Pension par kavita

पेंशन की लड़ाई में मेरी कलम से एक आहुति | Pension par kavita

पेंशन की लड़ाई में मेरी कलम से एक आहुति

( Pension ki ladai mein meri kalam se ek aahuti )

 

 

आज समय का आवाहन है, समझो चलो हमारे साथ।
मिलकर अपनी बात रखेंगे, पूरी होगी अपनी बात।।

 

जिसने भी संघर्ष किया है, खोकर ही कुछ पाया है
तुम्ही बताओ किसके हिस्से, बैठे ही सब आया है

 

सुबह सुहानी पाने के हित, चलो गुजारो थोड़ी रात।
मिलकर अपनी बात रखेंगे, पूरी होगी अपनी बात।।

 

करत करत अभ्यास पढ़ा है, क्या तुम सारा भूल गए
बड़े बड़े भी शैल हवा से, देखो एक दिन धूल भए

 

नहीं असंभव काम कोई भी, जब जुड़ते हाथों से हाथ।
मिलकर अपनी बात रखेंगे, पूरी होगी अपनी बात।।

 

कवि भोले प्रसाद नेमा “चंचल”
हर्रई,  छिंदवाड़ा
( मध्य प्रदेश )

 

यह भी पढ़ें :-

मत करो इसरार जी | Ishrar par kavita

 

Similar Posts

  • शंकर दयाल सिंह | Shankar Dayal Singh par kavita

    शंकर दयाल सिंह ( Shankar Dayal Singh )   भगवती कृपा प्रसाद पाया शंकर दयाल नाम भवानीपुरा में जन्मे शंकर कीर्तिमान सरनाम साहित्य कमल पंखुड़ी सा सौरभ लुटाता रहा सांसद रहकर सत्ता में परचम लहराता रहा राष्ट्रप्रेम भरा दीवाना देश प्रेम को जीता था जीवन की धूप छांव प्रेम सुधा रस पीता था संस्कृति सनातन…

  • कर्जदार | Karjdar | Kavita

    कर्जदार ( Karjdar)   धरती अंबर पर्वत नदियां सांसे हमने पाई है। पेड़ पौधे मस्त बहारें सब दे रहे हमें दुहाई है।   मातपिता का कर्ज हम पर प्रेम बरसाते। कर्जदार जन्मभूमि के पावन रिश्ते नाते।   देशभक्त मतवाले रहते जो अटल सीना तान। कर्जदार हम उनके लुटा गए वतन पर जान।   रात दिन…

  • स्वयं को बदले और

    स्वयं को बदले और ज़माने में आये हो तो जीने की कला को सीखो। अगर दुश्मनों से खतरा है तो अपनो पे भी नजर रखो।। दु:ख के दस्तावेज़ हो या सुख की वसीयत। ध्यान से देखोगें तो नीचे मिलेंगे स्वयं के ही हस्ताक्षर।। बिना प्रयास के मात्र हम नीचे गिर सकते है। ऊपर उठ नहीं…

  • अंधी दौड़ | Kavita andhi daud

    अंधी दौड़ ( Andhi daud )   नशा और उन्माद यह सर्द रात कैसा दौर आज नशा और उन्माद संस्कृति का विनाश प्रश्न पूछने पर बड़े बेतुके जवाब चुप रह जाते आप बिगड़ रहा समाज अंधी दौड़ कैसी भागमभाग बेकाबू गाड़ियां बेखौफ सवार अंधकार चहु ओर नीरसता सन्नाटा मौत का तांडव कहीं कोई दिखाता  …

  • लहर | Lehar

    लहर ( Lehar )   सागर की उठती गिरती लहरें भी देती हैं सीख हमे जीवन की करना है तैयार अगर मोती तो धरनी होगी राह संघर्ष की पर्याय नही कुछ सिवा प्रयास के रखना होगा विश्वास खुद पर भी वक्त के साथ संयम भी चाहिए सतत प्रयास करते रहना चाहिए कल कोरी कल्पना ही…

  • |

    Hindi Poetry On Life -मिलेंगे दर्द दुनिया से बचोगे तुम भला कब तक

    मिलेंगे दर्द दुनिया से बचोगे तुम भला कब तक ( Milenge Dard Duniya Se Bachoge Tum Bhala Kab Tak )     मिलेंगे दर्द  दुनिया से  बचोगे   तुम भला कब तक। यहां अपने-पराये सब  चुनोगे तुम भला कब तक।।   गए तन्हा तुझे जो छोङ  कर मत आस कर उनकी। ग़मों से वास्ता  रखना  डरोगे …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *