काल | प्रेरक कहानी
एक मनुष्य शहद बेच रहा था । उसने शहद से भरी उंगली को दीवार से पोछ लिया। दीवार पर शहद लगने की देर थी कि उसकी खुशबू पाकर एक मक्खी उस पर आ बैठी और आंखें बंद करके शहद खाने लगी। अभी शहद खा ही रही थी कि एक छिपकली ने देख लिया कि यह…
एक मनुष्य शहद बेच रहा था । उसने शहद से भरी उंगली को दीवार से पोछ लिया। दीवार पर शहद लगने की देर थी कि उसकी खुशबू पाकर एक मक्खी उस पर आ बैठी और आंखें बंद करके शहद खाने लगी। अभी शहद खा ही रही थी कि एक छिपकली ने देख लिया कि यह…
देखना है ज़ब्त अपना आजमाकर देखना है,उसे सितमगर को भुला कर देखना है। ज़र्फ़ की उसके मिसालें लोग देते,बस जरा गुस्सा दिला कर देखना है। चंद सिक्कों में सुना बिकती मोहब्बतपर कहाॅं बाजार जाकर देखना है। वह ख़ुदा रहता हमारे ही दिलों मेंबुग़्ज़ की ऐनक हटाकर देखना है। इश्क़-ए-दुश्वारी में लज्ज़त है अगर तो,फिर हमें…
वक्त की आज हार हो जाए वक्त की आज हार हो जाए ।कश्ती तूफां में पार हो जाए ।।१ आज दीदारे- यार हो जाए ।ख़त्म यह इंतज़ार हो जाए ।।२ यह जो दुनिया हमें दगा देती ।कुछ तो इसमें सुधार हो जाए ।।३ ज़ीस्त भर दोनों साथ साथ चलेंगर उन्हें ऐतबार हो जाए ।।४ इक…
एक बार मनुहार करना जरूर नदी की तरह तुम बहना जरुर,सुभावों को नमन करना जरूर। मन का मीत जब मिल जाए,एक बार मनुहार करना जरुर। मनुजता की पहली पसंद प्रेम,जीवन में सच्चा प्रेम करना जरुर। गम का शोर बेहिसाब समुन्दर में,नदी बनकर समुद्र से मिलना जरूर । झुरमुट की ओट से झांकती चाँदनी,चाँद संग सितारों…
बागेश्वर साहित्य परिषद साले चौका की काव्य गोष्ठी संपन्न साली चौका रोड बागेश्वरी साहित्य परिषद साली चौका की मासिक कवि गोष्ठी संपन्न । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार सतीश तिवारी नरसिंहपुर द्वारा दीप अगरबत्ती द्वारा मां सरस्वती का पूजन कर विधि बात गोष्ठी की शुरुआत हुई गोष्ठी का संचालन मंच संचालन साहित्यकार संतोष अग्रवाल…
इस तरह याद आया न कर तू मुझे इस तरह याद आया न करमेरी ही धुन में तू वक़्त ज़ाया न कर तेरी महफ़िल में चल के अगर आ गयातो नज़र मुझसे दिलबर चुराया न कर गुल में भी तू नज़र आए जान-ए- ग़ज़लहर किसी के दिलों को यूँ भाया न कर काफ़िया हूँ मैं…
जीवन की कहानी जीवन की कहानी अनकही है,हर मोड़ पे एक नयी रहनी है।आंसू और मुस्कान साथ चलते,सपने भी कभी टूटते, कभी पलते। हर दिन नया संघर्ष दिखाता,कभी हलचल, कभी सन्नाटा।हर रात खुद से सवाल करता,क्या खोया, क्या पाया, क्या अब करना। धूप-छांव में ही पलते हैं,राहों में कांटे बिछते हैं।मंज़िल दूर होती है कभी,पर…
काशाना मंज़ूर हुआ तेरे दिल का अब हमको हर काशाना मंज़ूर हुआतेरी ज़ुल्फ़ों के साये में मर जाना मंज़ूर हुआ उठने लगीं हैं काली घटायें छलके हैं जाम-ओ-साग़रऐसे आलम में तुझको भी बलखाना मंज़ूर हुआ महकी महकी गुलमेंहदी है चाँद सितारे भी रौशनऐसे मौसम में उनको भी तरसाना मंज़ूर हुआ लहराते हैं ज़ुल्फें हमदम हर…
इसका क्या करना कौन कैसा है इसका क्या करनातुम समझदार हो वफा करना जिसने उँगली दी उसके हाथ गएकितना मुश्किल हुआ भला करना क्या भरोसा है कल ही मर जाँएज़िंदगी तुझसे क्या गिला करना रोज़ ख्वाबों से बच न जाया करमेरी नींदों पे कुछ दया करना सब परेशां है आस पास मगरवो भी हँस देंगे…
अपनी कहानी लिखना दिल के औराक़ पे जब अपनी कहानी लिखनादूध को दूध मगर पानी को पानी लिखना पढ़ तो लेता हूँ मैं तहरीर तेरे चेहरे कीदास्ताँ फिर भी कभी दिल की ज़ुबानी लिखना तेरे हाथों में है अब मेरे मुक़द्दर का वरक़मेरी रातों में उजालों की रवानी लिखना कैसे जलते हैं मेरे होंठ तेरी…