Poem Kyon

क्यों हवा ढूँढ रहे हो | Poem Kyon

क्यों हवा ढूँढ रहे हो

( Kyon hawa dhoondh rahe ho ) 

 

मैं हूँ एक सूरज क्यों अंधेरा ढूँढ रहे हो,
मैं हूँ तेरा समंदर क्यों कतरा ढूँढ रहे हो।

घर बनाने में उसने नपा दी पूरी उमर,
घर जलाने का बताओ क्यों पता ढूँढ रहे हो।

उतार तो लिया पहली ही नजर में दिल के अंदर,
तो बताओ क्यों नींद की दवा ढूँढ रहे हो।

महंगाई छीन ली सारा जहां का सुकून,
आटा हुआ है गीला,क्यों तवा ढूँढ रहे हो।

काटा है तूने जंगल कुछ पैसों के चक्कर में,
उखड़ रही हैं साँसें क्यों हवा ढूँढ रहे हो।

मेरे दिल में वो रहती है उसे जलाऊँ कैसे,
कब्र में लटका है पैर, तू अदा ढूँढ रहे हो।

हिसाब नहीं कर पाओगे आज के रहनुमा का,
चमचमाती धूप में क्या सजा ढूँढ रहे हो।

बहा नदियों खून तब जाकर मिली आजादी,
जो लूट रहे हैं देश,उनका पता ढूँढ रहे हो।

तोतली उम्र निकल गई तो समझो मजा गया,
अब इस ढलती उम्र में क्या नखरा ढूँढ रहे हो।

लूटपाट,हत्या,डकैती और कितना किया खून,
आया जाने का वक़्त तो खुदा ढूँढ रहे हो।

 

रामकेश एम.यादव (रायल्टी प्राप्त कवि व लेखक), मुंबई

यह भी पढ़ें :-

बगावत ना करो | Poem Bagawat na Karo

 

Similar Posts

  • खूबसूरत | Khoobsurati ki Tareef par Kavita

    खूबसूरत ( Khoobsurat )    खूबसूरत नज़र आती हो, अदाओं से भी लुभाती हो, आती हो जब भी सामने सच में कयामत ढाती हो। माथे पर बिंदी सजाती हो, आँखों में कजरा लगाती हो, महकाती हो बालों में गजरा सच में कयामत ढाती हो। हाथों में मेहंदी रचाती हो, चूड़ी कंगना खनकाती हो, ओढ़ती हो…

  • मां महागौरी | Maa Mahagauri

    मां महागौरी ( Maa Mahagauri )    नवरात्रि की अष्टमी शुभ तिथि है आई, माता पूजन और हवन कर लो सब भाई। अष्टम दुर्गा के रूप में आती हैं महागौरी, वृष सवारी करती माता चार भुजाधारी। एक हाथ में त्रिशूल धरे दूजे डमरू बजाए, शान्त स्वभाव वाली माता वर मुद्रा दिखलाए। शिव प्रिया मां उमा…

  • घर की देवी | Ghar ki devi par kavita

    घर की देवी ( Ghar ki devi )   ज्ञान के आभूषण से अलंकृत महत्वकांक्षी,आत्मसम्मान से भरी जीवन के संघर्षो से नही हारी सशक्त हूं तृष्णाओं से परे हूं ।।   ओज की ज्वाला जलाकर मैं मर्यादा के गहनों से ही अपनी नित देह को सजाती हूं स्त्री हूं रिश्ते सभी निभाती हूं।।   तपकर…

  • नया साल : नयी आशाएं

    नया साल : नयी आशाएं ******* बीता यह वर्ष रे आया नववर्ष रे! झूमो ओ काका झूमो रे काकी रात अंतिम यह बाकी? नाचो ए बबलू नाचो ए बबली गाओ ना भैया गाओ ना भाभी बजाओ सब ताली सजाओ जी थाली? छोड़ो पटाखा करो धूम धड़ाका थिरकना जरा सा डिस्को जरा सा! है रात मतवाली…

  • बहुत खूबसूरत हैं ये यादें

    बहुत खूबसूरत हैं ये यादें इंतजार उनका करने की कुछ ऐसी आदत पड़ी है। जानते हैं कि नहीं आएंगे वो, फिर भी द्वार पर नज़र गड़ी है। रह रह कर राह तकते हैं, आए नहीं वो यादों से निकलकर। लग रहा है थक गई है घड़ी भी चल‌ चलकर। उम्र गुजर गई पर खुद को…

  • बड़े भैया | Bade Bhaiya

    बड़े भैया ( Bade Bhaiya )   लिख देती हूं हर रोज एक पैगाम , मन के जुड़े तार से, पढ़ लेता है वो मन की बात, और संभाल लेता बड़े प्यार से, कहने को तो बहुत दूर है मुझसे, लेकिन करीब लगता ज्यादा सांसों से, मैंने कभी जो सोचा नहीं सपनों में, बड़े भैया…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *