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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Muktak Maa
    मुक्तक

    मुक्तक मां | Muktak Maa

    ByAdmin April 25, 2022December 3, 2022

    मुक्तक मां ( Muktak Maa)   मां की तरफ़ से सुन लो ये पैगाम आया है उसी पैग़ाम पर यारों हमारा नाम आया है, लिखूंगा मैं वतन ख़ातिर वतन पर जान दे दूंगा, वतन के ही हिफ़ाजत का मुझे ये काम आया है।   झूठ का मै दम दिखाना चाहता हूं, सबके दिल का गम…

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  • Poem oj bhari lalkar
    कविताएँ

    ओज भरी ललकार | Poem oj bhari lalkar

    ByAdmin April 24, 2022

    ओज भरी ललकार (Oj bhari lalkar )   ढूंढता रहा हूं सारी दुनिया क्या मेरा वजूद है। आग का दरिया दहकता धधकती बारूद है।   ओज भरी हुंकार कहूं या जलती हुई मशाल। देशभक्त मतवाला कह दो लेखक बेमिसाल।   लेखनी दीपक ले अंधकार मिटाया करता हूं। राष्ट्रधारा में रणवीरों के गीत गाया करता हूं।…

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  • Chhand jeth ki garmi
    छंद

    जेठ की गर्मी | Chhand jeth ki garmi

    ByAdmin April 24, 2022October 12, 2022

    जेठ की गर्मी ( Jeth ki garmi ) मनहरण घनाक्षरी     चिलचिलाती धूप में, अंगारे बरस रहे। जेठ की दुपहरी में, बाहर ना जाइये।   गर्मी से बेहाल सब, सूरज उगले आग। तप रही धरा सारी, खुद को बचाइये।   त्राहि-त्राहि मच रही, प्रचंड गर्मी की मार। नींबू पानी शरबत, सबको पिलाइये।   ठंडी…

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  • Poem jeete jee mar jana
    कविताएँ

    जीते जी मर जाना | Poem jeete jee mar jana

    ByAdmin April 24, 2022

    जीते जी मर जाना ( Jeete jee mar jana )   मजबूरियों में ना जीना साहस तो दिखलाना। जिंदगी के सफर में प्यारे एक मुकाम बनाना।   मेहनत के दम से बढ़ना हाथ ना फैलाना। मांगन मरण समान है जीते जी मर जाना।   सेवा संस्कार बड़े सबका आदर सत्कार करो। बड़ों की सेवा करके…

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  • Poem pustake gyan ka bhandar
    कविताएँ

    पुस्तके ज्ञान का भंडार | Poem pustake gyan ka bhandar

    ByAdmin April 24, 2022

    पुस्तके ज्ञान का भंडार ( Pustake gyan ka bhandar )   बुद्धि दायिनी पुस्तकें सन्मार्ग दिखलाती है। अथाह ज्ञान सागर है दिव्य ज्योत जगाती है।   प्रगति पथ को ले जाती सफलता दिलाती। कला कौशल हूनर मानव को सीखलाती।   ज्ञान गुणों की खान है ग्रंथों का सुंदर रूप। आलोकित जीवन हो मंजिल मिले सरूप।…

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  • Dosti shayari
    शेरो-शायरी

    वफ़ा से निभाता रहा दोस्ती को | Dosti shayari

    ByAdmin April 23, 2022

    वफ़ा से निभाता रहा दोस्ती को ! ( Wafa se nibhata raha dosti ko )     वफ़ा से निभाता रहा दोस्ती को ! बहुत ही उसी ने छला दोस्ती को   वफ़ा करते करते जफ़ा सह गये है मगर क्या मिला है सिला दोस्ती को   सलामत रहे ये हमेशा वफ़ा से दे ऐसी…

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  • Poem bujurgon ka samman
    कविताएँ

    बड़े बुजुर्गों का सम्मान जरूरी है | Poem bujurgon ka samman

    ByAdmin April 23, 2022

    बड़े बुजुर्गों का सम्मान जरूरी है ( Bade bujurgon ka samman jaruri hai )     बड़े   बुजुर्गों   का   सम्मान     जरूरी   है, दिल  में   पलते   भी  अरमान   ज़रूरी है,   यार अंधेरों  का  साया  है   जिस   घर  में, उस  घर   में  भी   रोशनदान    ज़रूरी  है,   बाप  की  पगड़ी  बच्चों  ने नीलाम किया, एक  पिता  …

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  • kundaliya chhand
    छंद

    सूर्य अस्त होने लगा | कुण्डलिया छंद | Kundaliya chhand ka udaharan

    ByAdmin April 23, 2022November 1, 2022

    सूर्य अस्त होने लगा ( Surya ast hone laga )   सूर्य अस्त होने लगा, मन मे जगे श्रृंगार। अब तो सजनी आन मिल, प्रेम करे उदगार।। प्रेम करे उदगार, रात को नींद न आए। शेर हृदय की प्यास, छलक कर बाहर आए।। आ मिल ले इक बार, रात्रि जब पहुचे अर्ध्य। यौवन ऐसे खिले,…

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  • Kal ek phool isi ghutan mein mar gaya
    मुक्तक

    मुक्तक : कल एक फूल इसी घुटन में मर गया

    ByAdmin April 22, 2022December 3, 2022

     कल एक फूल इसी घुटन में मर गया ( Kal ek phool isi ghutan mein mar gaya )   कल इक फूल इसी घुटन में मर गया, कि उसका भँवरा उससे रूठ गया, वो मरकर यही शिकायत करता रहा.. कि मेरा मुकद्दर ही मुझसे रूठ गया ।   सम्मुख शिकायत करूं तो हिदायत है, पीठ…

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  • Poem tum mat rona priye
    कविताएँ

    तुम मत रोना प्रिय | Poem tum mat rona priye

    ByAdmin April 22, 2022

    तुम मत रोना प्रिय ( Tum mat rona priye )   तुम मत रोना प्रिय मेरे, यह तेरा काम नही है। जिससे मन मेरा लागा, मोरा घनश्याम वही है।।   जो राधा का है मोहन, मीरा का नटवर नागर। वो एक रसिक इस जग का, मेरा मन झलकत गागर।।   शबरी की बेरी में दिखे…

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