Paryavaran par Kavita in Hindi

कुपित हो रही है यह प्रकृति | Paryavaran par Kavita in Hindi

कुपित हो रही है यह प्रकृति

( Kupit ho rahi hai yah prakriti ) 

 

आत्महंता कर्म हम कर रहे हैं,
कुपित हो रही है यह प्रकृति
जीव–जंतु सभी यहां मर रहे हैं
है ये पर्यावरण की ही व्यथा कि,
हो रहा जो पर्यावरण दूषित यहां
आज सभी पक्षी भी हमारे लुप्त होते !
भोजन के लिए इधर उधर भटक रहे हैं ।।

आज निरंतर कटते वृक्ष चीख कर देखो
ये पर्यावरण की व्यथा हमसे कह रहे हैं,
त्राहिमाम थरथर यह धरती भी गर्मी से
जैसे जल उठी है ,ताप कैसे वह सह रही ,
वृक्षों के बिना धारा की झोली खाली पड़ी है
बिन सावन में वर्षा के कैसे वह श्रंगार करें
कैसे वातावरण बदलाब से सब प्यार करें।।

 

आशी प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
ग्वालियर – मध्य प्रदेश

यह भी पढ़ें :-

देश के नेता बोल रहे | Desh ke Neta

Similar Posts

  • डर के आगे जीत है (दोहे)

    डर के आगे जीत है (दोहे) **** (मंजूर के दोहे) ****** १) डर से हम डरते नहीं , ना इसकी पहचान। डराओ ना जग मुझको, मैं भी अब शैतान ।। २) डर कर जीया अभी तक,पकड़ लिया अब कान। जैसे को तैसा करूं,देख जगत हैरान।। ३) डरोना कभी किसी से,अक्ल से लो तुम काम। डराने…

  • कल गणतंत्र दिवस की भोर हैं

    कल गणतंत्र दिवस की भोर हैं कल गणतंत्र दिवस की भोर है,मेरा मन आत्म विभोर है।चारों ओर तिरंगे का शोर है,रंगोली लाइट द्वार सजे चारों ओर हैं।कल गणतंत्र दिवस की भोर हैं,मेरा मन आत्म विभोर है।। लहरा रहा तिरंगा देखो कैसी शान से,गूंजेगा कल देश गौरव गान से।सजा देश केसरिया श्वेत हरे रंग से,चारों ओर…

  • अष्ट दीप दान

    अष्ट दीप दान आदि लक्ष्मी अर्पित करें, प्रथम दीप का दान।ह्रदय बुद्धि शीतल करें, और बढ़ाएँ मान।। 1।। धन लक्ष्मी को दीजिये, दूजा दीपक दान।भौतिक सुख सम्पन्नता, मान और सम्मान।। 2।। कौशल प्रतिभा ज्ञान का, दीप तीसरा दान।विद्या लक्ष्मी जान कर, मनुज बढ़ाया मान।। 3 ।। अन्न बिना जीवन नही, अर्पित लक्ष्मी धान ।चौथा दीपक…

  • नफरत की दुनिया | Poem on world of hate in Hindi

    नफरत की दुनिया ( Nafrat ki duniya )   कितनी अजीब है यह कितनी लगे बेगानी नफरत की यह दुनिया ये कैसी है कहानी   झूठ कपट भरा पड़ा इस मतलबी संसार में नफरतों का जहर घुला लोगों के व्यवहार में   तीर सरीखे बोल कड़वे शक की सुई घूमती वहम की कोई दवा नहीं…

  • मेरी बहन | Meri Bahan

    मेरी बहन ( Meri Bahan )    बांधकर मेरी सूनी कलाई पर धागा, किसी ने मुझे भाई होने का सम्मान दिया, समाज की सोच से बिल्कुल परे एक प्रेम के धागे से, किसी ने मुझे अपने भाई से भी ज्यादा प्यार दिया, कोख अलग अलग है जन्म की, किसी ने अपने जीवन में मुझे कृष्ण…

  • लड़ाई लंबी है | Poem in Hindi on Ghaza War

    लड़ाई लंबी है ! ( Ladai lambi hai )    हुई मानवता तार-तार,लड़ाई लंबी है, नाच रही है मौत, लड़ाई लंबी है। एटम-बम बना खिलौना कुछ लोगों का, द्वार चक्रव्यूह तोड़,लड़ाई लंबी है। नभ,जल,थल से न बरसेंगे फूल कोई, लहू से सने हैं हाथ,, लड़ाई लंबी है। महंगाई,बेकारी पर किसी का ध्यान नहीं, बदलेगा भूगोल,लड़ाई…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *