• मकरसंक्रांति का उल्लास

    मकरसंक्रांति का उल्लास सोचा था इस बार तेरे संग पतंग उड़ाऊं,तेरे हाथों से डोर थाम, सपनों को आसमान में ले जाऊं।आसमान संग हमारी खुशी को मैं जीता जाऊं,तेरे साथ हर पल को मैं सजीव बनाऊं। सूरज की किरणों में तेरी मुस्कान को पाऊं,तेरी हंसी की मिठास से, मैं दिन को सजाऊं।दिल की रोशनी से हमारा…

  • मकर संक्रांति : जीवंत रीति-रिवाजों और परंपराओं से सजा उल्लास का पर्व

    हिंदू महाकाव्य महाभारत में मकर संक्रांति से जुड़े माघ मेले का उल्लेख है। हर बारह वर्ष बाद मकर संक्रांति पर कुंभ मेला आयोजित होता है, जो विश्व के सबसे बड़े सामूहिक तीर्थस्थलों में से एक है, जिसमें लाखों लोग आते हैं। संक्रांति को एक ऐसे देवता के रूप में पूजा जाता है, जिन्होंने, किंवदंतियों के…

  • जाऊँ क्यों मैं घूमने

    जाऊँ क्यों मैं घूमने ( कुण्डलिया ) जाऊँ क्यों मैं घूमने, सारे तीरथ धाम।कण-कण में हैं जब बसे, मेरे प्रभु श्री राम। मेरे प्रभु श्री राम, बहुत हैं मन के भोले।खाये जूठे बेर, बिना शबरी से बोले। सच्ची हो जो प्रीत, हृदय में तुमको पाऊँ।तुम्हें ढूंढने और, कहीं मैं क्यों कर जाऊँ। डाॅ ममता सिंहमुरादाबाद…

  • राष्ट्रीय युवा दिवस : स्वामी विवेकानंद

    राष्ट्रीय युवा दिवस : स्वामी विवेकानंद स्वामी विवेकानंद महान।सब करते उनका सम्मान।।यह युवा दिवस उनके नाम।हिंदुस्तान की थे वो शान।। देश की संस्कृति को बचाया।हिंदुस्तान का मान बढ़ाया।।सच रहा पर वो सदा चले।ज्ञान का पाठ सबको पढ़ाया।। गरीब की मदद करो बताया।दिलों में देश का प्रेम जगाया।।प्यार स्वामी विवेकानंद जी ने।देश हित मार्ग सबको दिखाया।।…

  • मकर संक्रान्ति

    मकर संक्रान्ति मकर संक्रान्ति पर्व परहमारे जीवन में नवचिन्तन का सृजन होंऔर आशा हमारे जीवन केहर पल को उत्साह से भरती जायें ।क्योंकि सकारात्मक जीवनव चिंतन का अपना एकअलग ही आनंद और उत्साह है,इससे दुःख की धारा का प्रवाहस्वतः ही पड़ जाता मंद है ।मरना सिर्फ एक ही दिन परजीने के दिन तो अनेक है,सत्य…

  • जुगनू दुबक रहे होंगे

    जुगनू दुबक रहे होंगे ये सर्द रात है जुगनू दुबक रहे होंगेहज़ारों दिल के दरीचे खटक रहे होंगे मुझे यक़ीन है महफ़िल में उनके आते हीहरिक निगाह में वो ही चमक रहे होंगे मैं सोचता हूँ हटा दूँ हया के पर्दों कोवो मारे शर्म के शायद झिझक रहे होंगे नज़र के तीर से जो ज़ख़्म…

  • देश पाल सिंह राघव ‘वाचाल’ की कविताएं | Deshpal Singh Poetry

    क्या हुआ आजतक जो भी किए वादों का क्या हुआसंग में चलने के इरादों का क्या हुआ उठ गए उस शाम काँधे से झटक के सरखट्टी-मीठी उन सभी यादों का क्या हुआ जिनके बहकावे में आकर रूठ गए थेआड़े-टेढ़े उन सभी प्यादों का क्या हुआ अल्लाह के दरबार में मांगी थीं जो कभीउन दुआओं और…

  • युवा शक्ति की प्रेरणा

    युवा शक्ति की प्रेरणा विश्व पटल पर आपसे, बढ़ा देश का मान।युवा विवेकानंद थे, भारत का अभिमान॥ युवा विवेकानन्द नें, दी अद्भुत पहचान।युवा शक्ति की प्रेरणा, करे विश्व गुणगान॥ जाकर देश विदेश में, दिया यही संदेश।धर्म, कर्म अध्यात्म का, मेरा भारत देश॥ अखिल विश्व में है किया, हिन्दी का उत्कर्ष।हिंदी भाषा श्रेष्ठ है, है गौरव,…

  • खोज रहे मकरंद

    खोज रहे मकरंद कवित्त (मनहरन घनाक्षरी) कैसा ये अजीब रोग,कैसे मतिमारे लोग।दुष्ट मांसाहार भोग,ढूंढ़ रहे गैया में। मुस्कुरा के मंद-मंद,गढ़ रहे व्यर्थ छंद।खोज रहे मकरंद,ग़ैर की लुगैया में। रहा नहीं दया-धर्म,बेच खाई हया-शर्म।डूबने के हेतु कर्म,पोखरी तलैया में। आफ़तों से खेल रहे,मुसीबतें झेल रहे।ख़ुद को धकेल रहे,शनि जी की ढैया में। देशपाल सिंह राघव ‘वाचाल’गुरुग्राम…

  • मुझे अपने काबिल बना ज़िन्दगी

    मुझे अपने काबिल बना ज़िन्दगी मुझे अपने काबिल बना ज़िन्दगीनहीं ऐसे ठोकर लगा ज़िन्दगी हमें भी तो जीना सिखा ज़िन्दगीनई राह कोई दिखा ज़िन्दगी किसी रोज़ उनसे मिला ज़िन्दगीपता उनका मुझको दिला ज़िन्दगी बने बुत हैं बैठे मेरे ईश तोउन्हें हाल मेरा सुना ज़िन्दगी मिली ही नही है जिसे छाँव कलउसे धूप से मत डरा…