Kavita mausam suhana hai

मौसम सुहाना है मधुबन खिल सा जाए | Kavita mausam suhana hai

मौसम सुहाना है मधुबन खिल सा जाए

( Mausam suhana hai madhuban khil sa jae )

 

मौसम सुहाना है मधुबन खिल सा जाए
बरसे प्रेम सलोना वादियां भी महक जाए
चल कहीं दूर निकल जाए

 

मन की उमंगे सारी प्रीत की वो बातें प्यारी
कितने हंसी वो लम्हे सुहानी वो यादें हमारी
चंचल चितवन सी प्यारी सी भोर आए
खिल उठे मन मेरा बस तेरा साथ भाये
चल कहीं दूर निकल जाए

 

खिलता मुस्काता चेहरा जीने की राह दिखाएं
प्रीत तराने मधुर सुहाने गीत मन मेरा भी गाये
दिल के तार जुड़े हमारे आओ नेह बरसाए
जीवन की राहों में हम चमन कोई महकाए
चल कहीं दूर निकल जाए

 

मुस्कानों के मोती बांटे हंसकर सबसे बात करें
बहती रहे प्रेम गंगा मेहनत हम दिन रात करें
आओ रच दे नीड नया जीवन में बहारें आए
महकती वादियों में हम प्रीत भरे नगमे गाए
चल कहीं दूर निकल जाएं

 

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कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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