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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • मुहब्बत की ख़ुशबू से मन भरा है
    शेरो-शायरी

    Hindi Ghazal on love | मुहब्बत की ख़ुशबू से मन भरा है

    ByAdmin April 9, 2021April 15, 2021

    मुहब्बत की ख़ुशबू से मन भरा है ( Muhabbat KI  Khushboo Se Man Bhara Hai )     मुहब्बत की ख़ुशबू से मन भरा है! गुलाबी फ़ूल मन में खिल रहा है   मुहब्बत में हुआ घायल मैं ऐसा किसी की तीर आंखों का चला है   रहा वो ग़ैर बनकर रोज़ मुझसे हंसी चेहरा…

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  • डोर
    कविताएँ

    डोर | hindi poem on life

    ByAdmin April 9, 2021April 12, 2021

    डोर ( Dor ) रंग बिरंगी पतंग सरीखी, उड़ना चाहूं मैं आकाश। डोर प्रिये तुम थामे रखना, जग पर नहीं है अब विश्वास।।   समय कठिन चहुं ओर अंधेरा, घात लगाए बैठा बाज़। दिनकर दिया दिखाये फिर भी, खुलता नहीं निशा का राज।।   रंगे सियार सरीखे ओढ़े, चम चम चमके मैली चादर। पा जायें…

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  • सीख दे गई
    कविताएँ

    सीख दे गई | Kavita Seekh

    ByAdmin April 9, 2021February 9, 2023

    सीख दे गई (Seekh De Gayi ) सूखी टहनी उड़ आई मेरे पास थी उसे कुछ कहनी बोली मुझे न काटा कर जरूरत भर मांग लिया कर मैं खुशी खुशी दे दूंगी नहीं हूं बहरी गूंगी सुनती हूं सब कुछ देखती हूं तेरे व्यवहार सहकर तेरे अत्याचार भी कुछ कहती नहीं इसका क्या मतलब दोगे…

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  • शीशा-ए-दिल पे जमी है धूल शायद
    शेरो-शायरी

    शीशा-ए-दिल पे जमी है धूल शायद | Ghazal on love

    ByAdmin April 8, 2021April 12, 2021

    शीशा-ए-दिल पे जमी है धूल शायद ( Shisha-e-Dil Pe Jami Hai Dhool Shayad )   शीशा-ए-दिल पे जमी है धूल शायद। देखने  में  हो  रही  है  भूल शायद।।   आरजू होती नहीं सब दिल की पूरी। हर दुआ होती नहीं मक़बूल शायद।।   एक साया-सा नज़र आया है हम को। दूर  अब  तो  है नही…

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  • चांद पर जमीन
    कविताएँ

    चांद पर जमीन | Hindi Kaita on Nature

    ByAdmin April 8, 2021October 23, 2024

    चांद पर जमीन ( Chand Par Zameen ) चचा ! बिकने लगा है चांद पर जमीन लोग खरीदने भी लगे हैं। जाकर देखा नहीं वहां, नीचे से तो दिखता है बस आसमां; अखबार में पढ़ा। पढ़ खरीदने का ख्याल मन में आया, चचा के दरबार में भागते चला आया। कुछ मशविरा दीजिए, लीजिए अखबार आप…

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  • दें गयी इश्क़ में मात वो
    शेरो-शायरी

    दें गयी इश्क़ में मात वो | Shayari Ishq mein

    ByAdmin April 8, 2021February 9, 2023

    दें गयी इश्क़ में मात वो ( De Gayi Ishq Mein Maat Wo )   दें  गयी  इश्क़  में मात वो कह गयी कुछ ऐसी बात वो   आज वो हो रही ख़ुश बहुत छेड़कर दिल के नग्मात वो   अनसुना  करती  रहा  रोज़ ही कब समझें दिल के जज्बात वो   जो  नहीं  यार …

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  • फ़लक से क़मर को उतारा कहाँ है
    ग़ज़ल

    फ़लक से क़मर को उतारा कहाँ है || Hindi Ghazal on Life

    ByAdmin April 8, 2021August 2, 2024

    फ़लक से क़मर को उतारा कहाँ है ( Falak Se Kamar Ko Utara Kahan Hai )   फ़लक से क़मर को उतारा कहाँ है अभी उसने ख़ुद को सँवारा कहाँ है उदासी में डूबी है तारों की महफ़िल बिना  चाँद  के ख़ुश नज़ारा कहाँ है हुआ जा रहा है फ़िदा दिल उसी पर अभी  हमने…

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  • फूलों का रंग रखिए,बरकरार हमेशा
    शेरो-शायरी

    फूलों का रंग रखिए,बरकरार हमेशा || hindi ghazal on nature

    ByAdmin April 8, 2021April 12, 2021

    फूलों का रंग रखिए,बरकरार हमेशा ( Phoolon Ka Rang Rakhiye, Barkarar Hamesha )   फूलों  का  रंग  रखिए, बरकरार हमेशा। इस वास्ते गुलशन से करें,प्यार हमेशा।   कौन मौज में यहां, है मुफलिसी में कौन, यही  जानने  को पढ़िए,अखबार हमेशा।   जिसके ज़िगर में हौसलों का रंग नहीं है। वो  शख्स  ही  बदरंग है, लाचार…

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  • कन्या और दान
    कविताएँ

    कन्या और दान | shadi poem in hindi

    ByAdmin April 7, 2021April 12, 2021

    *कन्या और दान* ( Kanya Or Daan )    जबसे बिटिया हुई सयान चिंता में है बाप की जान  नित्य  धरावे  नारी  ध्यान  जल्दी कर दो कन्यादान  घर -वर ढूढ़े फिर बाप परेशान कहां   मिले   अच्छा  मेहमान घर मिले अच्छा तो वर नहीं अच्छा बर  मिले  अच्छा तो घर नहीं अच्छा घर- वर अच्छा तब…

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  • हमें न ज़ोर हवाओं से आज़माना था
    ग़ज़ल

    Ghazal | हमें न ज़ोर हवाओं से आज़माना था

    ByAdmin April 7, 2021July 5, 2023

    हमें न ज़ोर हवाओं से आज़माना था ( Hame Na Zor Hawaon Se Aazmana Tha )   हमें   न  ज़ोर  हवाओं  से  आज़माना  था वो कच्चा धागा था उसको तो टूट जाना था   वो मेरे ज़हन में ढलता गया ग़जल की तरह मेरा  मिज़ाज  ही  कुछ  ऐसा  शायराना  था   हज़ारों फूल से खिलते…

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