• पूजा स्थलों के लिए झगड़े

    धर्मनिरपेक्षता के नाम पर हमारी सांस्कृतिक प्रथाओं के लिए मारकाट कब थमेगी? भारत में धार्मिक स्थलों पर चल रहे विवाद, विशेष रूप से ऐतिहासिक धर्मांतरण के दावों से जुड़े विवादों ने सांप्रदायिक संवेदनशीलता को बढ़ा दिया है। वाराणसी और मथुरा में इसी तरह के मामलों ने ऐसे उदाहरण स्थापित किए हैं जो धार्मिक स्थलों की…

  • नई सदी की हिन्दी कविता

    साहित्य मानवीय चेतना की अभिव्यक्ति है और चेतना अनुभूति और चिंतन की सफलता के समन्वित आधार के साथ ही अपना रूप ग्रहण करती है। अनुभूति ह्रदय की संवेदनशीलता से सम्बंध स्थापित करती है एवं चिंतन वस्तुतत्व के स्थिति बोध के लिए उद्वेलित होने वाली शंकाओं, जिज्ञासाओं तथा प्रश्नों के समाधानों का दूसरा आयाम है। मानव…

  • जब भी कोई कहीं बिखरता है

    जब भी कोई कहीं बिखरता है जब भी कोई कहीं बिखरता हैअक़्स माज़ी का खुद उभरता है क्यूँ रखूँ ठीक हूलिया अपनाकौन मेरे लिए संवरता है चाहतें कब छिपी ज़माने मेंक़ल्ब आँखों में आ उतरता है वस्ल में हाले-दिल हुआ ऐसापेड़ झर झर के जब लहरता है बात कर लेना हल नहीं लेकिनजी में कुछ…

  • बिन तेरे | Bin Tere

    बिन तेरे बिन तेरे मुझे आज भी जीना नहीं आया।बैरी सा लगे अब तो मुझे अपना ही साया।। कोशिश तो बहुत कर ली  भुलाने की तुम्हें  पर,इक तेरे सिवा दूजा कोई  दिल को न भाया।। कैसे मिले राहत मिरे टूटे हुए दिल को,कोशिश तो  मेरी हो गई जब सारी ही  ज़ाया।। हम आस लिए बैठे…

  • सीखी है अय्यारी क्या

    सीखी है अय्यारी क्या सीखी है अय्यारी क्याइस में है फ़नकारी क्या सब से पंगा लेते होअ़क्ल गई है मारी क्या ऐंठे-ऐंठे फिरते होशायर हो दरबारी क्या लगते हो भारी-भरकमनौकर हो सरकारी क्या जाने की जल्दी में होकरली सब तय्यारी क्या तोपें खींचे फिरते होकरनी है बमबारी क्या सबको धोखा देते होअच्छी है मक्कारी क्या…

  • बदले की कहानी किसलिए

    बदले की कहानी किसलिए ( Badle ki Kahani Kisliye ) वक़्त दुहराता है बदले की कहानी किसलिएदिल दुखायें जो वो बातें दिल में लानी किसलिए ज़ुल्म ढ़ाकर मेरे दिल पर रो रहे हैं आप क्यों,मेरे बंजर दिल पे आख़िर मेहरबानी किसलिये । जब मुकम्मल ही नहीं होने ये किस्से इश्क़ केफिर शुरू मैं भी करूँ…

  • चरित्रहीन | Charitraheen

    चरित्रहीन ( Charitraheen ) “घर आकर बताता हूँ”जब जब उसने कुछ पूछना चाहाहमेशा यही उत्तर मिलाऔर फिर कभी ना वो समय आयाना ही उसे कुछ बताया गया।उसे कभी नहीं लगा किवह भी किसी की ज़िंदगी का हिस्सा है।दोनों कभी नहीं बन पायेएक दूसरे के सहभागी,बस एक दूसरे को ज़िम्मेदारी बनढोते रहे।बिना ये सोचे किएक समय…

  • साँझ | Sanjh

    ” आपने मुझे बुलाया, डॉक्टर?”” हाँ, हमने यह कहने के लिए बुलाया कि हम मिस्टर मेहरा को कल सुबह कॉटेज नंबर 13 में शिफ्ट कर रहें है “डॉक्टर शर्मा के शब्दों सुन कर अंतरा के पैर काँपने लगे l उसकी आँखे बंद हों गई l जैसे ही वह गिरने लगी कि डॉक्टर शर्मा ने लपक…

  • कोई प्यारी लोरी सुनाओ हमें तुम

    कोई प्यारी लोरी सुनाओ हमें तुम चलो थपकी देकर सुलाओ हमें तुमकोई प्यारी लोरी सुनाओ हमें तुम नहीं याद आये कभी माँ की हमकोवो स्वादिष्ट व्यंजन खिलाओ हमें तुम रहें जीते हम बस तुम्हें देखकर हीकभी रूप ऐसा दिखाओ हमें तुम किया प्यार तुमसे यहाँ हमने जितनावही हो सके तो जताओ हमें तुम नहीं रोक…

  • श्रृंगार | Shringaar

    श्रृंगार ( Shringaar ) बड़े गर्व से शीश झुका कर कहता निश्चल निर्जल मन, भारत मां को आज सजाए भाषाओं के आभूषण। बाजूबंद उर्दू के बांधे , हाथों में गुजराती कंगन, उड़िया के कुंडल कानों में , बलिया में  पायल की झनझन, तमिल मुद्रिका, नथ पंजाबी, आसमी बड़ी सयानी है,  पैरों में है कन्नड़ बिछुए,…