ले गया सकूँ | Sukoon Shayari in Hindi

ले गया सकूँ

( Le gaya sukoon ) 

 

न रही उसको अब उल्फ़त है ?
ले गया सकूँ सब राहत है

चोट लगी ऐसी दग़ा की कल
अब उल्फ़त दिल से रुख़सत है

गुल न लिया चाहत का उसने
टूटी दिल की ही हसरत है

उल्फ़त में ऐसा टूटा दिल
न यहाँ दिल को अब फ़ुरसत है

हिज्र का दर्द मिला है ऐसा
दिल में होती अब गफ़लत है

उसने जानें से ए गीता
दिल में हर पल ही ख़लवत है

 

गीता शर्मा 

( हिमाचल प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

मुहब्बत का गुल | Muhabbat ki Poetry

Similar Posts

  • तुम्हारा नाम | Tumhara Naam

    तुम्हारा नाम ( Tumhara Naam ) न याद-ए-आब-जू आए न याद-ए-आबशार आए।तुम्हारा नाम ही लब पर हमारे बार-बार आए। रहें होश-ओ-हवास़ अपने सलामत उस घड़ी या रब।हमारे सामने जिस दम जमाल-ए-ह़ुस्ने-यार आए। अभी दौर-ए-ख़िजां है तुम अभी से क्यों परेशां हो।सजा लेना नशेमन को गुलों पर जब निखार आए। सजा रक्खी है जिसके वास्ते यह…

  • सुमन सिंह याशी की ग़ज़लें | Suman Singh Yashi Poetry

    ठोकर लाखों खाई  होगी ठोकर लाखों खाई  होगी । तब आख़िर टकराई होगी। ऐब गिनाने से पहले तुम ढूंढों, कुछ अच्छाई होगी II कितनी उम्मीदें आँखों में I पलती ले अंगड़ाई  होगी II जब आँखें ही मोल न समझे I तब आवाज उठाई होगी II यार खिलौना दिल मत समझो। एक दिन सब भरपाई होगी।।…

  • दिल में शोले उठे हैं यहां | Dil Chune wali Shayari

    दिल में शोले उठे हैं यहां ( Dil mein shole uthe hai yahan )    इश्क में लुट चुके है यहां दिल में शोले उठे हैं यहां घेर ली है ज़मीं कांटों ने फूल कब खिल सके हैं यहां सब फरेबी निकलते हैं लोग सोच से सब परे हैं यहां दौलतें शोहरतें देखकर लोग इज़्ज़त…

  • बारिश | Baarish Poem

    बारिश ( Baarish )    आई है सौ रंग सजाती और मचलती ये बारिश रिमझिम रिमझिम बूंदों से सांसों में ढलती ये बारिश। दर्द हमेशा सहकर दिल पत्थर के जैसे सख़्त हुआ सुन कर दर्द हमारा लगता आज पिघलती ये बारिश। याद हमें जब आते हैं वो उस दिन ऐसा होता है पांव दबाकर नैनो…

  • वो घूंघट पट खोल रहा है

    वो घूंघट पट खोल रहा है वो घूंघट पट खोल रहा हैतन-मन मेरा डोल रहा है आजा,आजा,आजा,आजामन का पंछी बोल रहा है अपने नग़मों से वो मेरेकानों में रस घोल रहा है पाप समझता था जो इसकोवो भी अब कम तोल रहा है मेरे घर की बर्बादी मेंअपनों का भी रोल रहा है लगते हैं…

  • हवा में उड़ा दीजिए | Ghazal Hawa mein Uda Dijiye

    हवा में उड़ा दीजिए  ( Hawa mein Uda Dijiye )   साज़े-दिल पर ग़ज़ल गुनगुना दीजिए शामे-ग़म का धुँधलका हटा दीजिए ग़म के सागर में डूबे न दिल का जहाँ नाख़ुदा कश्ती साहिल पे ला दीजिए एक मुद्दत से भटके लिए प्यास हम साक़िया आज जी भर पिला दीजिए इल्तिजा कर रहा है ये रह-रह…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *