• चाहत | Poem chaahat

    चाहत ( Chaahat )   हम हैं तेरे चाहने वाले, मन के भोले भाले। रखते है बस प्रेम हृदय में, प्रेम ही चाहने वाले।   माँगे ना अधिकार कोई,ना माँगे धन और दौलत। प्रेम के संग सम्मान चाहने, वाले हम मतवाले।   हम राधा के विरह गीत है, हम मीरा के भजनों में। हम शबरी…

  • पुस्तकों की पीर | Geet pustakon ke peer

    पुस्तकों की पीर ( Pustakon ke peer )   कंप्यूटर क्या कहर ढा रहा मोबाइल मुस्काता है। अलमारी में पड़ी किताबों को बहुत धमकाता है। इतने सारे चैनल हुये पाठक सारे दर्शक हो गए। टीवी परोसता सीरियल पुस्तक प्रेमी कहीं खो गए। कलमकार लाइव चले ऑनलाइन हुआ चलन है। पुस्तकों का दम घुट रहा किताबे…

  • बिन्दु | Kavita bindu

    बिन्दु ( Bindu )   ग्रह नक्षत्र योग कला विकला दिग्दिगन्त हैं। बिन्दु मे विलीन होते आदि और अंत हैं।। अण्डज पिण्डज स्वेदज उद्भिज्ज सृजाया है, बिंदु में नित रमण करें ब्रह्म जीव माया है। सकल महाद्वीप महासिंन्धु श्रृंग गर्त न्यारे, अपरिमित निराकार चिन्मय स्वरूप प्यारे।। त्रिगुणी प्रकृति ग्रीष्म शीत पावस बसंत हैं।। बिन्दु में०।।…

  • मुझको कोई फ़िक्र नहीं है | Poem mujhko koi fikar nahi hai

    मुझको कोई फ़िक्र नहीं है ( Mujhko koi fikar nahi hai )     मुझको कोई फ़िक्र नहीं है , रंजो गम से दूर हूँ नींदें  भी  हैं  कनीज  मेरी , मैं मस्ती में चूर हूँ   देखके मुझको , दुनिया वाले , हौले से मुस्काते हैं राज नहीं मैं जान सका , बदनाम हूँ…

  • मैं मजदूर हूं | Kavita main majdoor hun

    मैं मजदूर हूं ( Main majdoor hun )   मैं मजदूर हूं ,मैं मजदूर हूं रोटी रोजी के खातिर घर से कितनी दूर हूं   मेहनत करना मेरा काम भाग्य में लिखा कहां आराम सेवाश्रम में चूर हूं ,मैं मजदूर हूं   पेट की भूख मिटाने को घर का काम चलाने को पैसे से मजबूर…

  • हंसना मना है | Kavita hasna mana hai

    हंसना मना है ( Hasna mana hai )   मोबाइल टीवी चलाओ चाहे कूलर की हवा खाओ बाहर धूप में मत जाओ सच कहता हूं मान जाओ   हजारों बीमारियां है वातावरण कुछ ऐसा बना है मेरी तो बस राय यही समझो देखो हंसना मना है   बैठे-बैठे संगीत सुनलो ताना-बाना कोई बुन लो लेखक…

  • धरती | Muktak dharti

    धरती ( Dharti )   धरा मुस्कुराई गगन मुस्कुराया। खिल गए चेहरे चमन हरसाया। बहती बहारों में खुशबू यू आई। धरती पर चांद उतरकर आया।   धरती अंबर चांद सितारे। हिल मिलकर रहते सारे। वीर तिलक करके माटी का। पूजे माता चरण तुम्हारे।   कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन नवलगढ़ जिला झुंझुनू ( राजस्थान ) यह…

  • मजदूर | Poem mazdoor

    मजदूर ( Mazdoor ) मजदूर दिवस पर रचना   मुश्किल से टकराता है मेहनत को वो अपनाता है गरम तवे की रोटी खातिर परदेस तलक वो जाता है   हाथों का हुनर रखता है वो महल अटारी करने को खून पसीना बहा देता पेट परिवार का भरने को   मजदूर आज मजबूर हुआ महंगाई की…

  • आमा | Aama

    आमा ( Aama ) ‌ ‌। सम्पूर्ण आमाहरु मा समर्पित। ।   आमा त्यि ‌झ्याल हुन्, जसबाट एक अबोध शिशुले पहिलो पटक दुनियालाई हेर्छ। शिशु आमाको त्यो अंश हो,‌ जुन आमाको स्वांस नली देखी हृदय हुदै जिवनको केन्द्र सम्म पुग्छ। आमा मातृत्वको अभिरुप मात्रै नभइकन शिशुको जिवन स्वरुप पनि हो। आमा प्रकृतिका त्यि बरदान हुन्,…

  • हंसना भी छोड़ दी मैंने | Poem hansana bhi chhod di maine

    हंसना भी छोड़ दी मैंने ( Hansana bhi chhod di maine )   1. हँसना भी छोड़ दी हँसना भी छोड़ दी मैने, रोना भी छोड़ दी मैने। कैसे कटेगी जिन्दगी, कहना भी छोड़ दी मैने। जिसको बनाया अपना मैने,उसके भी फायदे रहे, जा जिन्दगी तुमे अपना,कहना भी छोड़ दी मैने।   2. उसको खबर…