Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • CET के नाम पर कोचिंग माफिया: हरियाणा में शिक्षा का बढ़ता सौदा
    आलेख

    CET के नाम पर कोचिंग माफिया: हरियाणा में शिक्षा का बढ़ता सौदा

    ByAdmin July 3, 2025July 3, 2025

    “कुकुरमुत्तों की तरह उगते कोचिंग सेंटर: CET या लूट की नई राह?” CET का चक्रव्यूह और कोचिंग का जाल हरियाणा में CET परीक्षा लागू होने के बाद जिस रफ्तार से कोचिंग सेंटर गली–गली उग आए हैं, वह न केवल शिक्षा के व्यवसायीकरण का प्रमाण है, बल्कि बेरोजगार युवाओं की मजबूरी का क्रूर दोहन भी है।…

    Read More CET के नाम पर कोचिंग माफिया: हरियाणा में शिक्षा का बढ़ता सौदाContinue

  • कौन है नेता कौन अभिनेता
    कविताएँ

    कौन है नेता कौन अभिनेता

    ByAdmin July 2, 2025July 2, 2025

    कौन है नेता कौन अभिनेता कौन है नेता कौन अभिनेताअब पहचानना है मुश्किल। भाषण की जगह अब गीत है सुनते,गीत गीत में भाषण को हैं रचते, भाषण कम अब व्यंग ज्यादा है कसते,एक दूजे की टांग खींचतेनहीं किसी को बक्शते है। टीवी सीरियल से ज्यादाकिरदार इसमें दिखते हैं । बड़े-बड़े नेता अभिनय के लिए बड़े-बड़े…

    Read More कौन है नेता कौन अभिनेताContinue

  • ऐसा क्यों
    कहानियां

    ऐसा क्यों?

    ByAdmin June 30, 2025July 7, 2025

    बदहवास हालत में, पसीने से तरबतर, घबराया हुआ श्याम तेजी से घर में घुसा और दोगुनी तेजी से घर का दरवाजा बंद कर लिया… और भाग कर अपने आप को एक कमरे में छुपा लिया। विधवा मां धर्मवती यह सब अपनी आंखों से देख रही थी। उन्हें बड़ा आश्चर्य हो रहा था कि अचानक श्याम…

    Read More ऐसा क्यों?Continue

  • विद्यालय का पहला दिन एक नई शुरुआत की प्रेरणा
    आलेख

    विद्यालय का पहला दिन: एक नई शुरुआत की प्रेरणा

    ByAdmin June 30, 2025June 30, 2025

    गर्मियों की तपती दोपहरों, आम की मिठास, दोपहर की सुस्त नींदों और दादी-नानी की कहानियों के बीच बीता ग्रीष्मकालीन अवकाश अब अपनी समाप्ति की ओर है। प्रकृति ने जैसे ही अपने स्वरूप को थोड़ा शांत किया, बादलों ने धूप को ढकना शुरू किया, स्कूल की घंटियाँ एक बार फिर बच्चों के जीवन में गूँजने लगीं।…

    Read More विद्यालय का पहला दिन: एक नई शुरुआत की प्रेरणाContinue

  • दृष्टिकोण
    कहानियां

    दृष्टिकोण

    ByAdmin June 30, 2025June 30, 2025

    कोचिंग सेंटर पर निधि मैम बच्चों को एग्जाम की तैयारी करवा रही थी। उसी दौरान एक महिला फटे-पुराने, मैले-कुचैले कपड़ों में अपनी गोद में, एक तीन वर्ष के बच्चे व एक हाथ में एक थैला(जिसमें अनाज वगैरह कुछ था) लेकर कोचिंग सेंटर में दाखिल हुई और यह कहकर भीख मांगने लगी, “बहन जी, भैया जी,…

    Read More दृष्टिकोणContinue

  • चूल्हे से चाँद तक
    पुस्तक समीक्षा

    “चूल्हे से चाँद तक” — चूल्हे की आँच से चाँद की कविता तक की यात्रा

    ByAdmin June 29, 2025June 29, 2025

    पुस्तक समीक्षा प्रियंका सौरभ का यह काव्य संग्रह ‘चूल्हे से चाँद तक’ केवल कविता नहीं, स्त्री आत्मा की यात्रा है। यह वह आवाज़ है, जिसे सदियों से दबाया गया, पर वह फिर भी जलती रही – रोटियों के साथ, परातों के बीच, और आँसुओं में घुली स्याही के माध्यम से। इस संग्रह की कविताएं परंपरा…

    Read More “चूल्हे से चाँद तक” — चूल्हे की आँच से चाँद की कविता तक की यात्राContinue

  • ज्ञान का दीप
    कविताएँ

    ज्ञान का दीप

    ByAdmin June 29, 2025June 29, 2025

    ज्ञान का दीप जिनका किरदार सदाकत है lजिनकी तदरीस से पत्थर पिघलत है llअकेले चलने का आभास न कराया lहमेशा साथ देकर सफल कराया ll ” मित्र ” कहूँ तो ” मन ” शांत है l” भाई ” कहूँ तो ” आत्मा ” तृप्त है ll” गुरु ” कहूँ तो ” पद ” शेष है…

    Read More ज्ञान का दीपContinue

  • जल की बूंद-बूंद पर संकट
    आलेख

    जल की बूंद-बूंद पर संकट: नीतियों के बावजूद क्यों प्यासी है भारत की धरती?

    ByAdmin June 29, 2025June 29, 2025

    भारत दुनिया की 18% आबादी और मात्र 4% ताजे जल संसाधनों के साथ गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। भूजल का अत्यधिक दोहन, प्रदूषण, असंतुलित खेती, और जलवायु परिवर्तन इसके प्रमुख कारण हैं। सरकारी योजनाओं और नीतियों के बावजूद कार्यान्वयन और जनभागीदारी की कमी से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। जल संरक्षण को…

    Read More जल की बूंद-बूंद पर संकट: नीतियों के बावजूद क्यों प्यासी है भारत की धरती?Continue

  • सोच-समझकर बोलो
    कहानियां

    सोच-समझकर बोलो

    ByAdmin June 28, 2025June 28, 2025

    “मम्मी खाना खा लो। पापा ने भेजा है।” 5 वर्ष की मनु ने रजनी से कहा। “मुझे नहीं खाना। नाली में फेंक दे इसे।” अपने पति अशोक से नाराज रजनी ने मनु से कहा। “क्या?” मासूमियत व हैरानी से मनु ने पूछा। “तुझे एक बार में समझ में नहीं आ रहा, सुनाई नहीं आ रही?…

    Read More सोच-समझकर बोलोContinue

  • जगन्नाथ रथ यात्रा
    निबंध

    जगन्नाथ रथ यात्रा: आस्था, एकता और अध्यात्म का महापर्व

    ByAdmin June 28, 2025June 28, 2025

    पुरी, ओडिशा में हर साल होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि भारत की समृद्ध संस्कृति, अटल आस्था और सामाजिक समरसता का जीता-जागता प्रमाण है। यह वह अनुपम अवसर होता है जब स्वयं भगवान नगरवासी बनकर अपने भक्तों के बीच आते हैं, और सजीव संपर्क स्थापित करते हैं। यह उस महान परंपरा…

    Read More जगन्नाथ रथ यात्रा: आस्था, एकता और अध्यात्म का महापर्वContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 6 7 8 9 10 … 832 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search