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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • मुझे खुशी है की मेरा कोई अपना नहीं है
    शेरो-शायरी

    मुझे खुशी है की मेरा कोई अपना नहीं है | Mera koi apna nahi

    ByAdmin September 2, 2020August 10, 2022

    मुझे खुशी है की मेरा कोई अपना नहीं है ( Mujhe khushi hai ki mera koi apna nahi hai )     बाक़ी ज़माना सा तो नहीं खलता है मुझे तू किसने कहा की मुझसे बेगाना है मुझे तू   मुझे खुशी है की मेरा कोई अपना नहीं है ऐ-खुदा क्यों इस कदर चाहता है…

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  • एक अजीब लड़की
    कविताएँ

    एक अजीब लड़की | Poem ek ajeeb ladki

    ByAdmin September 1, 2020August 10, 2022

    एक अजीब लड़की ! ( Ek ajeeb ladki ) ***** घड़ी घड़ी कपड़े है बदलती, बिना काम बाजारों में है टहलती। अभी दिखी थी साड़ी में, अब आई है गाउन में; नयी नयी लग रही है टाउन में। अधरों पर लिए अजीब मुस्कान, कुछ खास नहीं उसकी पहचान। मुखरे पर किए अतिशय श्रृंगार, युवा धड़कनें…

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  • क्या होता है जीडीपी
    निबंध

    सकल घरेलू उत्पाद पर निबंध | Essay in Hindi on GDP

    ByAdmin September 1, 2020December 7, 2022

    सकल घरेलू उत्पाद पर निबंध ( Essay in Hindi on gross domestic product – GDP )   किसी भी देश की Economy की रफ्तार को उसके GDP (जीडीपी ) के जरिए ही आंका जाता है। कोरोना वायरस महामारी के चलते चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की GDP मे नकारात्मक ग्रोथ देखी गई…

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  • सब क्यों नहीं?
    कविताएँ

    सब क्यों नहीं | Kyon nahi | kavita

    ByAdmin September 1, 2020August 10, 2022

    सब क्यों नहीं ? ( Sab kyon nahi ) ***** खुशबू सा महक सकते? चिड़ियों सा चहक सकते? बादलों सा गरज सकते? हवाओं सा बह सकते? बिजली सा चमक सकते? बर्फ सा पिघल सकते? सूर्य सा जल सकते? नदियों सा लहरा सकते? तिरंगा सा फहरा सकते? भौरों सा गुनगुना सकते? कोयल सी कू कू कर…

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  • खिल रहे है गुलाब पानी में !
    शेरो-शायरी

    खिल रहे है गुलाब पानी में | Gulab shayari

    ByAdmin September 1, 2020August 10, 2022

    खिल रहे है गुलाब पानी में ! ( Khil rahe hai gulab pani mein )     खिल रहे है गुलाब पानी में! था पर वो  आफ़ताब पानी में   बारिशों ने सितम ऐसे ढाये घर बहे बेहिसाब पानी में   वो रोए है किसके लिये इतना ख़ूब भीगा नक़ाब पानी में   प्यार का…

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  • कोरोना काल में हो रहे सब मोटे !
    कविताएँ

    कोरोना काल में हो रहे सब मोटे | Corona kal par kavita

    ByAdmin August 31, 2020August 9, 2022

    कोरोना काल में हो रहे सब मोटे ! ***** कोरोना काल में बिगड़ी है आदत, बढ़ी है तला भुना खाने की चाहत। छुट्टियों जैसे सब खाना खा रहे हैं, रोग-प्रतिरोधक क्षमता गंवा रहे हैं। कैलोरी की खपत बढ़ी है, वायरस से लड़ने की क्षमता घटी है। वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने- इसका खुलासा किया है,…

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  • रक्त पीना : मच्छरों की शौक या मजबूरी ?
    कविताएँ

    रक्त पीना : मच्छरों की शौक या मजबूरी | Machchhar par kavita

    ByAdmin August 31, 2020August 9, 2022

    रक्त पीना : मच्छरों की शौक या मजबूरी? ******* ये हम सभी जानते हैं, मच्छर खून पीते हैं। डेंगी , मलेरिया फैलाते हैं, सब अक्सर सोचते हैं! ये ऐसा करते क्यों हैं? पीते खून क्यों हैं? जवाब अब सामने आया है, प्रिंसटन यूनिवर्सिटी ने बताया है; जवाब ने सबको चौंकाया है। आरंभ से मच्छरों को…

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  • ईद की आयी यारों हसीं रात है
    शेरो-शायरी

    ईद की आयी यारों हसीं रात है | Eid shayari

    ByAdmin August 31, 2020April 23, 2023

    ईद की आयी यारों हसीं रात है ( Eid ki aayi yaaron haseen raat hai )     ईद की आयी यारों हसीं रात है हर तरफ़ खुशियों की चांदनी रात है   दुश्मनों के पहरे हट गऐ शहर से हां गमों की यारों ढ़ल गयी रात है   वरना खो जाऐगे शहर की गलियों…

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  • हरि अब दर्शन दो
    कविताएँ

    हरि अब दर्शन दो | Poem hari ab darshan do

    ByAdmin August 30, 2020August 9, 2022

    हरि अब दर्शन दो  ( Hari ab darshan do ) ***** ओ री हरि, अब दर्शन दो री। कलयुग में- मति गई मारी, क्या राजा? क्या भिखारी? जगत पापी से भरी, भगत पापी से लड़ी। धरा को है कष्ट अपार, त्राहि-त्राहि करे संसार। ओ री हरि, अब दर्शन दो री। असत्य सत्य पर अब है…

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  • ख़ुशी की ख़ुदा वो बहार दें !
    शेरो-शायरी

    ख़ुशी की ख़ुदा वो बहार दें | Khushi shayari

    ByAdmin August 30, 2020August 9, 2022

    ख़ुशी की ख़ुदा वो बहार दें ! ( Khushi ki khuda wo bahar de )   ख़ुशी की ख़ुदा वो बहार दें! नहीं और ग़म का  ख़ुमार दें   सनम लौट आ घर मुझे मिलनें न तू और यूं इन्तजार दें   सभी दुख दिल से भूल जाऊं मैं कितना जिंदगी में तू प्यार दें…

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