शाम लगभग नौ बजे | Shaam lagbhag nau Baje
शाम लगभग नौ बजे
( Shaam lagbhag nau baje )


( Shaam lagbhag nau baje )


ज़ख़्म हुए नासूर ( zakhm hue nasoor ) बिखरी यादें टूटे सपने, क्या तुमको दे पाऊंगी। ज़ख़्म मेरे नासूर हुए हैं, कैसे ग़ज़ल सुनाऊंगी।। हक था तुम्हारा मेरे यौवन की, खिलती फुलवारी पर। पर तुम माली बन न पाए, मैं पतझड़ बन जाऊंगी।। ज़ख्म मेरे नासूर हुएं हैं कैसे ग़ज़ल सुनाऊंगी। मेरी मुस्काने और खुशियां,…

फिर वही बात! ( Phir Wahi Baat ) ***** फिर वही बात कर रही है वो, चाहता जिसे भुलाना मैं था वो। ले गई मुझे उस काल कोठरी में, जिसे बांध गांठ , टांग आया था गठरी में। जाने बात क्या हो गई है अचानक? बार बार उसे ही दुहरा रही है, मेरी इंद्रियां समझ…

प्रतिशोध ( Pratisodh ) प्रतिशोध की उठती ज्वाला जब अंगारे जलते हैं सर पर कफ़न बांधे वीर लड़ने समर निकलते हैं जब बदले की भावना अंतर्मन में लग जाती है तन बदन में आग लगे भृकुटियां तन जाती है तीखे बाण चले वाणी के नैनों से ज्वाला दहके प्रतिशोध की अग्नि में…

अहंकार और विश्वास ( Ahankar aur vishwas ) अहंकार और विश्वास में, जमीं आसमां का फर्क उर तरंग नित्य पावन, निज शक्ति अवबोध । व्यक्तित्व धारण नम्रता, नेह झलक कृतित्व शोध । स्व श्रद्धा शुचिता प्रसून, घमंड विलोपन जीवन अर्क । अहंकार और विश्वास में, जमीं आसमां का फर्क ।। दर्प फलन अनैतिकता, कर्म…

दुपहरी जेठ की ( Dupahari Jeth ki ) जेठ की दुपहरी नंगे पांव चलती है, जड़ हो चेतन सभी को ये खलती है। सूख जाता है तब नदियों का पानी, गरम -गरम लू चहुँ ओर चलती है। बेचारे परिन्दे बुझायें प्यास कहाँ, तवे की तरह धरती खूब तपती है। झुलस जाता है कलियों का…

मौके का वक्त ( Mauke ka waqt ) मिल जाता है मौका भी कभी-कभी उन अपनों को आजमाने का जो भरते हैं दंभ अपनेपन का लगा देते हैं शर्त वक्त की वक्त के प्रवाह से बचा भी नहीं कोई वक्त ने डुबाया भी नहीं किसी को वक्त देता है मौका सभी को…