• ज़िंदा तो हैं मगर

    ज़िंदा तो हैं मगर ख़ुद की नज़र लगी है अपनी ही ज़िन्दगी कोज़िंदा तो हैं मगर हम तरसा किये ख़ुशी को महफूज़ ज़िन्दगानी घर में भी अब नहीं हैपायेगा भूल कैसे इंसान इस सदी को कैसी वबा जहाँ में आयी है दोस्तों अबहालात-ए-हाजरा में भूले हैं हम सभी को हमदर्द है न कोई ये कैसी…

  • हमसे अब नाराज़गी अच्छी नहीं

    हमसे अब नाराज़गी अच्छी नहीं आँखों में इतनी नमी अच्छी नहींहमसे अब नाराज़गी अच्छी नहीं बज़्म में बैठे वो नज़रें फेर करइश्क़ में  ये बेरुख़ी अच्छी नहीं हौसला ता-ज़िंदगी रखना बुलंदइस क़दर आज़ुर्दगी अच्छी नहीं वो सराबों में ग़ज़ालों की तरहइश्क़ की  सर गश्तगी अच्छी नहीं पास रखिए अपनी उल्फ़त का ज़राप्यार में आवारगी अच्छी…

  • मेहनत का मोल | लघु कथा

    अरूण स्वाभिमानी लड़का था। वह कक्षा‌ में सदैव प्रथम आता था। सब पूछते ” अरूण तुम घर में कितने घंटेपढ़ते हो आखिर रोज ? वह बोलता ” मुझे घर पर समय ही कहां मिलता है।दो गायें और एक भैंस है। उनको सानी पानी देना और फिर घूम घूम कर दूध बेचना आदि में व्यस्त हो…

  • मेरे ख़ुलूस को | Mere Khuloos ko

    मेरे ख़ुलूस को मेरे ख़ुलूस को चाहो अगर हवा देनामेरे ख़िलाफ़ कोई वाक्या सुना देना कभी तो आके मेरी ख़्वाहिशें जगा देनावफ़ा शियार हूँ तुम भी मुझे वफ़ा देना तमाम उम्र ये मंज़र रहेगा आँखों मेंनज़र मिलाते ही तेरा ये मुस्कुरा देना जिधर भी देखिए रुसवाइयों के पहरे हैंमेरे ख़ुतूत मेरे साथ ही जला देना…

  • काल | प्रेरक कहानी

    एक मनुष्य शहद बेच रहा था । उसने शहद से भरी उंगली को दीवार से पोछ लिया। दीवार पर शहद लगने की देर थी कि उसकी खुशबू पाकर एक मक्खी उस पर आ बैठी और आंखें बंद करके शहद खाने लगी। अभी शहद खा ही रही थी कि एक छिपकली ने देख लिया कि यह…

  • देखना है | Dekhna Hai

    देखना है ज़ब्त अपना आजमाकर देखना है,उसे सितमगर को भुला कर देखना है। ज़र्फ़ की उसके मिसालें लोग देते,बस जरा गुस्सा दिला कर देखना है। चंद सिक्कों में सुना बिकती मोहब्बतपर कहाॅं बाजार जाकर देखना है। वह ख़ुदा रहता हमारे ही दिलों मेंबुग़्ज़ की ऐनक हटाकर देखना है। इश्क़-ए-दुश्वारी में लज्ज़त है अगर तो,फिर हमें…

  • वक्त की आज हार हो जाए

    वक्त की आज हार हो जाए वक्त की आज हार हो जाए ।कश्ती तूफां में पार हो जाए ।।१ आज दीदारे- यार हो जाए ।ख़त्म यह इंतज़ार हो जाए ।।२ यह जो दुनिया हमें दगा देती ।कुछ तो इसमें सुधार हो जाए ।।३ ज़ीस्त भर दोनों साथ साथ चलेंगर उन्हें ऐतबार हो जाए ।।४ इक…

  • एक बार मनुहार करना जरूर

    एक बार मनुहार करना जरूर नदी की तरह तुम बहना जरुर,सुभावों को नमन करना जरूर। मन का मीत जब मिल जाए,एक बार मनुहार करना जरुर। मनुजता की पहली पसंद प्रेम,जीवन में सच्चा प्रेम करना जरुर। गम का शोर बेहिसाब समुन्दर में,नदी बनकर समुद्र से मिलना जरूर । झुरमुट की ओट से झांकती चाँदनी,चाँद संग सितारों…

  • बागेश्वर साहित्य परिषद की काव्य गोष्ठी: कविता, ग़ज़ल और साहित्य का अद्भुत संगम

    बागेश्वर साहित्य परिषद साले चौका की काव्य गोष्ठी संपन्न साली चौका रोड बागेश्वरी साहित्य परिषद साली चौका की मासिक कवि गोष्ठी संपन्न । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार सतीश तिवारी नरसिंहपुर द्वारा दीप अगरबत्ती द्वारा मां सरस्वती का पूजन कर विधि बात गोष्ठी की शुरुआत हुई गोष्ठी का संचालन मंच संचालन साहित्यकार संतोष अग्रवाल…

  • इस तरह याद आया न कर

    इस तरह याद आया न कर तू मुझे इस तरह याद आया न करमेरी ही धुन में तू वक़्त ज़ाया न कर तेरी महफ़िल में चल के अगर आ गयातो नज़र मुझसे दिलबर चुराया न कर गुल में भी तू नज़र आए जान-ए- ग़ज़लहर किसी के दिलों को यूँ भाया न कर काफ़िया हूँ मैं…