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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • बेबाक रघुवंश बाबू!
    कविताएँ

    बेबाक रघुवंश बाबू | Raghuvansh Babu Par Kavita

    ByAdmin September 14, 2020October 28, 2022

    बेबाक रघुवंश बाबू! ( Bebaak Raghuvansh Babu )    पंचतत्व में विलीन हुए रघुवंश बाबू, राजनीति में चलता था उनका जादू। बेबाक थे ,बेबाक रहे, जो जी में आया वही कहे। अपने देसी अंदाज के लिए जाने जाते थे, ठेठ भाषा और बोली से आकर्षित करते थे। समाजवाद के बड़े पैरोकार रहे, पांच पांच बार…

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  • मुरझायेगे गुल किसे पता था 
    शेरो-शायरी

    मुरझायेगे गुल किसे पता था | Love Ghazal in Hindi Font

    ByAdmin September 14, 2020September 11, 2023

    मुरझायेगे गुल किसे पता था  ( Murjhayenge gul kise pata hai )   मुरझायेगे गुल किसे पता था तूफान ऐसा यहाँ चला  था   यकीन पे दोस्ती करी उससे करेगा धोखा किसे पता था   वफ़ा जिसे दी मुहब्बत में ही दग़ा उसने प्यार में करा था   जिसे सदा दी वफ़ा बहुत ही वफ़ा…

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  • हिंदी भाषा को व्यावहारिक बनाना जरूरी है
    निबंध

    हिंदी भाषा को व्यावहारिक बनाना जरूरी है

    ByAdmin September 14, 2020October 28, 2022

    हिंदी भाषा को व्यावहारिक बनाना जरूरी है ( It is necessary to make Hindi language practical )    हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार के लिए एक राष्ट्र भाषा प्रचार समिति का गठन आजादी के बाद किया गया था। वर्धा ने सबसे पहले 1953 तत्कालीन केंद्र…

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  • ख्वाब और हकीकत
    कविताएँ

    ख्वाब और हकीकत | Poem khwab aur haqeeqat

    ByAdmin September 14, 2020October 28, 2022

    ख्वाब और हकीकत ( Khwab aur haqeeqat )   अब ख्वाबों में नहीं  हकीकत जीता हूं यारों,        ख्वाब सूर्य पकड़ा        हकीकत जुगनू…. ख्वाब समुद्र में डुबकी लगाया हकीकत तालाब …..         अब ख्वाबों में नहीं         हकीकत जीता हूं यारों, ख्वाब  ईश्वर, पवन…

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  • हाय री सरकार !
    कविताएँ

    हाय री सरकार | Hi Ri Sarkar

    ByAdmin September 14, 2020October 28, 2022

    हाय री सरकार ( Hi Ri Sarkar )    सड़क पर  निकल पड़ी है  नौजवानों की एक भीड़ बेतहासा बन्द मुठ्ठी, इन्कलाब जिन्दाबाद  के नारों के साथ.  सामने खड़ी है एक फौज मुकम्मल चौराहे पर  हाथ में लिए लाठी – डन्डे, आँसू गोले और  गोलियों से भरी बन्दूकें  चलाने के लिए मुरझाये चेहरे वाले  नौजवानों…

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  • बदलते समय के साथ बदलती हुई हिंदी
    विवेचना

    बदलते समय के साथ बदलती हुई हिंदी को स्वीकार करना वक्त की जरूरत है

    ByAdmin September 14, 2020October 28, 2022

    बदलते समय के साथ बदलती हुई हिंदी  ( Badalte samay ke sath badalti hui Hindi )    हिंदी दिवस आते आते हिंदी भाषा की चर्चा जोर पकड़ लेती है। हर तरफ हिंदी भाषा की चर्चा शुरू हो जाती है। सरकारी कार्यालयों, स्कूल कॉलेजों में हिंदी दिवस के अवसर पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए…

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  • सच्चाई की ताकत
    कविताएँ

    सच्चाई की ताकत | Sachai ki taqat poem

    ByAdmin September 14, 2020October 28, 2022

    सच्चाई की ताकत ( Sachai ki taqat )  किन्तु परन्तु में न अमूल्य समय गंवाए, जो बात सही हो, खरी खरी कह जाएं। होती अद्भुत है सच्चाई की ताकत, छिपाए नहीं छिपती,है करती लज्जित होकर प्रकट। लज्जा अपमान जनक पीड़ादायक भी होती है, आजीवन पीछा नहीं छोड़ती है। लोग भूल भी जाएं- पर अपने हृदय…

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  • देवनागरी
    कविताएँ

    देवनागरी | Kavita Hindi Bhasha Par

    ByAdmin September 14, 2020October 28, 2022

    देवनागरी ( Devanagari )   करत कलोल बोल कोयल सी अनमोल, ढोल बावन ढंग की बजावति देवनागरी।     खड्ग उठाइ शव्द भानु के जगाई तब, सबही केज्ञान सिखावति देवनागरी।।     गगन जनन मन अति हरषत जब , अवनि के स्वर्ग बनावति देवनागरी।     घनन घनन घन दुंदुभी बजावन लागे, शेष हिंदी बूंद…

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  • संभल जा ज़रा
    कविताएँ

    संभल जा ज़रा | Kavita sambhal ja zara

    ByAdmin September 14, 2020October 28, 2022

    संभल जा ज़रा ( Sambhal ja zara ) ए-दोस्त… संभल जा ज़रा पछताएगा,रोएगा अपने किए दुष्कृत्यों पर फिर सोच सोच कर…. अभी समय है बच सकता है तो बच बचा सकता है तो बचा अपनों के अहसासों को अपनों के अरमानों को….. तुमसे ही तो सारी उम्मीदें हैं तुम ही तो पालनकर्ता हो अब तुम…

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  • उसकी बदज़ुबानी देखिए
    शेरो-शायरी

    उसकी बदज़ुबानी देखिए | Bad zubani shayari in Hindi

    ByAdmin September 13, 2020October 27, 2022

      उसकी बदज़ुबानी देखिए  ( Uski badzubani dekhiye )      है फ़रेबी आंखों  उसकी बदज़ुबानी देखिए ख़तरे में है प्यार की ये जिंदगानी देखिए   रह गया इंसान उल्फ़त से भरा लोगों कहा नफ़रतों की ही यहाँ दिल में रवानी देखिए   साज दिल में है नये झूठे वादों के ही मगर हाँ बजाते…

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