Kavita dabe pair

दबे पैर | Kavita dabe pair

दबे पैर

( Dabe pair )

 

वो दबे पैर अंदर आयी

जैसे बंद कमरों में ठंड की एक लहर चुपके से आ जाया करती है

और बदल गयी सारे रंग मेरे जीवन के,

जैसे पहली बारिश धरा को बदल ज़ाया करती है

अंकुर फूटे भावनाओं के

और मदिरा सी मस्ती छा गयी

कुछ ना देख सका उसके बाद

जब वो दबे पैर अंदर आ गयी ।

 

 

लेखक : समीर डोंगरे
रायपुर (छत्तीसगढ़)

यह भी पढ़ें :-

गुलमोहर | Hindi sahitya ki rachna

Similar Posts

  • जीवन की सत्यता | Jeevan ki Satyata

    जीवन की सत्यता ( Jeevan ki satyata )    सतत ओस के झरते कण दिखाई तो नही देते पर,बना देते हैं महा सागर को जैसे ऐसे ही कर्म के प्रवाह मे दुआओं बद्दुआओं के स्वर किसी को मार देते हैं बेमौत तो किसी को अमर बना देते हैं… अलौकिक भाषा और संकेत सूक्ष्म एहसास ही…

  • यह मेरा हिंदुस्तान है | Hindi Poetry

    यह मेरा हिंदुस्तान है ( Yah mera hindustan hai )   यह मेरा हिंदुस्तान है, यह मेरा हिंदुस्तान है। ध्वज तिरंगा हाथों में, ले राष्ट्रगीत गाते हैं।   सरहद के सिपाही, सीमा के सभी जवान। आंधी तूफानों से भिड़, आगे बढ़ते जाते हैं।   कूद पड़े मैदानों में, धरती मां के लाडले। बलिदानी राहों पर,…

  • मोदी जी को लाएंगे | Poem in Hindi on Modi Ji

    मोदी जी को लाएंगे ( Modi ji ko layenge )   हम तो शोर मचाएंगे झूमें नाचे और गाएंगे मोदीजी को लाएंगे हम मोदीजी को लाएंगे   अधिनायक हमारे वो जन-जन भाग्य सितारे वो सबकी आंखों के तारे मोदी हम सबके प्यारे वो   ऐसी धूम मचाएंगे जन-जन को दिखलाएंगे मोदीजी को लाएंगे हम मोदीजी…

  • सिंदूर दान

    सिंदूर दान   रक्त वर्ण सुवर्ण भाल कपाल का श्रृंगार है यह। ये मेरा सिंदूर है भरपूर है संस्कार है यह।।   तुम न होते मैं न होती कौन होता, फिर जगत में कुछ न रहता शून्य होता, पर हमारे प्रणय पथ के प्रण का मूलाधार है यह।।ये मेरा०   सप्तफेरी प्रतिज्ञा जब प्रकृति में…

  • ईद का चांद | Eid ka Chand

    ईद का चांद ( Eid ka chand )   देखते   ही   तुझको , तुझसे  प्यार  हो  गया ऐसा  लगा   कि   जैसे   चमत्कार   हो  गया   जन्नत  की  हूर  सी  लगी  उतरी है  चांद सी समझा  कि  ईद-ए-चांद  का  दीदार हो गया   जुल्फों  के  बीच  खिलखिलाने को क्या कहूं…

  • राजा रंक सभी फल ढोते | Kavita Raja Runk

    राजा रंक सभी फल ढ़ोते ( Raja runk sabhi phal dhote )    राजा रंक सभी फल ढ़ोते,  होता कर्ज़ चुकाना।  कर्मों के अनुसार जीव को, पड़े दंड भुगताना।। मानव दानव पशु पक्षी बन,  इस धरती पर आता।  सत पथ गामी मंच दिया है,  बिरला नर तर पाता। कोई जीवन सफल बनाता,  ले जाता नजराना।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *