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  • Alsai si lalchai si
    कविताएँ

    अलसायी सी ललचाई सी | Alsai si lalchai si | Kavita

    ByAdmin July 4, 2022

    अलसायी सी ललचाई सी  ( Alsai si lalchai si )   अलसायी सी ललचाई सी, दंतों से अधर दबायी सी। सकुचाई सी शरमाई सी, मनभाव कई दर्शायी सी।   घट केशु खोल मनभायी सी,अकुलाई सी बलखाई सी। चुपचाप मगर नयनों से वो, रस रंग भाव भडकायी सी।   थम के चले गजगामिनी सी,सौंदर्य निखर के…

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  • Zulm ki inteha
    छंद

    जुल्म की इंतेहा | Zulm ki inteha | Chhand

    ByAdmin July 4, 2022October 12, 2022

    जुल्म की इंतेहा ( Zulm ki inteha )   मनहरण घनाक्षरी   जुल्मों सितम ढहाए, नयनों में नीर लाए। बेदर्दी लोग जुलमी, दिल को जला गए।   पत्थर दिल वो सारे, जिनके नखरे न्यारे। अपना बनाके हमें, आंसू वो रुला गए।   जुल्म की इंतेहा हुई, कहर मत ढहाओ। इंसान हो इंसान से, दूरियां वो…

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  • वृद्धाश्रम
    छंद

    वृद्धाश्रम | Bridhashram Chhand

    ByAdmin July 4, 2022January 28, 2023

    वृद्धाश्रम ( Bridhashram )   मनहरण घनाक्षरी   पावन सा तीर्थ स्थल, अनुभवों का खजाना। बुजुर्गों का आश्रय है, वृद्धाश्रम आइए।   बुजुर्ग माता-पिता को, सुत दिखाते नयन। वटवृक्ष सी वो छाया, कभी ना सताइए।   हिल मिलकर सभी, करें सबका सम्मान। वृद्धाश्रम में प्रेम के, प्रसून खिलाइए।   जीवन के अनुभव, ज्ञान का सागर…

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  • Jeevan sansay
    कविताएँ

    जीवन संसय | Jeevan sansay

    ByAdmin July 3, 2022

    जीवन संसय ( Jeevan sansay )   जन्म की पीड़ मिटी ना प्यास बुझी, इस नश्वर तन से। अभी भी लिपटा है मन मेरा, मोह में मोक्ष को तज के।   बार बार जन्मा धरती पर, तृष्णा में लिपटी है काया। उतना ही उलझा हैं उसमें, जितना ही चाहे हैं माया।   भय बाधा को…

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  • Itni si kami hai
    शेरो-शायरी

    इतनी सी कमीं है | Itni si kami hai

    ByAdmin July 3, 2022

    इतनी सी कमीं है ( Itni si kami hai )   पत्थर  सा  नही  हूँ  मैं मुझमे भी नमीं हैं। बस दर्द बया कर देता हूँ इतनी सी कमी हैं।   तुमने का समझ लिया मुझको मैं जान न पाया। हैं प्यार भरा दिल मेरा जिसपर मोंम जमीं हैं।   संगेमरमर नही बना पर, खालिस…

    Read More इतनी सी कमीं है | Itni si kami haiContinue

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