Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • अबोध
    कविताएँ

    Kavita | अबोध

    ByAdmin March 16, 2021March 16, 2021

    अबोध ( Abodh ) बहुत अच्छा था बचपन अबोध, नहीं  था  किसी  बात का बोध। जहाॅ॑  तक  भी  नजर जाती थी, सूझता था सिर्फ आमोद -प्रमोद।   निश्छल मन क्या तेरा क्या मेरा, मन लगे सदा जोगी वाला फेरा। हर  ग़म मुश्किल से थे अनजान मन  में  होता  खुशियों का डेरा।   हर  किसी  में …

    Read More Kavita | अबोधContinue

  • खुशियों की कैसी जिद्द तेरी
    कविताएँ

    खुशियों की कैसी जिद्द तेरी | Poem Khushiyon ki Zid

    ByAdmin March 16, 2021February 13, 2023

    खुशियों की कैसी जिद्द तेरी ( Khushiyon Ki kaisi Zid Teri )   ग़मों की वो शाम थी,बनी है लम्बी रात सी। अन्धियारा जीवन है, अन्धियारा दूर तक। खुशियों की कैसी जिद्द तेरी…….   कहों तो सब बोल दूँ, ग़मों के पट खोल दूँ। चाहत के रिसते जख्म, दिखते है दूर तक। खुशियों की कैसी…

    Read More खुशियों की कैसी जिद्द तेरी | Poem Khushiyon ki ZidContinue

  • हमेशा ही रहे हम तो बुरे उनकी निगाहों में
    शेरो-शायरी

    Ghazal | हमेशा ही रहे हम तो बुरे उनकी निगाहों में

    ByAdmin March 16, 2021

    हमेशा ही रहे हम तो बुरे उनकी निगाहों में ( Hamesha hi Rahe Ham To Bure Unke Nigahon Mein )     हमेशा  ही  रहे  हम तो बुरे उनकी निगाहों में। गुनहगारों में की गिनती रहे जब बेगुनाहों में।।   बिना सोचे बिना समझे कई इल्ज़ाम दे डाले। जिगर का दर्द पढ़ पाए नहीं वो…

    Read More Ghazal | हमेशा ही रहे हम तो बुरे उनकी निगाहों मेंContinue

  • आसिफ की आपबीती
    कविताएँ

    Kavita | आसिफ की आपबीती

    ByAdmin March 15, 2021

    आसिफ की आपबीती ( Asif Ki Aap Beeti ) ****** लगी थी प्यास मंदिर था पास गया पीने पानी थी प्यास बुझानी समझ देवता का घर घुस गया अंदर नहीं था किसी का डर पी कर वापस आया तभी किसी ने पास बुलाया पूछा क्या नाम है? बताया आसिफ है! सुन वो बड़ा ही चौंका…

    Read More Kavita | आसिफ की आपबीतीContinue

  • बात सब मानी तुम्हारी हमने
    शेरो-शायरी

    बात सब मानी तुम्हारी हमने | Shayari Baat

    ByAdmin March 15, 2021February 13, 2023

    बात सब मानी तुम्हारी हमने ( Baat Sab Mani Tumhari Hamne )   गुलों से जबसे की यारी हमनें। रात रो रो कर गुजारी हमने।। मुझको  ठुकराकर  जाने  वाले, बात सब मानी तुम्हारी हमने।। बावफा रह के क्या मिला मुझको, मौत  की कर ली तैयारी हमने।। दिल की बाजी भी लगाकर देखा, हार  झेली  है …

    Read More बात सब मानी तुम्हारी हमने | Shayari BaatContinue

  • कहानी
    शेरो-शायरी

    Ghazal | कहानी

    ByAdmin March 15, 2021March 15, 2021

    कहानी ( Kahani )   कल एक कहानी लिखुंगा मैं तेरे प्यार की इक निशानी लिखुंगा जो तूने दिया था बचपन में मैं तेरी वो रवानी लिखुंगा कल एक कहानी लिखुंगा मैं तेरे प्यार की इक निशानी लिखुंगा   वो गलियां थी तू गुड़िया थी मैं तेरा गुड्डा बना था जहां खेले और लड़े हम…

    Read More Ghazal | कहानीContinue

  • बिना तेरे 
    कविताएँ

    Ghazal | बिना तेरे

    ByAdmin March 15, 2021

    बिना तेरे  ( Bina Tere )   बिना तेरे अब हमसे और अकेले जिया नहीं जाता । तुम्हें भूल जाने का गुनाह भी तो हमसे किया नहीं जाता । माना कि मेरे इश्क़े- इज़हार से परेशाँ रहने लगे हो तुम; पर अपनी पाक मोहब्बत को गुनाह, हमसे कहा नहीं जाता । सीने में चुभन,आँखों में…

    Read More Ghazal | बिना तेरेContinue

  • रंग गालो पे कत्थई लगाना
    कविताएँ

    Geet | रंग गालो पे कत्थई लगाना

    ByAdmin March 15, 2021March 28, 2021

    रंग गालो पे कत्थई लगाना ( Rang Gaalon Par Kathai Lagana)   अबके  फागुन  में  ओ रे पिया भीग जाने  दो  कोरी चुनरिया मीठी मीठी सी बाली उमरिया भीग  जाने  दो  कोरी चुनरिया   हम  को  मिल  ना  सकें तेरे  रहमो  करम सात रंगों में डूबे सातो जन्म रंग गालो पे कत्थई लगाना धीमे धीमें…

    Read More Geet | रंग गालो पे कत्थई लगानाContinue

  • प्रधानी
    कविताएँ

    Bhojpuri Vyang | प्रधानी

    ByAdmin March 15, 2021March 15, 2021

    प्रधानी ( Pradhani )    1 गउंआ भा लंका बजा जब डंका  फोन गईल घर से राजधानी आवा हो भैया कन्हैया भी आवा  भौजी  लड़े अबकी प्रधानी …..  आवा हो भैया…. 2 आपन सीट जुगाड़ भी फीट करें मनमानी जो देवई पीट  चले नहीं मर्जी नहीं वोट फर्जी   होय ना देबई अबकी बेईमानी ……..

    Read More Bhojpuri Vyang | प्रधानीContinue

  • पत्रकार हूँ पत्रकार रहने दो
    कविताएँ

    Kavita | पत्रकार हूँ पत्रकार रहने दो

    ByAdmin March 14, 2021

    पत्रकार हूँ पत्रकार रहने दो ( Patrakar Hoon Patrakar Rahne Do ) ******* लिखता हूं कलम को कलम कागज़ को काग़ज़ ग़ज़ल को ग़ज़ल महल को महल तुम रोकते क्यों हो? टोकते क्यों हो? चिढ़ते क्यों हो? दांत पीसते क्यों हो? मैं रूक नहीं सकता झुक नहीं सकता बिक नहीं सकता आजाद ख्याल हूं अपनी…

    Read More Kavita | पत्रकार हूँ पत्रकार रहने दोContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 720 721 722 723 724 … 832 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search