हवा में उड़ा दीजिए | Ghazal Hawa mein Uda Dijiye

हवा में उड़ा दीजिए 

( Hawa mein Uda Dijiye )

 

साज़े-दिल पर ग़ज़ल गुनगुना दीजिए
शामे-ग़म का धुँधलका हटा दीजिए

ग़म के सागर में डूबे न दिल का जहाँ
नाख़ुदा कश्ती साहिल पे ला दीजिए

एक मुद्दत से भटके लिए प्यास हम
साक़िया आज जी भर पिला दीजिए

इल्तिजा कर रहा है ये रह-रह के दिल
फ़ासला आज हर इक मिटा दीजिए

कर रही हैं बहारें भी सरगोशियाँ
मन का पंछी हवा में उड़ा दीजिए

मुन्हसिर आपकी हम तो मर्ज़ी पे हैं
आपके दिल में क्या है बता दीजिए

दोनों घुट-घुट के इक दिन न मर जायें यूँ
बात बिगड़ी हुई अब बना दीजिए

अपनी मंज़िल की जानिब रहूँ गामज़न
मेरे जज़्बात को हौसला दीजिए

इन अंधेरों में दिखने लगे रास्ता
मेरे मुश्किलकुशा वो ज़िया दीजिए

मेरा महबूब ग़ज़लों में हो जलवागर
मेरे लफ़्ज़ों में वो ज़ाविया दीजिए

कट ही जायेगा ख़ुशियों से साग़र सफ़र
आप रह-रह के बस मुस्कुरा दीजिए

Vinay

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003

मुनहसिर–निर्भर
ज़िया – प्रकाश, रोशनी
जलवागर— विशेष श्रृंगार में सामने आना

यह भी पढ़ें:-

बिखर न जाऊँ | Ghazal Bikhar na Jaoon

 

Similar Posts

  • परिवार अपना | Parivaar Apna

    परिवार अपना ( Parivaar Apna ) जहाँ से निराला है परिवार अपनाइसी पे लुटाता रहूँ प्यार अपना कदम बेटियों के पड़े घर हमारेमहकने लगा है ये संसार अपना ये बेटे बहू कब हुए है किसी केजो इनपे जताऊँ मैं अधिकार अपना मजे से कटी ज़िन्दगी भी हमारीचला संग मेरे जो दिलदार अपना करूँ मैं दुआएं…

  • कोई अब अरमान नहीं है | Arman Shayari

    कोई अब अरमान नहीं है ( Koi ab arman nahin hai )    प्यार की पहचान नहीं है कोई अब इंसान नहीं है इस जगत में कौन है ऐसा जो यहाँ मेहमान नहीं है हर कोई मायूस लगे अब चेहरों पर मुस्कान नहीं है बाप की बातें न ले दिल पर ये तेरा अपमान नहीं…

  • अपनी आँखों में आसूँ खुशी के

    अपनी आँखों में आसूँ खुशी के अपनी आँखों में आसूँ खुशी केस्वप्न सच हो गये ज़िन्दगी के उनके आते ही आयीं बहारेंलौट आये हैं दिन आशिकी के कुछ तो मजबूरियां होगीं उनकीपास जाते न यूँ वो किसी के बात क्या है जो तू डर रहा हैतूने देखे हैं दिन बेबसी के जिन बहारों का मौसम…

  • इंसानियत का रथ | Insaniyat ka Rath

    इंसानियत का रथ ( Insaniyat ka rath )   शर्मिंदा किस कदर है इंसानियत का रथ बढ़ता ही जा रहा है हैवानियत का रथ वाइज़ बिछा रहे हैं बस अपनी गोटियाँ रोकेगा कौन देखो शैतानियत का रथ हो जायें बंद अब यह फिरक़ापरस्तियां आयेगा शहर में कब इंसानियत का रथ निकला हूँ फूल लेके उस…

  • जवानी | Ghazal Jawani

    जवानी ( Jawani ) जब जवानी ने खेल खेले थे हर तरफ फूल थे व मेले थे हम कभी भूल ना सकेंगे की फूल के साथ हम अकेले थे हां, झमेले भी थे मगर यारों वे सुगंधित हसीं झमेले थे काम था नाम था जवानी थी जेब में लाख लाख धेले थे वास्ता सिर्फ था…

  • मिजाज | Mijaaj

    मिजाज एक लम्हे में कैसे मिजाज बदल लेते हैं, यह जहां पल में रिश्ते तमाम बदल लेते हैं। इतनी जल्दी तो मौसम भी नहीं बदला करते, यह ऐसे बदलते जैसे लिबास बदल लेते हैं। एहसास-ओ-जज़्बात से खाली हो गए हैं सारे, ये मतलब के लिए तो ख़्याले-मीरास बदल लेते हैं। तुम उनको जवाब देकर तो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *