दिल बहुत उदास है | Dil udas shayari
दिल बहुत उदास है ( Dil bahot udas hai ) कौन आस पास है दिल बहुत उदास है देखकर नजारा वो होश अब हवास है जब मिली नहीं मिली दिल हुआ निराश है आजकल न जाने क्यूं जीस्त क्यों हताश है वो ओढ़े गरूर को हुस्न का लिबास है…
दिल बहुत उदास है ( Dil bahot udas hai ) कौन आस पास है दिल बहुत उदास है देखकर नजारा वो होश अब हवास है जब मिली नहीं मिली दिल हुआ निराश है आजकल न जाने क्यूं जीस्त क्यों हताश है वो ओढ़े गरूर को हुस्न का लिबास है…
और झनकन ( Aur jhanakan ) तार वीणा के शिथिल इतनी स्पंदन और झनकन। बिना कंगन असह्य खनकन और झनकन।। शांत अन्तस्थल में कल कल की निनाद। चिरन्तन से अद्यतन तक वही संवाद। इतीक्षक कब होगा दरपन जैसा ये मन और झनकन।। बिना कंगन० करुण क्रंदन चीख बहती अश्रुधारा। जब विभू था सम्प्रभू था…
अदाएं है कातिल जुबां शायराना। ( Adayein hai katil zuban shayrana ) अदाएं है कातिल जुबां शायराना। यहीं पर मिलेगा ग़ज़ल का ख़ज़ाना।। है आंखें ये मय सी ये लब है पैमाने। कहीं खुल ना जाए यहां पर मैख़ाना ।। है खिलते गुलाबों सी गालों पे रंगत। लगे उस पे तिल भी…
पग बढ़ाते चलो ***** कंकड़ी संकरी पथरीली, या हों रास्ते मखमली। हृदय में सदैव जली हो अग्नि, स्वार्थ हमें सब होगी तजनी। सेवाभाव की मंशा बड़ी, रास्ते में मुश्किलें भी होंगी खड़ी। पर जब करने की मंशा हो भली, बाधाएं दूर हो जातीं बड़ी से बड़ी। खुदा के वास्ते न देखो पीछे मुड़कर, बस तू…
जिंदगी भर वो परायी दोस्ती होने लगी ( Zindagi bhar wo parai dosti hone lagi ) जिंदगी भर वो परायी दोस्ती होने लगी इस क़दर उससे मेरी दुश्मनी होने लगी कर गया रिश्ता वफ़ाये घायल देकर बेदिली अब भुलाने को उसी ही मयकशी होने लगी इसलिए मैं लौट आया गांव अपनें…
ये चक्कर नया-नया है ( Ye chakkar naya-naya hai ) दुनिया की सैर का ये चक्कर नया-नया है जिस ओर देखता हूँ मंज़र नया-नया है बिल्कुल अलग जहां से हालत है मेरे दिल की अन्दर से ये पुराना बाहर नया- नया है बेचैन इसलिए हूँ मख़मल की सेज पर मैं मेरे लिये…
अब तो उसी की आरजू होने लगी ( Ab to usi ki aarzoo hone lagi ) प्यार की ही ये किसी से गुफ़्तगू होने लगी रात दिन अब तो उसी की आरजू होने लगी खो गया मिलकर हंसी मुखड़ा मुझसे जो भीड़ में शहर की अब हर गली में जुस्तजू होने लगी …
अस्तीन के सांप ( Aasteen ka saanp ) मेरे अपनों ने मुझे,अपनों से दूर कर दिया || 1.कुछ अपने जो पराये हो गए,पराये मेरे अपने हो गए | अपनों को खो दिया पराया मान,वो अब सपने रह गए | कुछ खास अपनों को जी-जान से,अपना बनाना चाहा | सरेआम दगा दे गए दिखाबा किया,बस…
वक्त के सामने सर झुकाना पङा ( Waqt ke samne sar jhukana pana ) वक्त के सामने सर झुकाना पङा। मूढ के साथ भी है निभाना पङा।। हो गया है ज़माने में पैसा बङा। दौर माता- पिता का पुराना पङा।। मतलबी हो गए आज रिश्ते सभी। नेह भाई -बहन को गँवाना पङा।। यारियाँ भी…
आप कहके मुकर जाइये ( Aap kahke mukar jaiye ) अब इधर न उधर जाइये। आप दिल में उतर जाइये।। आईना भी जले देखकर, इस कदर न संवर जाइये।। हमको अच्छा लगेगा बहुत, आप कहके मुकर जाइये।। आखिरी इल्तिजा आपसे, मेरे घर से गुज़र जाइये।। गांव है शेष भोले…