Shringar Mera

श्रृंगार मेरा सब पिया से | Shringar Mera

श्रृंगार मेरा सब पिया से

( Shringar mera sab piya se ) 

 

पांव में पायल कान में झुमके,
कंगना बोल रहे जिया से।
गौरी शरमाकर यूं बोली,
श्रृंगार मेरा सब पिया से।

नाक की नथली बाजूबंद,
हार सज रहा है हिया पे।
कमरबंद के घुंघरू बोले,
श्रंगार मेरा सब पिया से।

लाल लाल होठों की लाली,
चूड़ियों की खनखन रे।
माथे का सिंदूर कह रहा,
श्रृंगार मेरा सब पिया से।

गौरी के नाजों नखरे सब,
मोरनी सी मस्तानी चाल रे।
झील सी आंखें बतलाती,
श्रंगार मेरा सब पिया से।

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

करवा चौथ | Karwa Chauth kavita

Similar Posts

  • Kavita Papi pet ke khatir | पापी पेट की खातिर

    पापी पेट की खातिर ( Papi pet ke khatir )   वो चिड़िया रोज सवेरे है आती करने चीं चीं चीं चीं मधुर स्वर लहरियां उसकी मेरे मीठे स्वप्न पर,भारी है पड़ती। जाग जाता हूं फटाफट उसके लिए दाना पानी रख आता हूं फुदक फुदककर है खाती कभी जलपात्र में नहाती मानो मुझे हो रिझाती…

  • हिंदी को अपनाओ | Hindi ko Apnao

    हिंदी को अपनाओ ( Hindi ko Apnao ) बच्चों हिंदी को अपनाओ,हिंदी का तुम मान बढ़ाओ,हिंदी हिंदुस्तान की भाषा,हिंदुस्तानी तुम कहलाओ, लिख लो हिंदी, पढ़ लो हिंदी,हिंदी बड़ी अलबेली है,बोलो हिंदी, गा लो हिंदी,हिंदी रंग-रंगीली है,हिंदी को व्यवहार मे लाओ,हिंदी का परचम फहराओ,बच्चों हिंदी को अपनाओ,हिंदी का तुम मान बढ़ाओ, खेलो-कूदो हिंदी के संग,हिंदी सखा-सहेली…

  • नाग पंचमी | Poem Nag Panchami

    नाग पंचमी ( Nag Panchami ) गाय दुग्ध मे नहलाते नागों को नाग लोक मे, जले अग्नि मे महाभारत काल नाग यज्ञ में, रक्षा नागों की ब्राम्हण आस्तिक ने रोंक यज्ञ की, श्रावण शुक्ल पंचमी का दिन था यही विपुल, भाई बहन की है कथा इसमें बड़ी पावन, हम हर्षाते नागपंचमी कह इसे मनाते, दूं…

  • मदांध हो ना करें कोई चर्चा | Charcha par kavita

    मदांध हो ना करें कोई चर्चा ! ***** चर्चा की जब भी हो शुरुआत, टाॅपिक हो कुछ खास । समसामयिक मुद्दे हों या हो इतिहास/विज्ञान की बात! बारी बारी से सबकी सुनें, फिर अपनी बात भी गंभीरता से कहें। उद्वेगी स्वर या उतावलेपन की- ना हो बू-बास, तथ्यपरक जानकारियों पर करें विश्वास। तर्क सबका अपना…

  • हम होंगे कामयाब | Kavita hum honge kamyab

    हम होंगे कामयाब ( Hum honge kamyab )   कभी ना कभी हम भी होगें कामयाब, ये उम्मीद का दीया जो है हमारे पास। ॲंधेरा मिटाकर हम भी करेंगें प्रकाश, एक ऐसी उर्जा होती है सभी के पास।। देखी सारी दुनियां तब समझें है आज, क्या-क्या छुपाकर लोग रखते है राज। छोड़ना पड़ता है घर…

  • ओ निर्मोही | Kavita o nirmohi

    ओ निर्मोही ( O nirmohi )   ओ निर्मोही ओ निर्मोही चले गए क्यों, छोड मुझें परदेश। तपता मन ये तुम्हें बुलाए, लौट के आजा देश। तुम बिन जीना नही विदेशिया,पढ लेना संदेश। माटी मानुष तुम्हे बुलाए, छोड के आ परदेश।   2. चटोरी नयन  चटोरी नयन हो गयी, पिया मिलन की आस में। निहारत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *